Is Lalu family distancing itself from Hindu festivals after Tejashwi Yadav took over RJD

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मकर संक्रांति बीत गई, लेकिन न राबड़ी आवास पर कार्यकर्ताओं का जुटान हुआ, न गरीबों को खिचड़ी मिली, न नेताओं ने दही चूड़ा का आनंद लिया। केवल मकर संक्रांति ही नहीं, पिछले कुछ वर्षों में 10 सर्कुलर में न होली का रंग बचा और न छठ महापर्व की रौनक।

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तेजस्वी यादव के हाथ में राजद की बागडोर है। वह सांस्कृतिक रूप से पिता लालू यादव से इतर राह पर चलते दिख रहे हैं। पिछले कुछ सालों में पर्वों पर उनकी एक्टिविटी को देखें तो एक बात साफ नजर आती है। हिंदू त्योहार से दूरी और दूसरे धर्म के पर्वों से करीबी बढ़ती जा रही है।

मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए पावर शिफ्टिंग के साथ कैसे बदला राबड़ी आवास में मनाए जाने वाले वाले पर्व का जश्न।

2017 में मकर संक्रांति के अवसर पर भोज खाने घर आए नीतीश कुमार के माथे पर लालू यादव ने दही का टीका लगाया था। (फाइल फोटो)

जब लालू ने लगाया था नीतीश के माथे पर दही का टीका

साल 2017। बिहार में 15 महीना पहले पूर्ण बहुमत के साथ महागठबंधन की सरकार बनी थी। लालू प्रसाद यादव की अगली पीढ़ी (बेटे तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव) ने मंत्री पद की शपथ ली थी। दिसंबर बीतते-बीतते नीतीश कुमार के बीजेपी के साथ जाने की सुगबुगाहट शुरू हो गई। सियासी गलियारे में कई तरह की खिचड़ी पक रही थी।

इस बीच खरमास बीता और मकर संक्रांति का त्योहार आया। हर साल की तरह इस साल भी लालू यादव ने राबड़ी आवास में बड़े भोज का आयोजन किया। बिहार भर से उनके चाहने वालों का जुटान हुआ। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति ने आयोजन को भव्य बना दिया था।

उस साल की मकर संक्रांति की एक तस्वीर खूब वायरल हुई थी। इसमें नीतीश कुमार और लालू यादव खिलखिलाते हुए एक दूसरे को दही का टीका लगा रहे थे। तस्वीर के साथ मैसेज भी बाहर आया कि ऑल इज वेल है। और 6 महीने तक सब कुछ ठीक ठाक चलता रहा, उसके बाद सरकार बदली। मकर संक्रांति पर दही–चूड़ा भोज का ये एक उदाहरण है कि कैसे लालू ने कई बार इसी भोज के सहारे सरकारें तक पलट दीं।

लालू यादव भोज खाने आए लोगों को खुद खाना परोसते थे। (फाइल फोटो)

लालू ने शुरू किया था दही-चूड़ा भोज का रिवाज

1990 में लालू प्रसाद ने बिहार की सियासत की बागडोर अपने हाथ में ली। लालू के जमाने के जानकार बताते हैं, सीएम बनने के दो-तीन साल के बाद लालू यादव ने सीएम आवास पर दही-चूड़ा भोज के रिवाज की शुरुआत की थी। वह लगातार दो दिनों तक इसका आयोजन करते थे।

पहले दिन बड़े नेताओं को बुलाया जाता था। दूसरे दिन वे सीएम हाउस के आसपास रहने वाले झुग्गी के लोगों और अपने कार्यकर्ताओं को आमंत्रित करते थे। अपने हाथों से खाना परोसते थे। धीरे-धीरे यह बिहार के सियासत का रिवाज बन गया। सभी पार्टी के नेताओं ने इसे अपनाया।

अब मौजूदा तस्वीर समझिए

इस बार मकर संक्रांति पर पिछले एक सप्ताह में बिहार की राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने कार्यक्रम आयोजित किए, लेकिन राबड़ी आवास पर सन्नाटा पसरा रहा। मामला केवल सन्नाटे भर का नहीं रहा। तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी कहीं दही-चूड़ा पर भोज खाते नहीं दिखे।

ऐसा कई वर्षों बाद अचानक दिखा। हालांकि लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने अपने आवास पर लालू के अंदाज में दही चूड़ा भोज करने की कोशिश की। वे सफल भी रहे। बताया जाता है कि लालू यादव घर के अंदर विरोध के बावजूद तेजप्रताप के भोज में पहुंचे। लेकिन तेजस्वी निमंत्रण के बाद भी वहां नहीं गए। फिलहाल तेजप्रताप पार्टी और परिवार दोनों जगह से निष्कासित हैं।

राबड़ी देवी छठ पूजा करती थीं। इसमें पूरा लालू परिवार शामिल होता था। (फाइल फोटो)

जिस छठ के लिए ठाकरे से टकराए थे लालू, वो 5 साल से नहीं मना

2008 में मनसे नेता राज ठाकरे ने कहा था, ‘बिहार से आए लोग ‘छठ का ड्रामा’ करके मुंबई में वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।’ लालू यादव पहले नेता थे, जिन्होंने न केवल राज ठाकरे को करारा जवाब दिया, बल्कि पूरे बिहार में उनका पुतला जलवाया था। उन्होंने मुंबई में आकर छठ करने की चुनौती दी थी।

