Neem Karoli Baba Story; Hanuman Ansh Box Office Collection Record Reason
नीम करोली बाबा पर बनी ‘हनुमान अंश’ ने 24वें दिन 12.75 करोड़ रुपए कमाए हैं। 7 अगस्त को रिलीज के दिन फिल्म 10 लाख रुपए ही जुटा सकी थी। यानी प्रति दिन की कमाई में 12,600% का उछाल आया। पिछले कुछ घंटों की टिकट बुकिंग में ‘हनुमान अंश’ ने सुपरस्टार यश की ‘ट
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दो हफ्ते तक खाली पड़ी कुर्सियां, ज्यादातर स्क्रीन्स से उतर चुकी ‘हनुमान अंश’ अचानक कमाई के रिकॉर्ड कैसे बनाने लगी, कौन हैं बाबा नीम करोली; आज के एक्सप्लेनर में पूरी कहानी…
एक संपन्न घर का 11 साल का लड़का। बचपन में मां का निधन हो गया। किसी ने बता दिया कि वो राम के पास चली गईं। अब उस लड़के को राम के पास जाने की धुन सवार हो गई। उसने घर छोड़ दिया। पूरा भारत घूमा, तपस्या की। आखिरकार ज्ञान मिला। उन्होंने कई लीलाएं-चमत्कार किए और नीम करोली बाबा के नाम से जाने गए।
‘हनुमान अंश’ फिल्म की स्टोरी लाइन पढ़कर आपको कुछ अनोखा नहीं लगा होगा। फिल्म में न कोई बड़ा स्टार है और न ही बड़ा बजट। फिल्म कब रिलीज हुई और दो हफ्ते गुजर गए, शायद ही आपको पता चला हो। लेकिन तीसरे हफ्ते से रफ्तार पकड़ने और कमाई के रिकॉर्ड बनाने के पीछे एक्सपर्ट्स 3 बड़ी वजहें मानते हैं…
1. ‘वर्ड ऑफ माउथ’ से दर्शक बढ़े, स्क्रीन्स भी 20 गुना बढ़ा दी गईं
- फिल्म का कुल बजट 2 करोड़ से कम है। डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने एक इंटरव्यू में बताया कि फिल्म पूरी होने के बाद प्रमोशन के लिए पैसा ही नहीं बचा था। बिना किसी Buzz के फिल्म रिलीज कर दी गई।
- फिल्म क्रिटिक और ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक, ‘शुरुआत में फिल्म ज्यादा लोगों तक नहीं पहुंची। लेकिन जो लोग फिल्म देखने गए, उन्होंने दूसरों से तारीफ की। सोशल मीडिया पर लोग सीधे अपने रिव्यू, फिल्म का अनुभव और मूवी क्लिप्स शेयर करने लगे। इससे Buzz बना और धीरे-धीरे फिल्म के दर्शन बढ़ने लगे।’
- जैसे-जैसे दर्शक बढ़े, स्क्रीन्स की संख्या बढ़ती गई और कमाई भी। तरण आदर्श बताते हैं रिलीज के पहले हफ्ते में फिल्म के सिर्फ 355 शोज दिखाए गए थे। दूसरे हफ्ते की शुरुआत में तो सिर्फ 29 शो दिखाए। तीसरे हफ्ते में शो बढ़ने लगे और अब फिल्म देशभर के 5363 स्क्रीन्स पर है। 5 दिन पहले आई टॉक्सिक के शो 24 हजार से घटकर 16 हजार रह गए हैं।
सोशल मीडिया पर लोग हनुमान अंश फिल्म के ये सीन शेयर कर रहे हैं।
2. ‘टॉक्सिक’ की वजह से ‘हनुमान अंश’ का इनडायरेक्ट प्रमोशन हुआ
- 28 से 30 अगस्त के बीच रक्षाबंधन का त्योहार और आगे लॉन्ग वीकेंड आ गया। लोगों के सामने दो प्रमुख फिल्मों के विकल्प थे- टॉक्सिक और हनुमान अंश।
- हनुमान अंश ‘U’ रेटेड फिल्म है, यानी इसे हर उम्र के लोग परिवार के साथ देख सकते हैं। दूसरी तरफ टॉक्सिक ‘A’ रेटेड है, यानी सिर्फ 18 साल से ज्यादा उम्र के लोग इसे देख सकते हैं। इसमें हद से ज्यादा हिंसा और सेक्शुअलिटी के दृश्य हैं।
