Chhattisgarh Raigarh Female constable’s uniform torn case | महिला आरक्षक की वर्दी फाड़ी…अर्धनग्न कर बनाया VIDEO: रायगढ़ में 5 आरोपी अरेस्ट, कांग्रेस बोली-मानवता शर्मसार हुई, सरकार आत्ममंथन करे, BJP बोली- कड़ी सजा मिलेगी – Chhattisgarh News
तमनार ब्लॉक में JPL कोयला खदान के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान महिला आरक्षक के कपड़े फाड़ दिए गए थे।
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में JPL कोयला खदान के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान महिला आरक्षक के कपड़े फाड़ दिए गए। प्रदर्शनकारियों ने महिला आरक्षक को आधा किलोमीटर तक दौड़ाया। महिला आरक्षक जब वह खेत में गिर गई, तो वर्दी फाड़कर उसे अर्धनग्न कर दि
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महिला पुलिसकर्मी से मारपीट, बदसलूकी और अमानवीय व्यवहार के मामले में पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें मंगल राठिया, चिनेश खमारी, प्रेमसिंह राठिया, कीर्ति श्रीवास (सभी निवासी ग्राम आमगांव) और वनमाली राठिया निवासी ग्राम झरना शामिल हैं। वहीं 2 फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस घटना की निंदा की है। उन्होंने कहा कि, पिछले पौने दो साल में जनता में इतना अविश्वास और विद्रोह बढ़ गया है कि यह सरकार के लिए सोचने का विषय है। वहीं, बीजेपी ने आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने की बात कही है।
पुलिस ने दो आरोपियों को पहले गिरफ्तार कर लिया था।
पुलिस ने 3 आरोपियों को आज गिरफ्तार किया है।
महिला आरक्षक की वर्दी फाड़ी, वीडियो भी बनाया
प्रदर्शनकारियों ने महिला आरक्षक के कपड़े फाड़ कर उसका वीडियो भी बनाया। 40 सेकेंड के इस वीडियो में महिला आरक्षक रो-रोकर प्रदर्शनकारियों को भाई बोलकर कहती है कि, मुझे माफ कर दो, छोड़ दो।
प्रदर्शनकारी कहते हैं कि, क्या करने आई थी। चप्पल से मारूं अभी। चलो भाग जाओ यहां से। इसके बाद उसे छोड़कर लोग चले जाते हैं। इससे पहले महिला TI को लात मारने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
इस दौरान महिला आरक्षक बचाने के लिए चीखते रही, लेकिन फिर भी ग्रामीण नहीं रुके।
अब जानिए पूरा मामला
दरअसल, मामला 8 दिसंबर 2025 को धौराभाठा में हुई जनसुनवाई के विरोध से जुड़ा है। JPL कोयला खदान सेक्टर-1 कोल ब्लॉक से प्रभावित 14 गांवों के लोग 12 दिसंबर से धरने पर बैठे हुए थे। 27 दिसबंर की सुबह करीब 9 बजे लिबरा चौक पर लगभग 300 ग्रामीण जमा हो गए। सड़क पर बैठकर आने-जाने का रास्ता रोक दिया।
स्थिति बिगड़ती देख सुबह करीब 10 बजे अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने लोगों को समझाया। धरनास्थल पर लगे टेंट में वापस भेज दिया। कुछ समय बाद भीड़ की संख्या करीब 1000 के आसपास हो गई।
वीडियो में एक ग्रामीण महिला आरक्षक के कपड़े खींचते नजर आया।
हालात बिगड़े, महिला TI को लात घूसों से पीटा
घरघोड़ा के एसडीएम और पुलिस अधिकारी लगातार माइक से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते रहे, लेकिन भीड़ बार-बार सड़क पर आकर रास्ता रोकने की कोशिश करती रही। करीब दोपहर ढाई बजे अचानक हालात बिगड़ गए। भीड़ ने पुलिस के बैरिकेड तोड़ दिए। पत्थर और डंडों से हमला कर दिया।
पुलिस पर जमकर लाठियां और पत्थर बरसाए गए। तमनार थाना प्रभारी कमला पुषाम को महिलाओं ने लात-घूंसे से पीटा। जिससे कई पुलिसकर्मी और महिला आरक्षक भी घायल हुए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
कोल हैंडलिंग प्लांट में घुसकर लगाई आग
जिला प्रशासन के मुताबिक उग्र भीड़ ने मौके पर खड़ी पुलिस बस, जीप और एम्बुलेंस में आग लगा दी। कई अन्य सरकारी वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया। इसके बाद भीड़ जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट की ओर बढ़ गई। वहां घुसकर कन्वेयर बेल्ट, दो ट्रैक्टर और अन्य वाहनों में आग लगा दी गई। प्लांट के दफ्तर में भी तोड़फोड़ की गई।
ग्रामीणों ने महिला TI को लात घूंसे से पीटा।
अधिकारियों की मौजूदगी में भी पथराव
स्थिति संभालने के लिए लैलूंगा की विधायक विद्यावती सिदार, रायगढ़ कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक खुद मौके पर पहुंचे, लेकिन भीड़ और ज्यादा उग्र हो गई। अधिकारियों की मौजूदगी में भी पथराव हुआ और भीड़ दोबारा प्लांट की ओर जाकर आगजनी करती रही।
JPL प्रबंधन ने जनसुनवाई नहीं करने का लिया फैसला
14 गांव के करीब 4 हजार से अधिक लोगों ने आंदोलन किया। उनकी एक ही मांग थी कि कोल ब्लॉक के लिए कराई गई जनसुनवाई निरस्त हो। जिसके बाद जिंदल कंपनी प्रबंधन ने प्रस्तावित कोल ब्लॉक गारे पेलमा सेक्टर-1 के लिए जनसुनवाई नहीं करने का फैसला लिया।
