India taxis up to 30% cheaper than Ola-Uber | ओला-उबर से 30% तक सस्ती भारत टैक्सी: किराए में ₹100 से ज्यादा का अंतर; दिल्ली में इस महीने, मुंबई-पुणे में छह महीने बाद शुरू

India taxis up to 30% cheaper than Ola-Uber | ओला-उबर से 30% तक सस्ती भारत टैक्सी: किराए में ₹100 से ज्यादा का अंतर; दिल्ली में इस महीने, मुंबई-पुणे में छह महीने बाद शुरू


नई दिल्ली33 मिनट पहलेलेखक: अजय प्रकाश

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भारत टैक्सी सरकारी सपोर्ट वाला एप है, जिसमें ऑटो-रिक्शा, कार और बाइक की सर्विस उपलब्ध है।

केंद्र सरकार की सहकारी सर्विस ‘भारत टैक्सी’ जनवरी 2026 से दिल्ली और गुजरात में शुरू हो सकती है। यह छह महीने बाद मुंबई, पुणे में शुरू होगी। सहकारी टैक्सी का ट्रायल डेढ़ महीने पहले दिल्ली और गुजरात के राजकोट में शुरू हुआ था, जो सफल रहा है।

अपने पायलट प्रोजेक्ट में यह ओला-उबर पर भारी पड़ रही है। सहकारी टैक्सी पीक ऑवर में अपनी प्राइवेट प्रतिद्वंद्वियों से 25 से 30% तक सस्ती पड़ रही है। भास्कर ने दिल्ली में 100 से ज्यादा ड्राइवरों, राइडर्स, यूनियन पदाधिकारियों और भारत टैक्सी एप से जुड़े अधिकारियों से बात की।

इसी दौरान ओला, उबर, रैपिडो और भारत टैक्सी के रेट की जांच की। पीक ऑवर यानी सुबह 9, शाम 7 और रात 10 बजे रियल टाइम में भारत टैक्सी और ओला-उबर के रेट में ₹100 से ज्यादा का अंतर मिला। जबकि नॉर्मल ऑवर यानी सुबह 8 बजे, दोपहर 2 बजे यह अंतर घटकर महज ₹ 5-20 रह जाता है।

बता दें कि भारत टैक्सी भी ओला-उबर की तरह एप से ही बुक होती है। इसे भारतीय सहकारिता कंपनी सहकारी टैक्सी कॉपरेटिव लि. संचालित करेगी। इसके चेयरमैन अमूल के मालिक जयंत मेहता हैं। जबकि कर्नाटक में सफल हो चुकी नम्मा टैक्सी को पीपीपी मॉडल में सर्विस दे रहे मूविंग टेक प्राइवेट लि. टेक पार्टनर है।

पीक ऑवर में दो लोकेशन से सुबह 9 और शाम 7 बजे के रेट

1. गोविंदपुरी मेट्रो से नई दिल्ली स्टेशन तक

टैक्सी किराया (रुपए)
भारत 280
ओला 320
उबर 340
रैपिडो 310

2. INS से दिल्ली एयरपोर्ट तक

टैक्सी किराया
भारत 411
ओला 522
उबर 491
रैपिडो 427

एप से दिल्ली में 2.75 लाख ग्राहक और 1.50 लाख ड्राइवर जुड़े

भारत टैक्सी से दिल्ली में अब तक 2.75 लाख ग्राहक और 1.50 लाख ड्राइवर जुड़ चुके हैं। इनमें से 1.10 लाख ड्राइवर ऑनबोर्ड हो चुके हैं। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्राइवेट कंपनियां अभी नॉर्मल ऑवर में रेट गिरा रही हैं। हमें इसके लिए एग्रीगेटर मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव कराना जरूरी है।

इस एक्ट में पीक ऑवर में 50% रेट बढ़ाने तो नॉर्मल टाइम में 50% रेट गिराने का विकल्प है। इससे कंपनियां तो मालामाल हुईं, लेकिन ड्राइवर नहीं। पटेल चौक मेट्रो पर ओला ड्राइवर मंजीत सिंह तेवतिया ने कहा, भारत टैक्सी का रेट कम है। इसकी बुकिंग भी आसान है।

यह एप दिल्ली पुलिस की ऑनलाइन सेवा से सीधे जुड़ा है। इससे मुश्किल में पुलिस की तुरंत सहायता मिल जाती है। कमीशन के तौर पर जहां भारत टैक्सी जहां एक दिन के सिर्फ 30 रुपए लेती है, वहीं उबर 187 तो ओला 149 रुपए कमीशन चार्ज करती है।

