AI भारत में नौकरियां छीनने से ज्यादा दे रहा:नोमुरा रिपोर्ट में दावा- सीनियर कर्मचारियों की डिमांड बढ़ी, जूनियर कोडिंग और टेस्टिंग जॉब्स खतरे में




भारत में AI नौकरियां खत्म करने की तुलना में नए रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा कर रहा है। हालांकि, तकनीकी बदलाव की वजह से नौकरी की शुरुआत करने वाले फ्रेशर्स और युवाओं को एंट्री-लेवल पर कड़े मुकाबले और दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह दावा नोमुरा ने हाल ही में पब्लिश एक रिपोर्ट में किया है। एशिया में 1.31 लाख नौकरियां आईं, 61 हजार गईं नोमुरा ने बियॉन्ड द हेडलाइंस: एआई हैज एडेड जॉब्स इन एशिया- सो फार नाम से एक रिपोर्ट पब्लिश की। इस रिपोर्ट के मुताबिक… फ्रेशर्स के लिए संकट: एंट्री-लेवल हायरिंग में 55% की गिरावट AI के कारण सबसे ज्यादा नुकसान फ्रेशर्स को हो रहा है, क्योंकि एंट्री-लेवल की नौकरियां तेजी से कम हो रही हैं। भारत की 651 आईटी कंपनियों के सर्वे में सामने आया है कि 55% कंपनियों ने फ्रेशर्स की भर्तियां घटा दी हैं। इसके मुकाबले सीनियर पदों पर सिर्फ 14% कंपनियों ने ही हायरिंग कम की है। सीनियर एम्प्लॉइज की डिमांड बढ़ी नोमुरा ने बाजार में आ रहे बदलाव को K-शेप्ड स्प्लिट का नाम दिया है। यानी रोजगार के लिए बाजार दो हिस्सों में बंट गया है। एक तरफ फ्रेशर्स की मांग लगातार गिर रही है, तो दूसरी तरफ अनुभवी सीनियर लोगों की पूछ बढ़ गई है। कंपनियों को अब मैनेजमेंट और बिजनेस की गहरी समझ रखने वाले लोग चाहिए। दक्षिण कोरिया में जिन सेक्टर में सबसे ज्यादा AI का इस्तेमाल हुआ वहां ऐसा ही ट्रेंड दिखने को मिला है। ‘साइलेंट फायरिंग’: मास लेऑफ की जगह नई भर्तियां कम हुईं कंपनियां अब पुराने कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के बजाय नए लोगों को नौकरी पर रखना ही बंद कर रही हैं। इसे साइलेंट फायरिंग कहा जा रहा है, जो चुपचाप युवाओं का मौका छीन रही है। इसके अलावा, कंपनियों ने कॉलेज कैंपस में जाकर होने वाले प्लेसमेंट को लगभग थाम दिया है।



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