Anushka Bhagat Wins 4 Silver; Nikhil Trains in Karnataka at KITG

Anushka Bhagat Wins 4 Silver; Nikhil Trains in Karnataka at KITG


मेजबान छत्तीसगढ़ अब तक ट्राइबल इंडिया खेलो गेम्स में एक गोल्ड समेत 10 मेडल जीत चुका है। इनमें से सबसे ज्यादा 7 मेडल (चार सिल्वर, तीन ब्रॉन्ज) स्विमिंग के इवेंट में जीते हैं। वहीं तीन मेडल (1 गोल्ड, 1 सिल्वर, 1 ब्रॉन्ज) वेट लिफ्टिंग में आए हैं।

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इस तरह छत्तीसगढ़ का सबसे बढ़िया प्रदर्शन तैराकी के इवेंट में रहा है। इसमें भी खास बात यह है कि तैराकी में मिले चारों सिल्वर मेडल अनुष्का भगत ने छत्तीसगढ़ को दिलाए हैं। वहीं दो ब्रॉन्ज निखिल और एक ब्रॉन्ज मेडल न्यासा पैकारा ने दिलाया है।

छत्तीसगढ़ को 10 में 6 मेडल दिलाने वाले दोनों एथलीट्स अनुष्का और निखिल से दैनिक भास्कर ने खास बातचीत की। अनुष्का पिछले तीन साल से स्विमिंग छोड़ चुकी थीं। लेकिन ट्राइबल गेम्स के चलते तैराकी में उनकी वापसी हुई।

पिछले साल दिसंबर से अभ्यास शुरू किया और अब तक सबसे ज्यादा मेडल अपने नाम किए। वहीं निखिल कहते हैं कि खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से छत्तीसगढ़ 10 साल पीछे चल रहा है। दूसरे राज्य में जाकर ट्रेनिंग नहीं करते तो शायद ही मेडल जीत पाते।

निखिल ने साउथ के खिलाड़ियों का बेहतर खेल देख कर्नाटक जाकर ट्रेनिंग ली। अपने खेल को बेहतर किया, फिर मेडल अपने नाम किए। रिपोर्ट में पढ़िए अनुष्का और निखिल से खास बातचीत…

पहले देखिए ये तस्वीरें…

अनुष्का भगत पिछले तीन साल से स्विमिंग छोड़ चुकी थीं। लेकिन ट्राइबल गेम्स के चलते तैराकी में उनकी वापसी हुई।

कोच राजेश साहू और पिता बसंत राम के साथ अनुष्का भगत।

निखिल कहते हैं कि खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से छत्तीसगढ़ 10 साल पीछे चल रहा है।

सर्वाइवल के लिए सीखी स्विमिंग, फिर इसे ही करियर बनाया

अनुष्का बताती हैं कि, उनकी स्विमिंग यात्रा किसी बड़े लक्ष्य से नहीं, बल्कि एक सामान्य शुरुआत से हुई थी। मेरी बहन पहले स्विमिंग करती थी। पापा ने उन्हें सिर्फ इस सोच के साथ डाला था कि लाइफ में कभी जरूरत पड़े तो काम आए। उन्हें देखकर मैंने भी शुरुआत की और धीरे-धीरे यह मेरी लाइफ बन गई।

उन्होंने बहुत छोटी उम्र, KG-1 से ही पानी में उतरना शुरू किया और अंडर-10 से प्रतियोगिताएं खेलनी शुरू कर दीं।

आधी नींद उठाकर बच्चों को ट्रेनिंग के लिए ले जाते थे पिता

अनुष्का के पिता बसंत राम छत्तीसगढ़ पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल हैं। वो बताते हैं कि प्रैक्टिस के बाद दोनों बच्चों को घर लेकर आते। कुछ देर आराम करते और सुबह 10 बजे फिर ड्यूटी पर पहुंच जाते। चार-पांच घंटे तक ड्यूटी करते। वापस घर जाते और बच्चों को शाम की प्रैक्टिस के लिए तैयार करते।

करीब 10 साल तक यही रूटीन चला। वे बताते हैं कि 2018-19 में अनुष्का ने स्कूल नेशनल में मेडल जीता था, लेकिन इसके बाद कोरोना के कारण सब रुक गया।

100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में अनुष्का भगत ने सिल्वर मेडल जीता।

दो साल ग्राउंड ट्रेनिंग, इवेंट नहीं मिले तो स्विमिंग छोड़ा

कोविड के दौरान पुल बंद हो गए। लेकिन अनुष्का ने ग्राउंड ट्रेनिंग जारी रखी, दो साल लगातार स्विमिंग पुल से दूर मैदान में पसीना बहाया। लेकिन दो साल बाद भी जब कोई इवेंट नहीं आया तो उन्होंने निराश होकर स्विमिंग छोड़ दी।

पिछले तीन साल तक स्विमिंग से अनुष्का दूर रहीं। इसके बाद ट्राइबल गेम्स एनाउंस हुए, पिता ने हौसला अफजाई करते हुए गेम्स में पार्टिशिपेट करने को कहा। ट्राइबल गेम्स अनुष्का के लिए नई उम्मीद का माध्यम बनी। उन्होंने पिछले साल दिसंबर से तैयारी शुरू की।

तीन महीने तक ताबड़तोड़ प्रैक्टिस की और फाइनली अपने राज्य छत्तीसगढ़ के लिए चार सिल्वर मेडल लेकर आईं।

कर्नाटक में जाकर ट्रेनिंग ली, तब अंतर समझ आया

छत्तीसगढ़ को स्वीमिंग में दो ब्राॅन्ज दिलाने वाले निखिल कहते हैं कि कर्नाटक जाकर ट्रेनिंग लेने के बाद उन्हें असली अंतर समझ आया। वहां मुझे एडवांस टेक्नीक की जानकारी हुई। खेल बहुत ज्यादा सुधरा, तभी मेडल ला पाए। उन्होंने कहा कि हमारे यहां सरकारी-इंटरनेशनल पूल ज्यादातर पब्लिक के लिए खुले रहते हैं।

खिलाड़ियों को सीमित समय मिलता है। अगर रोज 2-3 घंटे सिर्फ एथलीट्स के लिए तय हो जाएं, तो बेस मजबूत हो सकता है। हम भी बेहतर कर पाएंगे।

कोच बोले- डाइट, ट्रेनिंग और किट पर काफी खर्च

अनुष्का को गाइड करने वाले कोच राजेश साहू कहते हैं कि, छत्तीसगढ़ में अब तक कोई समर्पित स्विमिंग एकेडमी नहीं है, जिससे खिलाड़ियों को दिक्कत होती है। कोच के अनुसार स्विमिंग महंगा खेल है। डाइट, ट्रेनिंग और किट पर काफी खर्च आता है। एक कॉस्ट्यूम ही 25-26 हजार रुपए का होता है, ऐसे में गरीब परिवार के बच्चे पीछे रह जाते हैं।

ट्राइबल गेम्स अच्छा मंच है, लेकिन इसके साथ एक नेशनल लेवल स्विमिंग एकेडमी होनी चाहिए, जहां बच्चों को ट्रेनिंग, रहने और खाने की सुविधा मिले।

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खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के पहले दिन छत्तीसगढ़ ने 2 मेडल अपने नाम किए थे। इनमें से एक सिल्वर और दूसरा ब्रॉन्ज था। सिल्वर 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में अनुष्का भगत ने जीता। वहीं ब्रॉन्ज सेम इवेंट, मेल कैटेगरी में निखिल ने दिलाया। पढ़ें पूरी खबर…



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