ASI’s Son Manjeet & Martyr’s Son Rohit Clear UPSC Exam

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मंजीत सिंह UPSC में 490वीं रैंक प्राप्त की।

रेवाड़ी के दो बेटों ने यूपीएसपी क्वालीफाई किया है। गांव कंवाली निवासी दिल्ली पुलिस के एएसआई के बेटे मंजीत सिंह ने AIR 490 और काकोड़िया निवासी शहीद के बेटे रोहित यादव ने 506वां रैक प्राप्त किया है। मंजीत के दादा स्व. रामोतार भी दिल्ली पुलिस में एसआई थे।

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दिल्ली में रहता है परिवार

मंजीत सिंह का परिवार मूल रूप से रेवाड़ी के गांव कवाली का रहने वाला है और फिलहाल पी-ब्लॉक 3-4, मोहन गार्डन, उत्तम नगर नई दिल्ली में रहता है। चेयरमैन करणपाल खोला ने इस उपलब्धि पर मंजीत सिंह और उसके परिवार को बधाई दी।

पिता एएसआई रत्न सिंह के साथ मंजीत सिंह।

सफलता का कोई शार्टकट नहीं

मंजीत ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार और शिक्षकों को दिया। उन्होंने कहा कि सफलता केवल मेहनत, लग्न और दृढ़ इच्छा शक्ति से हासिल की जा सकती है। सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है। जीवन में सफलता हासिल करने के लिए युवाओं को अपना लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ना चाहिए।

पहले प्रयास में पाई सफलता

पुलिस बैकग्राउंड वाले परिवार में जन्में मंजीत सिंह ने अपने पहले प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा क्वालीफाई की है। मंजीत का परिवार मूल रूप से रेवाड़ी के गांव कवाली का रहने वाला है और फिलहाल पी-ब्लॉक 3 व 4, मोहन गार्डन, उत्तम नगर नई दिल्ली में रहता है। चेयरमैन करणपाल खोला ने इस उपलब्धि पर मंजीत सिंह और उसके परिवार को बधाई दी।

यूपीएसी करने वाले रोहित यादव का स्वागत करते ग्रामीण।

बीटैक के बाद मिला था ऑफर

गांव काकोड़िया निवासी शहीद मनोज यादव के बेटे रोहित यादव ने 509वां रैक प्राप्त किया। रोहित की उपलब्धि पर ग्रामीणों ने ढोल नगाड़ों के साथ स्वागत किया। रोहित की प्रारंभिक शिक्षा गांव व आसपास की है। 12वीं पास करने के बाद रोहित ने दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की पढ़ाई की। बीटैक करने के बाद रोहित को बड़ी कंपनी में नौकरी का ऑफर मिला। जिसकी बजाय रोहित ने यूपीएससी की तैयारी करने का फैसला लिया।

मां-दादी और शिक्षकों को दिया श्रेय

रोहित यादव ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी दादी कमला देवी, माता संतोष देवी, परिवार और शिक्षकों को दिया। रोहित की छोटी बहन एकता दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रही है। रोहित ने कहा कि यह मेरे पिता और दादा का सपना था की मै देश सेवा करूं। इसके लिए मैने प्राइवेट नौकरी की बजाय यूपीएससी की तैयारी करने का निर्णय लिया और आज मेरे पिता और दादा का सपना पूरा हो गया।



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