Delhi Air Pollution Vs Air Purifier GST; High Court | Nitin Gadkari | दिल्ली हाईकोर्ट बोला-हवा इमरजेंसी जैसी, एयर-प्यूरीफायर पर 18% GST क्यों: साफ हवा नहीं तो टैक्स घटाएं; गडकरी ने माना- 40% पॉल्यूशन ट्रांसपोर्ट सेक्टर फैला रहा
नई दिल्ली14 मिनट पहले
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दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर हाईकोर्ट ने एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी कम करने को लेकर सुनवाई की।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार और अधिकारियों से पूछा कि जब राजधानी में हवा की स्थिति इमरजेंसी जैसी बनी हुई है तो एयर प्यूरीफायर पर 18% GST क्यों लगाया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार लोगों को साफ हवा उपलब्ध नहीं करा पा रही तो कम से कम एयर प्यूरीफायर पर टैक्स ही कम कर दें।
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गडेला की डिवीजन बेंच ने कहा कि हर नागरिक को साफ हवा में सांस लेने का अधिकार है। ऐसे हालात में एयर प्यूरीफायर को लग्जरी आइटम मानकर 18% GST लगाना ठीक नहीं है।
कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें मांग की गई थी कि एयर प्यूरीफायर को मेडिकल डिवाइस की श्रेणी में रखा जाए और इन पर GST 18% से घटाकर 5% किया जाए। अपील में कहा गया कि खराब AQI के समय में एयर प्यूरीफायर अब लग्जरी नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है।
वहीं, सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक कार्यक्रम में कहा कि दिल्ली में दो से तीन दिन रहने पर मुझे इन्फेक्शन हो जाता है। प्रदूषण का 40% हिस्सा ट्रांसपोर्ट सेक्टर ही फैला रहा है, जिसका मैं मंत्री हूं।
पॉल्यूशन पर दिल्ली हाईकोर्ट के 3 कमेंट
- जब सरकार खुद साफ हवा देने में नाकाम है तो कम से कम एयर प्यूरीफायर पर GST घटाना या टैक्स में छूट देना सबसे बुनियादी कदम हो सकता है।
- कोर्ट ने पूछा कि लोग कब तक इंतजार करें? क्या तब तक, जब हालात और ज्यादा गंभीर हो जाएं? एक व्यक्ति दिन में करीब 21 हजार बार सांस लेता है और जहरीली हवा का असर सीधे स्वास्थ्य पर पड़ता है।
- केंद्र से पूछा कि जब हालात एयर इमरजेंसी जैसे हैं, तो क्या किसी आपात प्रावधान के तहत अस्थायी रूप से एयर प्यूरीफायर को GST से छूट नहीं दी जा सकती।
बेंच ने सुझाव दिया कि 15 दिन या किसी तय अवधि के लिए ही सही, टैक्स राहत पर विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने साफ किया कि वह सिर्फ लंबी तारीखें नहीं, बल्कि मौजूदा हालात में ठोस प्रस्ताव चाहती है।
PIL में क्या मांग की गई है?
यह याचिका एडवोकेट कपिल मदान ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि मेडिकल डिवाइस रूल्स और 2020 की केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार एयर प्यूरीफायर “मेडिकल डिवाइस” की परिभाषा में आते हैं। याचिका में दलील दी गई है कि जब अधिकांश मेडिकल डिवाइस पर 5% GST लगता है, तो एयर प्यूरीफायर पर 18% GST तर्कसंगत नहीं है।
याचिकाकर्ता ने WHO और स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह का हवाला देते हुए कहा कि खराब से गंभीर AQI के दौरान, खासकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए एयर प्यूरीफायर को सुरक्षा उपकरण के रूप में देखा जाता है। ऐसे में इन्हें लग्जरी मानकर ऊंचा टैक्स लगाना लोगों के स्वास्थ्य अधिकार पर अतिरिक्त बोझ डालता है।
14 दिसंबर को दिल्ली का AQI 500 पहुंच गया था
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर कम हुआ तो दिल्ली में हवा थम गई। इसके चलते राजधानी 14 दिसंबर को ठंड, स्मॉग और प्रदूषण के ट्रिपल अटैक की चपेट में आ गई। ग्रैप-4 लागू होने के बावजूद वजीरपुर और रोहिणी इलाकों में AQI 500 के लेवल तक पहुंच गया था।
प्रदूषक कण वातावरण में फंसे रहे और राजधानी गैस चेंबर बन गई। प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने स्कूलों में कक्षा पांचवीं तक क्लासेस केवल ऑनलाइन लगाने के आदेश दिए। 14 दिसंबर को ही इस साल का सबसे घना कोहरा भी छाया। अक्षरधाम समेत कई इलाकों में विजिबिलिटी 50 मीटर तक सिमट गई थी। पूरी खबर पढ़ें…
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