- फेस्टिव सीजन में परिवार के साथ फिल्म देखने गए लोगों के लिए हनुमान अंश स्वाभाविक विकल्प बन गई। टॉक्सिक को मिले नेगेटिव रिव्यू के चलते हनुमान अंश को ज्यादा स्क्रीन्स दी जाने लगीं।
बुक माय शो पर लोग टॉक्सिक से ज्यादा हनुमान अंश की टिकट बुक कर रहे हैं। डेटा 31 अगस्त सुबह 11 बजे का है।
3. धार्मिक फिल्मों का दौर लौट रहा, समाज में ऐसा माहौल बना
- फिल्म क्रिटिक दीपक दुआ कहते हैं, ‘कुछ सालों पहले ऐसा लगने लगा था कि भारत में धार्मिक फिल्में नहीं चलती। लेकिन अब फिर से धर्म और राष्ट्र से जुड़ी फिल्मों का कंजप्शन बढ़ रहा है।’
- राष्ट्रवाद से ओत-प्रोत धुरंधर फिल्म ने रिकॉर्ड कमाई की। करीब 4 हजार करोड़ रुपए के बजट वाली रणबीर कपूर स्टारर रामायण फिल्म बन रही है। समाज में भजन क्लबिंग जैसी चीजें सामने आ रही हैं।
- दीपक दुआ के मुताबिक, ‘सिनेमा की नजर से ‘हनुमान अंश’ फिल्म बहुत बढ़िया नहीं बनी, लेकिन दर्शकों के लिए ये जड़ों से जोड़ने वाली फिल्म है। फिल्म की कमाई सिर्फ क्राफ्ट पर नहीं, बल्कि दर्शकों की भावनात्मक जुड़ाव पर टिकी है।’
- फिल्म देखने जा रहे लोगों की भक्ति ऐसी है कि कई लोग फिल्म देखते हुए चप्पल-जूते उतार दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक लड़की का वीडियो वारयर है, जो हनुमान अंश की टिकट न मिलने पर रोने लगी।
मुंबई के फन रिपब्लिक मॉल में जब फिल्म नीम करोली बाबा के आश्रम के असली वीडियो चलाए गए, तो दर्शक हाथ जोड़कर खड़े हो गए। कई दर्शक फिल्म देखते हुए रोने भी लगे।
इसके अलावा ‘हनुमान अंश’ के दो गाने रील्स में वायरल हो गए। गाने के जरिए लोगों ने फिल्म को डिस्कवर किया। ‘मैने तेरे ही भरोसे हनुमान सागर में नैया डार दई’ एक लोक भजन है। इसे बुंदेलखंड के गायक सुनील लोधी ने गाया है। साधु तिवारी के गाए पार्वती गाने को भी खूब पसंद किया गया।
हालांकि सारे लॉजिक लगाने के बाद भी, हनुमान अंश की सक्सेस नीम करोली बाबा का चमत्कार जैसा लगती है।
नीम करोली बाबा 20वीं सदी के एक हिंदू संत थे। उत्तराखंड के नैनीताल में उनका प्रसिद्ध आश्रम- कैंची धाम है। उनकी कहानी शुरू होती है उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से…
- साल 1900, अकबरपुर (अब फिरोजाबाद) में दुर्गाप्रसाद शर्मा और कौशल्या देवी के घर एक बेटे का जन्म हुआ। नाम- लक्ष्मण नारायण शर्मा।
- 8-9 साल की उम्र में ही लक्ष्मण की की मां का निधन हो गया। 11 साल की उम्र में घरवालों ने शादी करवा दी। 12 साल की उम्र में घर छोड़ दिया और हनुमान जी की भक्ति में लग गए।
- 10-12 साल संन्यासियों का जीवन बिताने के बाद, पिता के कहने पर लक्ष्मण नारायण घर आए। पत्नी के साथ गृहस्थ जीवन बिताया। तीन बच्चे हुए, लेकिन मन भक्ति में लगा रहा। आखिरकार दोबारा घर छोड़ दिया।
- सबसे पहले राजस्थान गए, फिर गुजरात। राजकोट के एक मंदिर के प्रमुख ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी बना दिया, लेकिन बाकी भक्त इससे नाराज हो गए। विवाद न बढ़े इसलिए राजकोट छोड़ मोरबी चले गए।
नीम करोली बाबा की युवावस्था की तस्वीर। जब वे मोरबी आए, तो तालाब के पास रोज ध्यान लगाते। लोग उन्हें तलैया बाबा कहने लगे।