आरोपियों का जुलूस निकालने की मांग
2 जनवरी की रात तमनार पुलिस ने आमगांव का रहने वाला मंगल राठिया उर्फ करम राठिया और चीनेश खम्हारी को गिरफ्तार कर जिला जेल लाया था। इस दौरान महिला आरक्षकों ने पुलिस की गाड़ी रोकी और इनका जुलूस निकालने की मांग की। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाइश देकर जेल परिसर में ले गए और जेल के बाहर के मेन गेट बंद कर दिया।
महिला आरक्षकों ने आरोपियों का जुलूस निकालने की मांग की।
कांग्रेस बोली- जनता के बढ़ते गुस्से पर सरकार करे आत्ममंथन
छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने रायगढ़ के तमनार में महिला आरक्षक के साथ हुई बेरहमी से मारपीट की कड़ी निंदा की है। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि, यह मानवता को शर्मसार करने वाला और अक्षम्य अपराध है। बैज ने सवाल उठाया कि छत्तीसगढ़ में ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं।
बैज ने कहा कि जनता में सरकार और पुलिस के प्रति इतना गुस्सा क्यों बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि दो साल पहले तक ऐसा कभी नहीं देखा गया। भाजपा सरकार के पिछले पौने 2 साल में जनता में इतना अविश्वास और विद्रोह बढ़ गया है कि यह सरकार के लिए सोचने का विषय है।
बीजेपी बोली- आरोपियों को कड़ी सजा मिलेगी
बीजेपी ने इस घटना को दुखद बताया है। बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी ने कहा कि, छत्तीसगढ़ सरकार ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए है। तात्कालिक प्रक्रिया के तहत घटना हुई है या फिर इसके पीछे कोई षडयंत्र है। यहां के लोग शामिल है या फिर बाहर के लोग शामिल है। इसकी जांच की जा रही है। गलत कृत्य करने वाले आरोपियों को सरकार कड़ी सजा देगी।
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अब पढ़िए कोल खदान के खिलाफ कहां-कहां विरोध प्रदर्शन ?
पहला मामला- सरगुजा में 25 पुलिसकर्मी घायल, ग्रामीणों पर भी पथराव
पहला मामला सरगुजा जिले के अमेरा ओपनकास्ट कोल माइंस का है। कोल माइंस विस्तार के खिलाफ ग्रामीण विरोध जता रहे हैं। 3 दिसंबर 2025 को पुलिस और ग्रामीणों के बीच झड़प हो गई। इस दौरान ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव और गुलेल से हमला किया।
हमले में ASP, थाना प्रभारी समेत लगभग 25 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। 12 से अधिक ग्रामीण भी चोटिल हुए थे। स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। यह मामला लखनपुर थाना क्षेत्र का है।
जानकारी के अनुसार, SECL ने अमेरा खदान के विस्तार के लिए परसोढ़ी गांव की जमीनें साल 2001 में अधिग्रहित की थीं। ग्रामीण अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं। प्रशासनिक अधिकारी लगभग 500 पुलिसकर्मियों के साथ जमीन अधिग्रहण के लिए गांव पहुंचे थे। पढ़ें पूरी खबर…
दूसरा मामला- रायगढ़ में कोल माइंस का विरोध
वहीं दूसरा मामला रायगढ़ जिले के छाल क्षेत्र में कोयला खदान का है। ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं। पुरूंगा, साम्हरसिंघा और तेंदूमुड़ी के लोग अपनी जल, जंगल और जमीन को खदान के लिए देने से इनकार कर चुके हैं। 6 नवंबर को उन्होंने धरना प्रदर्शन किया।
कोयला खदान के लिए 11 नवंबर को होने वाली जनसुनवाई को ग्रामीण रद्द की मांग कर रहे थे। 6 नवंबर को करीब 300 ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे, लेकिन कलेक्टर उनसे मिलने नहीं आए। इसके बाद ग्रामीण रातभर कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठे रहे। इस धरने में महिलाएं, बच्चे और लड़कियां भी शामिल थीं। पढ़ें पूरी खबर….
तीसरा मामला- कोरबा में CISF ने ग्रामीणों पर बरसाई लाठियां
तीसरा मामला कोरबा जिले के SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) की गेवरा खदान का है। गेवरा खदान में भू-विस्थापितों के प्रदर्शन के दौरान CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) ने लाठीचार्ज किया था। लाठीचार्ज के दौरान वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
इस दौरान जवानों ने प्रदर्शनकारियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा था। भू-विस्थापित रोजगार, पुनर्वास और मुआवजे की मांग कर रहे थे। लाठीचार्ज में किसान सभा के जिला सचिव दीपक साहू, रमेश दास, बिमल दास और गुलाब दास समेत लगभग 10 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। पढ़ें पूरी खबर…

