Bangladesh Election 2026 Vs Hindu Candidate; Gobinda Chandra Pramanik | BNP | बांग्लादेश में हिंदू नेता के चुनाव लड़ने पर रोक: शेख हसीना की सीट से गोविंद का नामांकन खारिज, RSS से जुड़े; बोले- BNP की साजिश

Bangladesh Election 2026 Vs Hindu Candidate; Gobinda Chandra Pramanik | BNP | बांग्लादेश में हिंदू नेता के चुनाव लड़ने पर रोक: शेख हसीना की सीट से गोविंद का नामांकन खारिज, RSS से जुड़े; बोले- BNP की साजिश


ढाका57 मिनट पहले

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गोबिंद चंद्र प्रामाणिक ने खालिदा जिया की पार्टी BNP पर उनके खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया है।

बांग्लादेश में एक हिंदू नेता को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है। बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होने वाले हैं। गोबिंद चंद्र प्रमाणिक ने संसदीय चुनावों के लिए गोपालगंज-3 सीट से पर्चा दाखिल किया था, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने शनिवार को उनका नामांकन वापस कर दिया।

पूर्व PM शेख हसीना गोपालगंज-3 से सांसद थीं। यहां 50% से ज्यादा हिंदू वोटर्स हैं। गोबिंद निर्दलीय चुनाव लड़ना चाहते थे। वह पेशे से वकील हैं और बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत (BJHM) नामक संगठन के महासचिव भी हैं। BJHM कुल 23 संगठनों का हिंदुत्ववादी गठबंधन है। BJHM के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा है।

पेशे से वकील गोबिंद चंद्र प्रमाणिक बांग्लादेश के प्रमुख हिंदुवादी नेताओं में से एक माने जाते हैं। फोटो- फाइल

खालिदा जिया की पार्टी पर लगाए गंभीर आरोप

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोबिंद ने कहा कि बांग्लादेश में एक प्रावधान है जिसके हिसाब से एक निर्दलीय उम्मीदवार को अपने इलाके के 1% वोटरों के साइन लाने होते हैं।

वह नियम का पालन करते हुए 1% वोटरों के हस्ताक्षर लेकर आए थे, लेकिन बाद में उन वोटरों ने रिटर्निंग ऑफिसर से आकर कहा कि उनके साइन लिए ही नहीं गए थे।

गोबिंद का आरोप है कि खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकर्ताओं ने वोटरों पर ऐसा करने का दबाव बनाया। इसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने सभी हस्ताक्षरों को अमान्य घोषित करते हुए नामांकन रद्द कर दिया।

प्रमाणिक की सीट पर 51% वोटर हिंदू

गोबिंद ने दावा किया है कि वो निर्दलीय चुनाव इसलिए लड़ना चाहते थे, क्योंकि उन्हें अपनी जीत पर भरोसा था। उनका कहना है कि गोपालगंज के 3 लाख मतदाताओं में से 51% हिंदू हैं।

BNP ने उन्हें रास्ते से हटाया क्योंकि यहां उसके जीतने की संभावना बिल्कुल भी नहीं थी। उन्होंने कहा, मैं चुनाव आयोग से इसकी शिकायत करूंगा। अगर मुझे न्याय नहीं मिला तो मैं कोर्ट भी जाउंगा।

बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, गोबिंद ने 28 दिसंबर को अपना चुनावी नामांकन दाखिल किया था। तब गोबिंद ने कहा था कि न तो उनका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध है और न ही वे कभी राजनीति में सक्रिय रहे हैं।

बांग्लादेश में 24 नवंबर को हुए सिख समाज के एक कार्यक्रम में गोबिंद चंद्र प्रमाणिक।

बांग्लादेश में 350+ वेदिक स्कूल चलाता है BJHM

बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत (BJHM) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन से जुड़ा है और बांग्लादेश में हिंदुत्व की विचारधारा के प्रचार करता है। यह संगठन बांग्लादेश के अलग-अलग इलाकों में 350 से ज्यादा वैदिक स्कूल चलाता है, जहां बच्चों को भगवद गीता समेत कई हिंदू ग्रंथों की शिक्षा दी जाती है।

