delhi high court Ani news agency openai chat gpt content copyright case

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नई दिल्ली6 मिनट पहले

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दिल्ली हाईकोर्ट ने ANI की उस याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है, जिसमें OpenAI पर ChatGPT को ट्रेन करने के लिए उसकी खबरों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है। जस्टिस अमित बंसल ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

भारत में AI ट्रेनिंग और कॉपीराइट कानून से जुड़ा यह पहला बड़ा मामला माना जा रहा है। यह मामला 19 नवंबर 2024 को कोर्ट में आया था। तब से लेकर 27 मार्च तक इस पर कुल 32 बार सुनवाई हो चुकी है।

ANI का आरोप है कि OpenAI ने बिना अनुमति और बिना भुगतान उसके न्यूज़ आर्टिकल्स का इस्तेमाल किया। एजेंसी का आरोप है कि OpenAI ने वेब टूल्स के माध्यम से उसका कंटेंट इकट्ठा किया और ChatGPT अपने जवाबों में ANI की खबरों के कुछ हिस्से दोहरा सकता है। ANI के अनुसार यह “फेयर डीलिंग” के नियमों में नहीं आता, क्योंकि इसका उपयोग कमाई और व्यवसाय के लिए किया जा रहा है।

वहीं OpenAI ने आरोपों को गलत बताया है। कंपनी का कहना है कि उसका सिस्टम केवल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी का उपयोग करता है। कंपनी के मुताबिक मॉडल पूरे आर्टिकल को कॉपी नहीं करता, बल्कि डेटा से सिर्फ पैटर्न सीखता है। OpenAI ने यह भी कहा है कि उसने भविष्य की ट्रेनिंग के लिए ANI की वेबसाइट को ब्लॉक कर दिया है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने AI और कॉपीराइट से जुड़े कई जरूरी कानूनी सवालों पर विचार किया। इस मामले में कई मीडिया संस्थानों और दूसरे संगठनों ने भी अपनी बात रखी। कुछ मीडिया समूहों ने ANI का समर्थन करते हुए कॉपीराइट की सुरक्षा की मांग की, जबकि कुछ पक्षों ने OpenAI का समर्थन किया और कहा कि मौजूदा कानून AI ट्रेनिंग की अनुमति देता है।

ANI का कहना है कि कॉपीराइट का उल्लंघन उसी समय शुरू हो जाता है, जब ट्रेनिंग के लिए डेटा इकट्ठा किया जाता है। एजेंसी ने यह भी दावा किया कि ChatGPT के कुछ जवाबों में पेड कंटेंट जैसी सामग्री दिखाई दी है।

वहीं OpenAI और उसके समर्थकों का कहना है कि AI मॉडल पूरे आर्टिकल्स को सेव नहीं करते। वे सिर्फ भाषा और डेटा के पैटर्न को सीखते हैं। उनका तर्क है कि अस्थायी रूप से डेटा का उपयोग करना कॉपी करना नहीं माना जाना चाहिए।

इस मामले का सबसे बड़ा मुद्दा भारतीय कानून में “फेयर डीलिंग” की सही व्याख्या है। ANI का कहना है कि AI कंपनियों को इसका फायदा नहीं मिलना चाहिए, जबकि OpenAI का कहना है कि AI ट्रेनिंग एक रिसर्च गतिविधि की तरह है और इसे अनुमति मिलनी चाहिए।

अब अदालत यह तय करेगी कि AI मॉडल की ट्रेनिंग के लिए कंटेंट का इस्तेमाल कॉपीराइट कानून के तहत “कॉपी करना” माना जाएगा या नहीं। यह फैसला भारत में भविष्य के AI और कॉपीराइट नियमों की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकता है।

कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट तय करेगा कि AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए कंटेंट का इस्तेमाल कॉपीराइट कानून के तहत आएगा या नहीं।

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