Daughters of Bastar are writing new history in hockey | बस्तर की बेटियां हॉकी में लिख रहीं नया इतिहास: ओलंपिक में दमखम दिखाने को तैयार खिलाड़ी, संगीता कश्यप पिछले तीन सालों से खेल रहीं – Kondagaon News
कभी माओवादी प्रभाव वाले कोंडागांव जिले का मर्दापाल क्षेत्र अब खेल के माध्यम से अपनी नई पहचान बना रहा है। यहां की बेटियां हॉकी के मैदान में अपनी मेहनत और लगन से जिले का नाम रोशन कर रही हैं। ये खिलाड़ी अब संभाग स्तरीय बस्तर ओलंपिक में अपना हुनर दिखान
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शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मर्दापाल और प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रही संगीता कश्यप पिछले तीन सालों से हॉकी खेल रही हैं। ग्राम कुदुर की संगीता बताती हैं कि हॉकी ने उन्हें अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण सिखाया है। इसी स्कूल की रमली कश्यप ने पांचवीं कक्षा में हॉकी खेलना शुरू किया था। अब टीम की उभरती हुई खिलाड़ी हैं। कांति बघेल (ग्राम बड़े कुरुशनार) और दीपा कश्यप (ग्राम कुदुर) भी नियमित अभ्यास कर टीम को मजबूत कर रही हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने का लक्ष्य
ग्राम दिगानार की सुनीता नेताम पहले भी राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं और अब राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का लक्ष्य रखती हैं। कक्षा 12वीं की सुलंती कोर्राम (ग्राम बोरगांव) चार बार राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में खेल चुकी हैं।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता का अनुभव
झारखंड में राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिता में जिले का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं। उनका मानना है कि खेल ने उन्हें आत्मविश्वास दिया है। इसी कक्षा की प्रिया नेताम (ग्राम कबेंगा) भी कई बार राज्य स्तर पर खेल चुकी हैं और भारतीय महिला हॉकी टीम में जगह बनाने का सपना देखती हैं।
भारतीय महिला हॉकी टीम में जगह बनाने का सपना
राजन्ती कश्यप (कक्षा 9वीं) और खेमेश्वरी सोढ़ी (कक्षा 10वीं) भी आगामी प्रतियोगिताओं की तैयारी में जुटी हैं। बस्तर ओलंपिक ने सुदूर ग्रामीण अंचलों की खेल प्रतिभाओं को एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया है। कभी माओवादी भय से प्रभावित रहे इन क्षेत्रों में अब शिक्षा, खेल और विकास नई पहचान बन रहे हैं।
स्कूलों में उपलब्ध कराई गई खेल सामग्री, प्रशिक्षक और छात्रावास जैसी सुविधाओं ने बच्चों में नया उत्साह भर दिया है।