गोबिंद चंद्र प्रमाणिक BJHM के महासचिव हैं। गोबिंद ने वैदिक विद्यालयों के बारे में 2023 में कहा था कि ‘हमारा लक्ष्य बचपन से ही बच्चों में हिंदू गौरव की भावना पैदा करना है ताकि हमारे धर्म को बढ़ावा मिल सके और उसकी रक्षा की जा सके। हिंदू धर्म बांग्लादेश में इस समय अस्तित्व के संकट का सामना कर रहा है।’

बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले में वैदिक स्कूल। BJHM देशभर में ऐसे 350 से ज्यादा स्कूल चलाता है।

एक और हिंदू प्रत्याशी का चुनावी नामांकन वापस

गोबिंद चंद्र प्रामाणिक की तरह एक और हिंदू उम्मीदवार, दुलाल बिसवास का भी नामांकन वापस कर दिया गया है। दुलाल को एक रजिस्टर्ड पॉलिटिकल पार्टी गोनो फोरम ने टिकट दिया था। इसलिए उन पर 1% मतदाताओं के हस्ताक्षर का नियम लागू नहीं हुआ, लेकिन दस्तावेजों की कमी का हवाला देकर उनका नामांकन वापस कर दिया गया। अब वे नए सिरे से दस्तावेज जमा करने वाले हैं।

गोपालगंज 2 सीट से एक और निर्दलीय हिंदू उम्मीदवार उत्पल बिस्वास चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट से कभी हसीना के चचेरे भाई शेख सलीम चुनाव लड़ते थे। बिस्वास का कहना है कि ‘मैं किसानों और वंचितों के बीच काम करता हूं। मुझे उम्मीद है कि वे मुझे वोट देंगे।’

हसीना की सरकार गिरने के 18 महीने बाद चुनाव

बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार 5 अगस्त 2024 को छात्रों के आंदोलन के बाद गिर गई, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया और भारत भाग आईं। 8 अगस्त को नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार का गठन हुआ।

अंतरिम सरकार ने बांग्लादेश में 6 महीने के भीतर चुनाव कराने का वादा किया। हालांकि, बाद में समय सीमा बढ़ा दी गई और अब आम चुनाव 12 फरवरी 2026 को होने वाले हैं।

खालिदा जिया की पार्टी सबसे ताकतवर

शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी BNP को बांग्लादेश की सबसे बड़ी पार्टी कहा रहा है। 30 दिसंबर को खालिदा जिया की लंबी बीमारी के चलते मृत्यु हो गई।

अब BNP की कमान खालिदा के बेटे तारिक रहमान के हाथ में है। तारिक 17 साल के निर्वासन के बाद 25 दिसंबर को बांग्लादेश लौटे हैं। ढाका एयरपोर्ट पर उनका स्वागत BNP के करीब 1 लाख कार्यकर्ताओं ने किया।

रहमान ने 29 दिसंबर को ढाका-17 और बोगुरा-6 सीट से नामांकन दाखिल किया। बोगुरा-6 रहमान की मां खालिदा जिया की पारंपरिक सीट रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तारिक रहमान BNP के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं।

बांग्लादेश में 15 दिन के भीतर 4 हिंदुओं की हत्या

भारत विरोधी नेता उस्मान हादी की 18 दिसंबर को हुई मौत के बाद बांग्लादेश में इस्लामिक संगठनों ने हिंदू अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना शुरू किया। बांग्लादेश में 15 दिन के भीतर 4 हिंदुओं की हत्या की जा चुकी है। 18 दिसंबर को ईशनिंदा के झूठे आरोप में हुई दीपू चंद्र की हत्या के बाद 24 दिसंबर को भीड़ ने 29 साल अमृत मंडल उर्फ सम्राट की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी।

इसके बाद 29 दिसंबर को मैमनसिंह जिले में 42 साल के कपड़ा फैक्ट्री कर्मचारी बजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। भीड़ ने इस दौरान कई हिंदूओं के घरों में आगजनी भी की गई।

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