कोल-इंडिया के अध्यक्ष से खास बातचीत:साईराम बोले- देश में प्राथमिक ऊर्जा की जरूरतों का 55 प्रतिशत हिस्सा कोल बेस्ड, उत्पादन व उपलब्धता पर फोकस

कोल-इंडिया के अध्यक्ष से खास बातचीत:साईराम बोले- देश में प्राथमिक ऊर्जा की जरूरतों का 55 प्रतिशत हिस्सा कोल बेस्ड, उत्पादन व उपलब्धता पर फोकस




कोयले की बिजली बनाने में अहम भूमिका है। कोल के मेगा प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने की दिशा में हम मजबूती से बढ़ रहे हैं। कोल इंडिया ने विदेशों में भी खनन के क्षेत्र में बढ़ रहा है। यह बातें कोल इंडिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक बी साईराम ने कहीं। कोरबा प्रवास के दौरान उन्होंने भास्कर से बातचीत में भविष्य में ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने में कंपनी की योजना पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि देश की प्राथमिक ऊर्जा की जरूरतों का 55% हिस्सा कोयले पर आधारित है प्रस्तुत है उनसे बातचीत के अंश… युद्ध के दौर में देश में ईंधन संकट से निपटने में कोल इंडिया कैसे तैयार है?
साईराम- हम पूरी तरह से तैयार हैं। 130 मिलियन टन कोयला पिट हेड स्टॉक में है। माइंस में 55 मिलियन टन कोयले का एक्सपोजर है, जिसे तुरंत उत्पादन में बदला जा सकता है। 50 मिलियन टन कोयला पावर सेक्टर के पास पहुंच चुका है। हमारा फोकस उत्पादन के साथ कोयले की उपलब्धता पर है। गर्मी में बिजली की मांग बढ़ती है। क्या पीक डिमांड के लिए तैयार हैं?
-हां, हम 100% तैयार हैं। 72% बिजली का उत्पादन कोयला आधारित है। लंबी दूरी तक कोयला पहुंचाने रेलवे ने बहुत काम किया है। 2029 तक हम 994 मिलियन टन कोयला एफएमसी के जरिए प्रेषित करने की योजना पर काम कर रहे हैं। वर्तमान में 46 परियोजनाओं के जरिए 432 मिलियन टन कोयला प्रेषित किया जा रहा है। जिसे बढ़ाकर परियोजनाओं की संख्या बढ़ाकर 92 की जा रही है। 2030 तक कन्वेयर बेल्ट से एक हजार मिलियन टन कोयले का डिस्पैच करेंगे। देश में मध्य व पूर्वी क्षेत्र में जो कोयले का भंडार है उसे खनन और परिवहन को लेकर ऐसी प्लानिंग है कि पीक डिमांड को पूरा करने हम हमेशा तैयार रहेंगे। माइनिंग के साथ प्रोसेसिंग व सोलर एनर्जी में कोल इंडिया को कहां पाते हैं?
-माइनिंग और मिनरल को कैसे विकसित करें, इस दिशा में वैल्यू चेन को डेवलप कर रहे हैं। क्रिटिकल मिनरल्स के एसेट्स की माइनिंग के साथ प्रोसेसिंग की दिशा में हमने कदम बढ़ाया है। सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में नेट जीरो कंपनी बनाने का लक्ष्य है। गुजरात के पाटन में 100 मेगावाट सोलर जेनरेशन का काम शुरू किया है। देश के अन्य राज्यों जैसे राजस्थान,उत्तरप्रदेश में भी इसकी शुरुआत कर रहे हैं। क्रिटिकल मिनरल्स और सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में हम विदेशों में काम कर रहे हैं। चिली,अर्जेंटिना, ऑस्ट्रेलिया में कोल इंडिया काम शुरू करने की दिशा में है। खनन के साथ कोल इंडिया की प्राथमिकता क्या है?
-कोयला उत्पादन के साथ कम्युनिटी और पर्यावरण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता में है। भूमि अधिग्रहण के मामले में अब हम ग्राम वासियों से संवाद पर जोर दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ में जिला प्रशासन, प्रदेश सरकार के सहयोग से काम कर रहे हैं। उनके सहयोग से कम्युनिटी से हमारा तालमेल बढ़िया है। आने वाले 3 वर्षों में गेवरा-दीपका-कुसमुंडा जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स से देश की ऊर्जा जरूरतों की बड़े पैमाने पर आपूर्ति करने में हम सक्षम हो सकेंगे। कोल इंडिया यहां सिर्फ कोयला लेने आई है या कोरबा का भविष्य भी बनाने आई है?
-कोरबा जिले में कोयला आधारित उद्योगों के आने से जीवन स्तर में बहुत सुधार आया है। हम उत्पादन में अब जिस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसका असर समुदाय के विकास, पर्यावरण और सेफ्टी पर दिखेगा। हमारी तैयारी डिजिटल टेक्नोलॉजी पर जाने की है। रोजगार, कारोबार,पुनर्वास, सोशल इकॉनॉमी सहित सभी क्षेत्रों में बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।



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