IIT कानपुर में नए स्टूडेंट्स के लिए मेंटल हेल्थ चेकअप हुआ अनिवार्य, दो सुसाइड के बाद लिया गया फैसला

IIT कानपुर में नए स्टूडेंट्स के लिए मेंटल हेल्थ चेकअप हुआ अनिवार्य, दो सुसाइड के बाद लिया गया फैसला


आईआईटी कानपुर ने छात्रों की मानसिक सेहत को लेकर बड़ा और अहम कदम उठाया है. कैंपस में एक महीने से भी कम समय में दो छात्रों की आत्महत्या के बाद अब सभी नए छात्रों की पहले हफ्ते में मानसिक स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी. इसका मकसद समय रहते तनाव, डिप्रेशन या अन्य मानसिक समस्याओं को पहचान कर छात्रों को सही मदद देना है.

दिसंबर और जनवरी के बीच आईआईटी कानपुर में एक पीएचडी छात्र और एक अंतिम वर्ष के स्नातक छात्र की मौत हो गई थी. इन घटनाओं ने संस्थान और शिक्षा मंत्रालय दोनों को चिंता में डाल दिया. इसके बाद यह तय किया गया कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए शुरुआती स्तर पर ही मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाए.

नए छात्रों की अनिवार्य मानसिक स्वास्थ्य जांच

अब आईआईटी कानपुर में आने वाले हर नए छात्र की कैंपस में पहले सप्ताह के दौरान मानसिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की जाएगी. यह जांच पूरी तरह प्रोफेशनल तरीके से होगी ताकि किसी भी छात्र को असहज महसूस न हो.

जोखिम वाले छात्रों को तुरंत सहायता

जिन छात्रों को जांच में मध्यम या गंभीर मानसिक जोखिम की श्रेणी में रखा जाएगा, उनसे प्रशिक्षित काउंसलर सीधे संपर्क करेंगे. जरूरत पड़ने पर उनका विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा और उन्हें मनोचिकित्सक के पास भी भेजा जा सकता है, ताकि समय पर इलाज और सहयोग मिल सके.

कैंपस में संवेदनशील माहौल बनाने की कोशिश

आईआईटी कानपुर सिर्फ जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे कैंपस को मानसिक रूप से सुरक्षित बनाने पर काम कर रहा है. इसके लिए शिक्षकों, छात्रों और कर्मचारियों के लिए नियमित मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं.

शिक्षा मंत्रालय की तीन सदस्यीय समिति

शिक्षा मंत्रालय ने आईआईटी कानपुर में हुई घटनाओं की समीक्षा के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई है. इस समिति की अध्यक्षता प्रोफेसर अनिल डी. सहस्त्रबुद्धे कर रहे हैं. इसमें एक वरिष्ठ मनोचिकित्सक और उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं.यह समिति जांच करेगी कि आईआईटी कानपुर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सरकारी दिशानिर्देशों का सही तरीके से पालन कर रहा है या नहीं. साथ ही हालिया मामलों के कारण, सिस्टम की कमियां और भविष्य में आत्महत्याओं को रोकने के उपायों पर सुझाव देगी. समिति को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट देनी होगी.

कक्षा से बाहर भी ट्रेनिंग

मानसिक स्वास्थ्य को लेकर ट्रेनिंग सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं है. इसमें सुरक्षा गार्ड, मेडिकल स्टाफ, लाइब्रेरी और मेस के कर्मचारी भी शामिल हैं, ताकि कोई भी संकट के शुरुआती संकेत पहचान सके और सही समय पर मदद कर सके.

24×7 मानसिक स्वास्थ्य इमरजेंसी सिस्टम

कैंपस में अब 24 घंटे इमरजेंसी मानसिक स्वास्थ्य सहायता की सुविधा उपलब्ध है.मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र और कैंपस हेल्थ सेंटर मिलकर किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता प्रदान करते हैं.

आईआईटी कानपुर में अब सीनियर छात्र जूनियर छात्रों के लिए मेंटर की भूमिका निभा रहे हैं. इससे नए छात्रों का अकेलापन कम होता है और उन्हें एक भरोसेमंद सहारा मिलता है. पूरे साल मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम, त्योहार और खेल गतिविधियां भी कराई जाती हैं.आईआईटी कानपुर का कहना है कि पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों की मानसिक और भावनात्मक सेहत भी उतनी ही जरूरी है. संस्थान छात्रों को खुद की भलाई को प्राथमिकता देने और जरूरत पड़ने पर मदद मांगने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है.

 यह भी पढ़ें – कब होगा पीएम मोदी का ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम? यहां देखें जरूरी डिटेल

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

India Fontline News

Subscribe Our NewsLetter!