भारतीय मूल के अनिल मेनन ने 6.5 घंटे स्पेसवाक की:जेसिका मीर के साथ स्पेस स्टेशन में सोलर पैनल का फ्रेम लगाया; बिजली सप्लाई 30% बढ़ेगी

भारतीय मूल के अनिल मेनन ने 6.5 घंटे स्पेसवाक की:जेसिका मीर के साथ स्पेस स्टेशन में सोलर पैनल का फ्रेम लगाया; बिजली सप्लाई 30% बढ़ेगी




भारतीय मूल के अनिल मेनन ने नासा एस्ट्रोनॉट जेसिका मीर के साथ 6.5 घंटे स्पेस वॉक की। इस दौरान दोनों वैज्ञानिकों ने नए सोलर पैनल को फिट करने के लिए 7वां सपोर्टिंग फ्रेम लगाया। स्पेस स्टेशन पर कुल 8 नए सोलर पैनल लगाए जाने हैं, जिनमें से 6 लग चुके हैं। बाकी 2 इस साल के अंत तक पहुंचेंगे। इससे स्पेस स्टेशन की बिजली सप्लाई में 30% तक बढ़ेगी। सवाल जवाब में इस पूरे मामले को समझें… सवाल 1. इस काम को करने में कितना समय लगा और यह कौन सा मिशन था? जवाब: यह स्पेसवॉक भारतीय समयानुसार दोपहर बाद शुरू हुई और 6 घंटे 27 मिनट चली। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के मेंटेनेंस और अपग्रेड के लिए की गई यह 281वीं और अमेरिकी एजेंसी नासा की 96वीं स्पेसवॉक थी। स्पेस वॉक भारतीय समय के अनुसार गुरुवार 6 अगस्त को शाम 6:03 बजे शुरू हुई और रात 12:30 बजे खत्म हुई। सवाल 2. नए सोलर पैनल लगाने की जरूरत क्यों पड़ी और इससे क्या फायदा होगा? जवाब: स्पेस स्टेशन के पुराने 8 सोलर पैनल 15 साल पुराने हो चुके हैं, जिससे उनसे बिजली का उत्पादन कम हो गया था। नए सोलर पैनल पुराने पैनलों को हटाने के बजाय उनके आगे लगाए जा रहे हैं ताकि दोनों मिलकर काम करें। इससे बिजली सप्लाई 30% तक बढ़ जाएगी। सवाल 3. भारतीय मूल के अनिल मेनन के लिए यह मिशन कितना खास था? जवाब: यह अनिल मेनन के करियर की पहली स्पेसवॉक थी। काम के दौरान वे एक खास प्रोटेक्टिव स्टैंड पर पैर टिकाकर काम कर रहे थे ताकि संतुलन बना रहे। वहीं, जेसिका मीर की यह छठी स्पेसवॉक थी। उन्होंने अंतरिक्ष में 42 घंटे से ज्यादा का समय पूरा कर लिया है। सवाल 4. काम के दौरान वैज्ञानिकों ने चांद और मंगल ग्रह के बारे में क्या बात की? जवाब: काम करते हुए जेसिका मीर ने अनिल का ध्यान सामने दिख रहे चांद की तरफ खींचा। इस पर अनिल मेनन ने कहा, “मुझे दाईं तरफ चांद दिख रहा है, मैं वहां इंसानों का भविष्य का मून बेस देख सकता हूं।” इसके अलावा, जेसिका ने मंगल ग्रह पर 2012 में उतरे ‘क्युरियोसिटी रोवर’ को याद करते हुए कहा कि एक दिन इंसान मंगल ग्रह पर भी कदम रखेंगे। सवाल 5. इस महीने स्पेस स्टेशन पर और कौन-से काम होने हैं? जवाब: अगस्त में दो और स्पेसवॉक होंगी: नासा में मॉनीटरिंग की 3 तस्वीरें…
नॉलेज पार्ट: जानें क्या है iROSA? यह एक नई तकनीक का सोलर पैनल है, जो कपड़े या कालीन की तरह मुड़कर छोटा हो जाता है और अंतरिक्ष में जाकर आसानी से फैल जाता है।



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