Dense fog and cold westerly winds led to a drop in temperature. | घना कोहरा और ठंडी पछुआ हवा के कारण तापमान में गिरावट देखने को मिली – Darbhanga News
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दिसंबर 2025 का महीना दरभंगा के लिए कड़ाके की ठंड लेकर आया। बीते 10 वर्षों के औसत तापमान आंकड़ों का विश्लेषण करने पर स्पष्ट होता है कि इस वर्ष दिसंबर में ठंड का असर सामान्य से कहीं अधिक रहा। दिन और रात दोनों समय तापमान में गिरावट ने आम जनजीवन को प्रभावित किया। मौसम विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 का औसत अधिकतम तापमान 21.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले 10 वर्षों में सबसे कम है। इससे पहले वर्ष 2019 में अधिकतम तापमान 21.0 डिग्री सेल्सियस रहा था, जबकि 2024 में यह 25.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।
वहीं न्यूनतम तापमान 2025 में 9.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो ठंड की तीव्रता को दर्शाता है। विशेष रूप से 30 दिसंबर 2025 को दरभंगा में ठंड ने नया रिकॉर्ड बनाया। इस दिन अधिकतम तापमान मात्र 13.8 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 10.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पिछले वर्षों की तुलना करें तो 30 दिसंबर 2024 को अधिकतम तापमान 25.5 डिग्री और न्यूनतम 15.8 डिग्री सेल्सियस था, जबकि 2023 में इसी दिन अधिकतम 21.2 और न्यूनतम 13 डिग्री दर्ज किया गया था। मौसम वैज्ञानिक डॉ. ए सत्तार ने बताया कि मौसम में अभी उतार चढ़ाव की स्थिति बनी रहेगी।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ, घना कोहरा और ठंडी पछुआ हवाओं के कारण तापमान में यह तेज गिरावट देखने को मिली। लगातार शीतलहर और सूर्य की कम उपस्थिति ने दिन के तापमान को भी नीचे बनाए रखा। ठंड के बढ़ते प्रकोप से जनजीवन प्रभावित हुआ है। सुबह और देर शाम सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा, वहीं लोग अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा लेते नजर आए। प्रशासन और सामाजिक संगठनों द्वारा अलाव की व्यवस्था और कंबल वितरण की मांग भी तेज हो गई है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में ठंड बने रहने की संभावना जताई है और बुजुर्गों, बच्चों एवं बीमार लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। इस मौसम में सबसे अधिक परेशानी बच्चे और बुजुर्ग को हो रही है। उनमें इम्युनिटी की कमी होती है। डॉक्टर भी इन दोनों वर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते है। दिसंबर में ठंड को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूल को बंद करा दिया था, ताकि बच्चे सुरक्षित रहें। धूप नहीं निकलने के कारण कनकनी अधिक होती रही।

