जापान की संसद में AI इंजीनियरों की एंट्री:टी-शर्ट व पोनीटेल वाले नेता चर्चा में, कहते हैं राजनीति से सुस्ती दूर कर देंगे; ‘टीम मिराई’ ने 11 सीटें जीतीं, 30 लाख वोट भी

जापान की संसद में AI इंजीनियरों की एंट्री:टी-शर्ट व पोनीटेल वाले नेता चर्चा में, कहते हैं राजनीति से सुस्ती दूर कर देंगे; ‘टीम मिराई’ ने 11 सीटें जीतीं, 30 लाख वोट भी




जापान की संसद में इन दिनों एक शख्स चर्चा में है… ताकाहिरो एनो। 35 साल के एनो सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और राजनीतिक पार्टी ‘टीम मिराई’ के प्रमुख नेता हैं। टीम मिराई यानी भविष्य की टीम। पार्टी को टेक इंजीनियर्स ने बनाया है। हाल के चुनावों में सबको चौंकाते हुए जापान की संसद (निचले सदन) में पार्टी ने 11 सीटें जीतीं। पार्टी ने राजनीतिक दिग्गजों को पछाड़कर 30 लाख वोट भी अपने खाते में बटोरे हैं, जबकि सिर्फ 14 ही प्रत्याशी उतारे थे। एनो कहते हैं,‘एआई आग की तरह है, जो सभ्यता को पूरी तरह बदल देगा। जहां पश्चिमी देश इस एआई को ‘टर्मिनेटर’ जैसा खतरनाक मानकर डरते हैं, वहीं जापान के लोग इसे ‘डोरेमोन’ जैसा मददगार और प्यारा दोस्त समझते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि टीम मिराई की जीत की वजह उनका ‘प्रैक्टिकल’ होना है। उनका तरीका ‘न वामपंथी है, न दक्षिणपंथी’। जापान फोरसाइट के संस्थापक टोबियस हैरिस के अनुसार, वे सिर्फ समस्याओं को हल करने पर ध्यान देते हैं। उन्होंने लोकलुभावन वादों के बजाय जटिल मुद्दों को सुलझाने की बात की। 40 से 50 की उम्र के शहरी मतदाताओं ने उन्हें हाथों-हाथ लिया। जीते उम्मीदवारों में टोक्यो और बर्कले जैसे बड़े संस्थानों के पढ़े एक्सपर्ट और आईबीएम-सोनी के पूर्व कर्मचारी शामिल हैं। सिलिकॉन वैली में इंजीनियर रहे नवनिर्वाचित सांसद आओई फुरुकावा, कहते हैं,‘कोडिंग और कानून बनाना एक जैसा है, क्योंकि दोनों के लिए तर्क और सटीक संरचना की जरूरत होती है।’ प्रस्ताव समझाने के लिए चैटबॉट, 39 हजार सवालों के जवाब दिए टीम मिराई की कार्यशैली की झलक वादों में भी दिखी। इन्होंने चुनाव जीतने के हाई-टेक समाधानों पर जोर दिया। ड्राइवरलेस बसें लाना, राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता के लिए डिजिटल डेटाबेस बनाना, ताकि भ्रष्टाचार रुके। AI के जरिए सरकारी खर्चों में कमी करके मध्यम वर्ग को पेंशन व स्वास्थ्य बीमा में राहत जैसे वादे किए। पार्टी ने प्रस्ताव समझाने के लिए चैटबॉट भी शुरू किया। इसने 39 हजार सवालों के जवाब दिए और 6,200 से ज्यादा सुझाव जुटाए। बड़ी चुनौती संसद तक तो इंजीनियर्स पहुंच गए, लेकिन असली जंग अब शुरू हुई है। जापान की नौकरशाही आज भी ‘फैक्स मशीन’, ‘फ्लॉपी डिस्क’ और कागज के ढेरों पर टिकी है। संसद के कई कमरों में लैपटॉप और टैबलेट ले जाने पर पाबंदी है। बोर्ड पर ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ व ‘मशीन लर्निंग’ जैसे शब्द लिखने वाले इन युवा सांसदों को अब उन बुजुर्ग नेताओं के साथ काम करना होगा जो अब भी डिजिटल युग से दूर हैं। टीम मिराई का नारा है… सुस्त राजनीति को तेज बनाओ… इसने राजनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है। आमतौर पर सफेद शर्ट और फॉर्मल सूट में दिखने वाले जापानी राजनेताओं के बीच अब ‘लाइन्स ऑफ कोड’ लिखी टी-शर्ट, पोनीटेल और इंडिगो सूट वाले चेहरे दिखने लगे हैं। संकेत साफ हैं कि भविष्य की राजनीति कोड, चैटबॉट व डेटा के सहारे भी लिखी जा सकती है।



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