बिहार में छठ हो और लालू यादव की चर्चा न हो, ऐसा संभव नहीं था। 4 दिनों तक चलने वाले इस महापर्व पर राबड़ी आवास के भीतर एक अलग ही फिजा रहती थी। राबड़ी देवी छठ पर्व करती थीं। लालू खुद बढ़-चढ़ कर इसमें हिस्सा लेते थे। राज्य भर के नेता उनके यहां प्रसाद खाते थे।

अब मौजूदा तस्वीर समझिए

2017 में आखिरी बार राबड़ी आवास में छठ मनाई गई थी। 2018 से राबड़ी देवी अलग-अलग कारणों से छठ नहीं कर रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण लालू यादव की खराब सेहत को बताया जाता है।

पिछले एक साल में लालू फैमिली के सोशल मीडिया को खंगालने पर पता चलता है कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव छठ महापर्व पर बस एक पोस्टर जारी कर शुभकामनाएं देते रहे हैं। न वे घाट पर गए और न अर्घ्य देते, उनकी कोई तस्वीर मिलती है। हालांकि अभी तक छठ उनकी मां राबड़ी देवी ही करती रहीं हैं।

लालू यादव बड़े जोश और उमंग से होली खेलते थे। कार्यकर्ताओं को रंग लगाते और उनसे लगवाते थे। (फाइल फोटो)

चर्चित रही है लालू की कुर्ताफाड़ होली

बिहार में होली मतलब लालू यादव की होली। दही-चूड़ा की तरह होली को भी लालू यादव पूरे आनंद से मनाते थे। होली पर उनके घर के दरवाजे कार्यकर्ताओं के लिए खुले रहते थे। लालू खुद सभी को रंग लगाते, उनसे रंग लगवाते। वह अपने करीबियों का कुर्ता फाड़ने के लिए भी मशहूर थे।

अब मौजूदा स्थिति जानिए

खराब सेहत के कारण लालू यादव रंग से दूर हो गए हैं, लेकिन तेजस्वी यादव ने लालू की इस परंपरा को लगभग समाप्त कर दिया है। होली के दौरान उनकी तरफ से जारी किए गए पोस्ट को देखें तो होली के दिन उनकी एकमात्र वीडियो है, जिसमें वह अपने पिता लालू प्रसाद यादव के पैर पर गुलाल डालते दिखाई दे रहे हैं।

इसके अलावा कुछ न्यूज चैनलों की तरफ से आयोजित होली मिलन समारोह में शिरकत करते हुए दिखे हैं। इसके अलावा राबड़ी आवास में बहुत कुछ एक्टिविटी नहीं हुई है।

तेजस्वी यादव इफ्तार पार्टी में शामिल होते रहे हैं। (फाइल फोटो)

लालू की तरह इफ्तार पार्टी में जरूर शामिल हो रहे तेजस्वी

ऐसा नहीं है कि लालू केवल होली और छठ ही धूमधाम से मनाते रहे हैं। वे हर साल अपने आवास पर रमजान के महीने में भव्य इफ्तार पार्टी का भी आयोजन करते थे। तेजस्वी यादव ने इस परंपरा को बखूबी जारी रखा है।

2025 में भी राजद नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी के आवास पर लालू परिवार की तरफ से इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया था। उसमें वे शामिल हुए थे। केवल पटना ही नहीं दरभंगा, पूर्णिया व अन्य जिलों में आयोजित इफ्तार पार्टी में भी वे शरीक हुए थे।

अपने परिवार के बच्चों के साथ हैलोवीन मनाते लालू यादव। (फाइल फोटो)

पहली बार राबड़ी आवास में हैलोवीन मनाया गया

राबड़ी आवास में अभी तक अमूमन शुद्ध देसी त्योहार का जश्न मनाया जाता रहा है, लेकिन इस साल विदेशी त्योहार का भी आयोजन किया गया। 31 अक्टूबर की शाम राबड़ी आवास में हैलोवीन की धूम रही।

लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने इसका वीडियो शेयर किया था, जिसमें लालू प्रसाद अपने नाती-पोती के साथ हैलोवीन मनाते हुए दिख रहे थे। सभी उसी तरह की वेशभूषा और मास्क पहने हुए थे। इसके बाद लालू यादव की खूब आलोचना भी हुई थी।

यूरोप में क्रिसमस और न्यू ईयर मनाकर लौटे तेजस्वी

लालू प्रसाद यादव नए साल का स्वागत अपने कार्यकर्ताओं के साथ राबड़ी आवास में करते थे। अब ये प्रथा भी बदल गई। न्यू ईयर और क्रिसमस दोनों मौकों पर राबड़ी आवास के बाहर सन्नाटा पसरा रहा।

कारण तेजस्वी यादव छुट्टियां मनाने विदेश गए थे। उन्होंने अपनी पत्नी राजश्री और बच्चों के साथ यूरोप की सैर की। वहीं, न्यू ईयर का स्वागत किया और क्रिसमस मनाया।



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