सहकारी टैक्सी… 2 बड़े फायदे और आशंकाएं

फायदे:

  1. कमीशन नहीं: ओला, उबर जैसी कंपनियां जहां ड्राइवरों की कमाई में से 20-30% कमीशन काटती हैं, वहीं सहकारी टैक्सी में कमीशन नहीं कट रहा। ड्राइवर रतनजोत ने बताया कि हमें कमाई का 100% हिस्सा मिलने लगेगा।
  2. मालिकाना हक: प्राइवेट कंपनियां ड्राइवरों को लाभ में भागीदार नहीं बनातीं। भारत टैक्सी में ड्राइवर कंपनी में शेयर होल्डर रहेंगे। हर ड्राइवर को एक शेयर लेना ही है। अधिकतम 5 शेयर ले सकते हैं।

आशंकाएं:

  1. चुनौती: पूरे देश में लाखों ड्राइवरों को जोड़ना होगा। स्थानीय नियम कानून और इंफ्रास्ट्रक्चर भी बनाना होगा। नम्मा सर्विस बेंगलुरु में ही सफल हुई, लेकिन अन्य जगहों पर नहीं।
  2. फंडिंग: भारत टैक्सी के पीछे 8 बड़ी कोऑपरेटिव संस्थाएं हैं, लेकिन ओला-उबर में अरबों डॉलर की फंडिंग हैं। इन कोऑपरेटिव्स को 80 करोड़ रु. निवेश करना है, लेकिन अभी 16 करोड़ ही हुआ है।

5 लाख करोड़ के बाजार पर नजर

फोरम फॉर प्रोग्रेसिव गिग वर्कर्स के अध्ययन के अनुसार, 2024 में भारत की गिग प्लेटफॉर्म इकोनॉमी 37 लाख 90 हजार करोड़ की हो चुकी है, जिसमें सिर्फ एप आधारित टैक्सी की हिस्सेदारी 5 लाख करोड़ से ज्यादा है।

एनसीसीपीटीई के संस्थापक आशीष सिंह अरोड़ा कहते हैं कि यह अभियान प्लेटफॉर्म इकोनॉमी में सहकारिता की जागरूकता बढ़ाने के लिए सभी को संगठित करने के लिए कार्य कर रहा है। हमारी कोशिश है कि प्लेटफॉर्म इकोनॉमी की 37 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था में 50% की भागीदारी सहकारिता की हो।

ड्राइवरों को प्राइवेट एप के मकड़जाल से बाहर निकालना मकसद

सहकार ​टैक्सी सर्विस के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर किशन पाटनी कहते हैं- दिल्ली में कुल 10 लाख ड्राइवर हैं, जिसमें 4.5 लाख कैब, 3.5 लाख ऑटो और 2 लाख बाइक चलाते हैं। भारत टैक्सी का मकसद ड्राइवरों को प्राइवेट एप बेस्ड टैक्सी के मकड़जाल से बाहर निकालना है और एल्गोरिदम की गुलामी से मुक्ति दिलाना भी।

किशन कहते हैं- सहकारिता का टैक्सी मॉडल हमें भारत में नए अमूल के प्रयोग की ओर प्रोत्साहित करता है और सरकार को जिम्मेदार बनाने की कोशिश भी है। सहकारिता मंत्रालय की भागीदारी हमारी इस पूरी योजना को सरकारी मदद और सरकारी योजनाओं से जोड़कर विश्वसनीयता देने का काम करेगी।

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हड़ताल के बीच डिलीवरी पार्टनर्स को इंसेंटिव देने का ऐलान, स्विगी-जोमैटो पीक ऑवर्स में ₹150 तक इंसेंटिव देंगे

देशभर में गिग वर्कर्स यानी, डिलीवरी पर्सन्स की हड़ताल के बीच स्विगी और जोमैटो ने पीक ऑवर्स और ईयर-एंड डेज पर ज्यादा इंसेंटिव देने का ऐलान किया है। जोमैटो ने डिलीवरी पार्टनर्स को मैसेज भेजकर बताया कि पीक ऑवर्स (शाम 6 से रात 12 बजे) में हर ऑर्डर ₹120-150 पेआउट मिलेगा। दिन भर में ऑर्डर की संख्या और अवेलेबिलिटी के हिसाब से ₹3,000 तक कमाई का वादा किया गया है। पूरी खबर पढ़ें…

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