Indian refiners looking to increase Russian oil purchases

Indian refiners looking to increase Russian oil purchases


नई दिल्ली4 घंटे पहले

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भारत रूसी तेल का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार है।

मिडिल ईस्ट में ईरान-इजराइल के बीच जंग और तेल की सप्लाई चैन प्रभावित होने के बाद भारत ने एक बार फिर रूस की ओर रुख किया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने का प्लान बना रहा है।

पिछले कुछ दिनों में स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के जरिए होने वाली तेल की सप्लाई लगभग ठप हो गई है, जिसके चलते सरकारी रिफाइनरीज और पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने दिल्ली में एक इमरजेंसी मीटिंग कर विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं।

भारत की समुद्र में खड़े रूसी तेल टैंकरों को खरीदने की तैयारी

रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन रूसी तेल कार्गो को खरीदने पर विचार कर रहा है, जो फिलहाल भारतीय समुद्र के करीब या एशियाई जल क्षेत्र में मौजूद हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इस समय लगभग 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल टैंकरों में भरकर एशियाई देशों के आसपास वेटिंग मोड में है। सप्लाई में कमी आने की स्थिति में भारत इन टैंकरों को तुरंत रिसीव कर सकता है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन का समय और लागत दोनों कम होगी।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है। भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है।

भारत के लिए क्यों जरूरी है रूसी तेल?

सस्ता विकल्प: रूस भारत को बेंचमार्क कीमतों से डिस्काउंट पर तेल ऑफर करता है।

सप्लाई सिक्योरिटी: मिडिल ईस्ट में तनाव होने पर स्ट्रैट ऑफ होर्मुज से सप्लाई रुक जाती है, रूस एक सुरक्षित विकल्प है।

इकोनॉमी पर असर: सस्ता तेल मिलने से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहती हैं और महंगाई काबू में रहती है।

फरवरी में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई थी रूसी तेल की खरीद

अमेरिकी दबाव और प्रतिबंधों की सख्ती के कारण भारत ने पिछले कुछ महीनों में रूस से तेल की खरीद कम कर दी थी। फरवरी में भारत ने रूस से प्रतिदिन केवल 10 लाख बैरल तेल खरीदा, जो सितंबर 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है। हालांकि, अब मिडिल ईस्ट में युद्ध के हालात और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कमी को देखते हुए भारत ने अपनी रणनीति बदलने के संकेत दिए हैं।

अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर एडिशनल टैरिफ लगाया था

पिछले महीने भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते पर चर्चा हुई थी। इसमें भारत पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने की बात थी। दरअसल, इस 50% टैरिफ में से आधा हिस्सा उन देशों के लिए ‘दंडात्मक शुल्क’ था जो रूस से तेल खरीद रहे थे।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए भारत पर लगे 25% टैरिफ को हटा दिया था। ट्रम्प ने दावा किया था कि उन्होंने यह छूट इसलिए दी क्योंकि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गया है। हालांकि, भारत ने कभी भी सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी प्रतिबद्धता को स्वीकार नहीं किया है। रूस ने भी कहा है कि उसे भारत के रुख में बदलाव का कोई कारण नजर नहीं आता।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प टैरिफ को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था

हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा कई देशों पर लगाए गए टैरिफ को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था। इसके बाद ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिका में होने वाले इम्पोर्ट पर 15% टैरिफ लगाने का फैसला किया है, जो कानूनन अधिकतम सीमा है।

अब भारत का तेल मंत्रालय और विदेश मंत्रालय मिलकर अमेरिका के साथ बातचीत कर रहे हैं ताकि रूस से तेल खरीदने पर भारत को दोबारा दंडात्मक टैरिफ का सामना न करना पड़े।

भारत रूसी तेल का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार

दिसंबर 2025 में भारत रूस से तेल खरीदने में तीसरे नंबर पर रहा। तुर्किये दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया। तुर्किये ने 2.6 बिलियन यूरो का तेल खरीदा। भारत ने दिसंबर में रूस से 2.3 बिलियन यूरो (लगभग 23,000 करोड़ रुपए) का तेल खरीदा। नवंबर में भारत ने 3.3 बिलियन यूरो (34,700 करोड़ रुपए) का तेल खरीदा था।

चीन अब भी सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है, उसने दिसंबर में रूस से 6 बिलियन यूरो यानी करीब 63,100 करोड़ रुपए का तेल खरीदा। भारत की खरीद कम होने की सबसे बड़ी वजह रिलायंस इंडस्ट्रीज रही। रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी ने रूस से तेल खरीद करीब आधी कर दी।

पहले रिलायंस पूरी सप्लाई रूस की कंपनी रोसनेफ्ट से लेती थी, लेकिन अमेरिका के प्रतिबंधों के डर से अब कंपनियां रूस से तेल कम खरीद रही हैं। रिलायंस के अलावा सरकारी तेल कंपनियों ने भी दिसंबर में रूस से तेल खरीद करीब 15% घटा दी।

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होर्मुज बंद नहीं होगा, लेकिन पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं: ₹4-5 बढ़ सकते हैं दाम; सोना ₹30 हजार बढ़ने की उम्मीद; अमेरिका-ईरान जंग का असर

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि फिलहाल होर्मुज जलमार्ग को बंद करने का कोई इरादा नहीं है। एक दिन पहले जब अमेरिकी हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे तो आशंका जताई जा रही थी कि ईरान होर्मुज को बंद कर सकता है।

अगर होर्मुज बंद होता तो कच्चे तेल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकते थे। इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल पर दिख सकता था। हालांकि एक्सपर्ट अभी भी मान रहे है कि कच्चे तेल के दामों में बढ़ोतरी का जोखिम अभी भी बना हुआ है। पूरी खबर पढ़ें…

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