बेल्जियम PM बोले- भारत ने हमें पहले ही चेताया था:यूरोप बूढ़ा हो चुका है, अमेरिका और चीन के भरोसे रहने से नुकसान पहुंचा
बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने कहा है कि यूरोप को दूसरे देशों पर जरूरत से ज्यादा व्यापारिक निर्भरता की कीमत अब समझ आ रही है। उन्होंने माना कि भारत ने यूरोपीय देशों को इस खतरे के बारे में काफी पहले चेताया था, लेकिन तब उसकी बात नहीं सुनी गई। CII के एक कार्यक्रम में डी वेवर ने कहा कि दुनिया में आर्थिक ताकत अब सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं है। बड़े देश और ब्लॉक अपनी आर्थिक पकड़ का इस्तेमाल दूसरे देशों पर दबाव बनाने के लिए भी कर सकते हैं। ऐसे में यूरोप को अपनी सप्लाई चेन और व्यापारिक रिश्तों में ज्यादा विकल्प रखने होंगे। ‘भारत ने कहा था, हमने ध्यान नहीं दिया’ डी वेवर ने कहा कि भारत और यूरोप आज एक जैसी चुनौती का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री ने यूरोप को पहले ही बता दिया था कि किसी एक देश या क्षेत्र पर ज्यादा निर्भरता आगे चलकर परेशानी पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा, “आप इस दौर से गुजर चुके हैं। आपके प्रधानमंत्री ने यूरोप को बहुत पहले चेताया था, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। अब हम सुन रहे हैं। यूरोप को यह समझ थोड़ी देर से आई है, लेकिन अब यह बदलाव हो रहा है।” चीन का नाम नहीं लिया, लेकिन इशारा साफ था बेल्जियम PM ने यूरोप की मौजूदा स्थिति को ‘रूड अवेकनिंग’ यानी देर से हुई कड़वी समझ बताया। उन्होंने कहा कि यूरोप ने लंबे समय तक ऐसे विदेशी सामान को अपने बाजार में जगह दी, जिनकी कीमत स्थानीय उत्पादन की लागत से भी कम थी। इससे यूरोप की अपनी इंडस्ट्री कमजोर हुई। डी वेवर ने कहा कि इस व्यवस्था से सबसे ज्यादा फायदा जिस देश को हुआ, वह यूरोप के काफी करीब है और उसे सभी जानते हैं। उनका इशारा चीन की तरफ था। भारत को बताया नंबर-1 रणनीतिक पार्टनर भारत और यूरोप के रिश्तों पर बात करते हुए डी वेवर ने भारत को यूरोप का सबसे अहम रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि यूरोप को ऐसे देशों के साथ मिलकर काम करना चाहिए, जो नियमों, सहयोग और बहुपक्षीय व्यवस्था में भरोसा रखते हैं। उन्होंने कहा, “अगर भारत उस सूची में नहीं है तो आपने कुछ बहुत बुनियादी बात मिस कर दी है। भारत उस सूची में है। नंबर-1।” डी वेवर ने भारत की बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, बड़ी टैलेंट पूल और टेक्नोलॉजी क्षमता का जिक्र किया। उनके मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। अब भारत-यूरोप को व्यापार के नए रास्ते तलाशने होंगे डी वेवर ने कहा कि भारत और यूरोप को अपने व्यापारिक रिश्ते कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें ज्यादा विविध बनाना चाहिए। इससे किसी एक देश पर निर्भरता घटेगी और सप्लाई में रुकावट आने का जोखिम भी कम होगा। उन्होंने साथ ही कहा कि ग्लोबल मार्केट के लिए दरवाजे खुले रखने जरूरी हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि देश अपने रणनीतिक हितों को नजरअंदाज कर दें। ‘भारत की आवाज के बिना दुनिया नहीं बन सकती’ भारत और यूरोप की सोच और इतिहास में अंतर के बावजूद डी वेवर ने दोनों के बीच कई समानताएं गिनाईं। उन्होंने भारत को बड़ी लोकतांत्रिक ताकत और इनोवेशन का लीडर बताया। उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र और समृद्ध दुनिया बनाने की कोशिश में भारत की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। डी वेवर का बयान ऐसे वक्त आया है, जब यूरोप अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने और चीन समेत कुछ बड़े व्यापारिक साझेदारों पर निर्भरता घटाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में भारत के साथ व्यापार और रणनीतिक सहयोग यूरोप के लिए और अहम होता जा रहा है।
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