- कुछ सालों बाद बाबा उत्तर प्रदेश में फर्रुखाबाद के नीम करोली गांव पहुंचे। वे गांव वालों से जो भी कहते, सच हो जाता। जब बाबा यहां से जाने लगे, तो गांव वालों ने रोक लिया। उनके लिए एक गुफा बनाई, जहां बाबा ध्यान करते। गुफा की छत पर हनुमान जी का एक मंदिर भी बनवाया।
- लोग कई दिनों तक बाबा को गुफा से आते नहीं देखते। एक बार उनका भक्त गोपाल बिना इजाजत दूध लेकर गुफा में चला गया। बाबा गहरे ध्यान में थे। उनके शरीर पर कई सांप लिपटे थे। दृश्य देख गोपाल बेहोश हो गया।
- गुलामी का दौर था। एक दिन बाबा नीम करोली से ट्रेन में सवार हुए। साधू का भेष देखकर एंग्लो-इंडियन टीटीई को लगा कि उनके पास टिकट नहीं है। उन्हें ट्रेन से उतार दिया। बाबा वहीं जमीन पर बैठकर भजन करने लगे।
- तमाम कोशिशों के बाद भी ट्रेन आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद रेलवे स्टाफ ने उनसे निवेदन करके वापस ट्रेन में बिठाया, तब ट्रेन डोली। इस चमत्कार के बाद लक्ष्मण शर्मा और तलैबा बाबा कहलाने लगे बाबा नीम करोली।
- करीब 18 साल नीम करोली में रहे। फिर नैनीताल की तरफ चल दिए। 1950 के दशक में हनुमानगढ़ी में मंदिर बनवाया। इसके बाद भूमियाधार, कैंची, काकड़ीघाट, वृंदावन, कानपुर, लखनऊ, शिमला, दिल्ली में कई मंदिर बनवाए।
- 11 सितंबर, 1973 को वृंदावन में उनका निधन हो गया।
ये किस्से नीम करोली बाबा की समाधि स्थल की आधिकारिक वेबसाइट से लिए गए हैं।
स्टीव जॉब्स से विराट कोहली तक बाबा नीम करोली के भक्त
स्टीव जॉब्स: 1974 में बाबा से मिलने की चाह लेकर एप्पल कंपनी के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स भारत आए। तब तक बाबा के निधन को एक साल हो चुका था। जॉब्स कुछ दिन कैंची धाम में रहे। फिर वापस लौटकर 1976 में एप्पल की शुरुआत की।
मार्क जकरबर्ग: 2015 में फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग ने भारत यात्रा के दौरान बताया था कि स्टीव जॉब्स ने फेसबुक के शुरुआती दिनों में उन्हें भारत के एक मंदिर जाने की सलाह दी थी। यह नीम करौली बाबा का कैंची धाम ही था।
जूलिया रॉबर्ट्स: हॉलीवुड एक्ट्रेस जूलिया रॉबर्ट्स हिंदू धर्म मानती हैं। उन्होंने 2010 में एक इंटरव्यू में बताया था कि नीम करौली बाबा की एक तस्वीर देखकर उनकी हिंदू धर्म में रुचि जागी थी।
अनुष्का शर्मा और विराट कोहली: एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा नीम करौली बाबा को अपना गुरु बता चुकी हैं। 2022 में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा बेटी के साथ कैंची धाम गए थे।
कैंची धाम के बाहर विराट कोहली और अनुष्का शर्मा।
मनोज बाजपाई: एक्टर मनोज बाजपाई ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वेब सीरीज ‘द फैमिली मैन’ से पहले करीब एक साल तक उनके पास कोई काम नहीं था। इसी समय वे फिल्म डायरेक्टर राम रेड्डी के साथ जुगनुमा फिल्म की रिसर्च के लिए कैंची धाम गए थे। यहां ध्यान करके उन्हें शांति और नई राह मिली।
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