सभी कलेक्टरों और नगरीय निकायों को बाल आयोग का नोटिस:खुले गड्ढों और नालों से बच्चों की मौत पर दिखाई सख्ती, 7 जुलाई तक मांगी एक्शन रिपोर्ट

सभी कलेक्टरों और नगरीय निकायों को बाल आयोग का नोटिस:खुले गड्ढों और नालों से बच्चों की मौत पर दिखाई सख्ती, 7 जुलाई तक मांगी एक्शन रिपोर्ट




बारिश के दौरान खुले गड्ढों, नालियों और निर्माण स्थलों पर हादसों में बच्चों की मौत के मामलों को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने नगरीय प्रशासन विभाग, सभी जिला कलेक्टरों और नगरीय निकायों को सख्त अनुशंसा भेजी है। आयोग ने पूरे शहरी क्षेत्र में तत्काल सर्वे कराने, खुले गड्ढों को सुरक्षित करने और 7 जुलाई 2026 तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि उसके सामने ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें कॉलोनियों के निर्माणाधीन गड्ढों, सड़कों पर खुले गड्ढों या बारिश में ढक गई नालियों में गिरने से बच्चों की जान गई है। इसे बेहद गंभीर और दुखद बताते हुए आयोग ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 13 और 15 के तहत बच्चों के जीवन की सुरक्षा के लिए यह अनुशंसा जारी की है। क्या करने के निर्देश दिए गए आयोग ने कहा है कि सभी नगरीय क्षेत्रों में विशेष सर्वे अभियान चलाकर खुले गड्ढों, नालियों और निर्माणाधीन स्थानों की पहचान की जाए। जहां संभव हो वहां गड्ढों को तुरंत भरा जाए, अन्यथा उनके चारों ओर बैरिकेडिंग या बल्ली लगाकर सुरक्षा घेरा बनाया जाए ताकि बच्चे वहां न गिरें। निर्माण एजेंसियों की भी जिम्मेदारी तय आयोग ने सभी निर्माण एजेंसियों और आवासीय कॉलोनियों को निर्देश जारी करने की अनुशंसा की है कि निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढों, नींव और कॉलम वाले स्थानों के चारों ओर सुरक्षा घेरा लगाना अनिवार्य किया जाए। संवेदनशील निर्माण स्थलों पर चौकीदार या सुरक्षाकर्मी तैनात करने की भी बात कही गई है। बारिश में बढ़ जाता है खतरा आयोग ने कहा है कि बारिश के दौरान स्कूल आते-जाते या खेलते समय बच्चों को पानी से भरे छोटे और बड़े गड्ढों का अंदाजा नहीं लग पाता। ऐसे में अनजाने में उनकी जान खतरे में पड़ जाती है। इसलिए इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए राज्य स्तर से निर्देश जारी किए जाएं और जिला स्तर पर इसकी नियमित समीक्षा हो। 7 जुलाई तक मांगी रिपोर्ट आयोग ने नगरीय प्रशासन विभाग, जिला कलेक्टरों और नगरीय निकायों से कहा है कि अनुशंसा पर की गई कार्रवाई की लिखित जानकारी 7 जुलाई 2026 तक आयोग को भेजी जाए।



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