राज्य में पुलिसकर्मियों के लिए पहला अस्पताल:होटवार में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनेगा, आम लोगों का भी यहां होगा इलाज
झारखंड सरकार ने राजधानी के होटवार स्थित जैप-10 परिसर में बने 50 बेड के अस्पताल को पुलिसकर्मियों के लिए अत्याधुनिक अस्पताल के रूप में विकसित करने का फैसला किया है। झारखंड में पुलिसकर्मियों के लिए समर्पित यह पहला अस्पताल होगा। विकसित होने के बाद इस अस्पताल में आम मरीज भी सीजीएचएस (केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना) दर पर इलाज करा सकेंगे। यहां पुलिसकर्मियों और उनके आश्रितों का पूरी तरह कैशलेस इलाज होगा। सरकारी कर्मचारियों को सीजीएचएस दरों पर कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। सामान्य मरीजों का इलाज सीजीएचएस दरों के डेढ़ गुना शुल्क पर होगा। स्वास्थ्य विभाग ने इस अस्पताल को गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग से ‘एज इज व्हेयर इज’ आधार पर अपने अधीन लेने पर मंजूरी प्रदीन कर दी है। अस्पताल का संचालन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर होगा। भविष्य में इसे 100 बेड के मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित करने की योजना बनी है। स्वास्थ्य मंत्री डाँ. इरफान अंसारी ने इस प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी है। इसके बाद विभाग ने इसे राज्य योजना प्राधिकृत समिति की मंजूरी के लिए भेजा है। ऐसे चलेगा अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव के अनुसार अस्पताल का संचालन डिजाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर मॉडल पर होगा। चयनित निजी एजेंसी को आधुनिक चिकित्सा उपकरण, आईटी सिस्टम और डायग्नोस्टिक सुविधाएं स्थापित करनी होंगी। पुलिस परिवार : पुलिसकर्मियों व परिजनों को पूरी तरह निःशुल्क और कैशलेस इलाज मिलेगा।
सरकारी कर्मचारी : राज्य के सरकारी कर्मियों को सीजीएचएस दरों पर कैशलेस इलाज मिलेगा।
सामान्य मरीज : आम लोगों का सीजीएचएस दर के 1.5 गुना मूल्य पर इलाज किया जाएगा। ये होंगी सुविधाएं… अस्पताल में दवा मुफ्त, जांच नि:शुल्क अस्पताल में ओपीडी, आईपीडी, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी और इमरजेंसी जैसी सभी प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। अस्पताल में राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची की दवाएं सभी मरीजों को मुफ्त उपलब्ध कराई जाएंगी। एनएचएम से जुड़ी दवाओं और जांच का खर्च भी सरकार वहन करेगी। निजी एजेंसी को सभी डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल और अन्य कर्मियों की नियुक्ति आईपीएचएस मानकों के अनुरूप होगी। एनएलइएम सूची की दवाएं और एनएचएम योजनाओं के तहत दवा व जांच सभी मरीजों को मुफ्त मिलेगी। जेल परिसर से अलग बनेगा नया रास्ता : स्वास्थ्य विभाग और गृह विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक में तय हुआ है कि अस्पताल को जेल परिसर से अलग कर आम लोगों के लिए स्वतंत्र प्रवेश मार्ग बनाया जाएगा। साथ ही अस्पताल भवन को स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित कर उसके संचालन की जिम्मेदारी तय की जाएगी 18 माह में नया ब्लॉक पहले चरण में निजी एजेंसी को 6 माह में मौजूदा अस्पताल को चालू करना होगा, जबकि 18 महीने के भीतर अतिरिक्त 50 बेड का नया ब्लॉक बनाकर अस्पताल को 100 बेड तक विस्तारित करना होगा। एजेंसी को मशीनें 30 वर्षों के लिए दी जाएंगी। सरकार करेगी निगरानी सरकार अस्पताल की निगरानी अपने स्तर पर करेगी। इसके लिए संयुक्त मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाएगी, जो अस्पताल की कार्यप्रणाली, मरीजों की संतुष्टि, सीजीएचएस बिलिंग, गुणवत्ता मानकों और एनएबीएच अनुपालन की नियमित समीक्षा करेगी। तकनीकी मानदंड तय निजी भागीदार के चयन के लिए कड़े तकनीकी और वित्तीय मानदंड तय किए गए हैं। बोली लगाने वाली संस्था के पास कम से कम 100 बेड का एक अस्पताल या 50-50 बेड के दो अस्पताल सफलतापूर्वक संचालित करने का अनुभव होना जरूरी होगा।
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