Himachal receives 99% less rainfall | हिमाचल में 99% कम बारिश: कई जिले सूखे के शिकार, रबी फसलें खतरे में, गेहूं की बुआई पर लगा ब्रेक, अंकुरण में दिक्कत – Dharamshala News
हिमाचल प्रदेश, विशेषकर कांगड़ा जिला, पिछले तीन महीनों से गंभीर सूखे की चपेट में है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में प्रदेश में सामान्य से 99% कम बारिश दर्ज की गई है।
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आंकड़ों में सूखे की भयावहता:
लाहौल-स्पीति जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी 98% बारिश की कमी रही, जहाँ सामान्य 41.2 मिमी के मुकाबले मात्र 0.9 मिमी वर्षा हुई। नवंबर महीना वर्ष 1901 के बाद सबसे शुष्क रहा, जिसमें केवल 1 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। कांगड़ा जिले में गेहूं की बुआई का मुख्य समय (नवंबर) पूरी तरह सूखा बीत गया।
35 हजार किसानों की आजीविका दांव पर
जिले के लगभग 35 हजार किसान पूरी तरह वर्षा पर निर्भर हैं। निर्धारित 92 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि में से आधे से भी कम क्षेत्र में बुआई हो पाई है। नमी की कमी के कारण बोए गए बीज अंकुरित नहीं हो रहे हैं और फसलें सूखने लगी हैं। धौलाधार की पहाड़ियों पर बर्फबारी न होने से स्थिति और भी गंभीर हो गई है। निराश किसान अब वर्षा के देवता भगवान इंद्रुनाग के दरबार में प्रार्थना कर रहे हैं।
कृषि विभाग और विशेषज्ञों की राय:
कृषि विभाग (उत्तर क्षेत्र) के अतिरिक्त निदेशक डॉ. राहुल कटोच के अनुसार, यदि गेहूं के CRI (Crown Root Initiation) चरण के दौरान नमी नहीं मिली, तो भारी नुकसान हो सकता है। विभाग ने किसानों को उपलब्ध जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं को अपनाने की सलाह दी है।
चिंताजनक आंकड़े (एक नजर में)
- दिसंबर की वर्षा: सामान्य से 99% कम।
- कांगड़ा: अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से कोई बड़ा स्पेल नहीं।
- मुख्य कारण: पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का कमजोर होना।
- प्रभावित फसलें: गेहूं (2.26 लाख हेक्टेयर), जौ, दालें और तिलहन।

