Mamata Banerjee Vs EC; West Bengal SIR Voter List | BJP TMC | ममता बोलीं- EC सरकार को बिना बताए ऑब्जर्वर बना रहा: पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट से SIR में 58 लाख नाम हटाए

Mamata Banerjee Vs EC; West Bengal SIR Voter List | BJP TMC | ममता बोलीं- EC सरकार को बिना बताए ऑब्जर्वर बना रहा: पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट से SIR में 58 लाख नाम हटाए


कोलकाता3 मिनट पहले

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CM ममता सोमवार को कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में TMC के बूथ लेवल एजेंटों की बैठक में शामिल हुईं।

पश्चिम बंगाल की CM ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में गंभीर गलतियां हुई हैं। वोटरों की मैपिंग में त्रुटियां हैं। चुनाव आयोग राज्य सरकार को बताए बिना ही ऑब्जर्वर अपॉइन्ट कर रहा है। यह पूरी प्रक्रिया BJP के हित में की जा रही है।

सोमवार को कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में TMC के बूथ लेवल एजेंटों की बैठक में पहुंची ममता ने कहा कि SIR सुनवाई के लिए माइक्रो ऑब्जर्वर के तौर पर नियुक्त केंद्रीय अधिकारियों को स्थानीय भाषा (बांग्ला) का बहुत कम ज्ञान है। ऐसे अधिकारी संशोधन अभ्यास के दूसरे फेज के दौरान वेरिफिकेशन करने के लिए अयोग्य हैं।

दरअसल, चुनाव आयोग ने 19 दिसंबर को पश्चिम बंगाल में हुए SIR की नई वोटर लिस्ट जारी की। ड्राफ्ट रोल के बाद कुल मतदाता 7.08 करोड़ हैं। पहले 7.66 करोड़ थे। कुल 58 लाख 20 हजार से ज्यादा नाम काटे गए हैं।

राज्य में सुनवाई प्रक्रिया शुरू

  • नई लिस्ट जारी होने के बाद अब सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। पहले चरण में उन लगभग 30 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे जा सकते हैं, जिनके एन्यूमरेशन फॉर्म में प्रोेजेनी मैपिंग (वंशावली मिलान) दर्ज नहीं पाई गई है। इसके अलावा विभिन्न जिलों की ‘संदिग्ध’ श्रेणी में शामिल मतदाताओं को भी सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा।
  • चुनाव आयोग की जांच में सामने आया है कि कई मामलों में मतदाताओं और उनके माता-पिता या दादा-दादी के बीच उम्र का अंतर असामान्य रूप से कम है। कहीं एक ही व्यक्ति को कई मतदाताओं का पिता या दादा दिखाया गया है।
  • ऐसे मामलों को ‘संदिग्ध प्रोजेनी मैपिंग’ मानते हुए आयोग ने विशेष जांच शुरू की है। शुरुआत में ऐसे मामलों की संख्या करीब 1 करोड़ 67 लाख थी, जो प्राथमिक जांच के बाद घटकर 1 करोड़ 36 लाख रह गई है। इसी सूची से चरणबद्ध तरीके से सुनवाई के नोटिस जारी किए जाएंगे।

मुर्शिदाबाद में सबसे ज्यादा दादा-दादी/परदादा-परदादी के नाम पर संदिग्ध मैपिंग

  • चुनाव आयोग के मुताबिक मैपिंग के दौरान सीमा से सटे जिलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दादा-दादी या परदादा-परदादी के नाम पर की गई संदिग्ध मैपिंग के सबसे अधिक मामले मुर्शिदाबाद जिले में मिले हैं, जहां ऐसे मतदाताओं की संख्या 4 लाख 7 हजार 65 है।
  • दूसरे स्थान पर दक्षिण 24 परगना (3 लाख 77 हजार 910) और तीसरे स्थान पर उत्तर 24 परगना है, जहां यह संख्या 2 लाख से अधिक बताई जा रही है। ड्राफ्ट सूची से नाम हटने के मामले में भी दक्षिण 24 परगना शीर्ष पर है। यहां 8 लाख 18 हजार 432 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं।
  • आयोग के सूत्रों का कहना है कि उत्तर 24 परगना में 7 लाख 92 हजार 133 नाम हटाए गए। सिर्फ इन दो जिलों में ही अब तक 6 लाख से अधिक मृत मतदाताओं की पहचान की गई है, जबकि करीब साढ़े 4 लाख लोगों को ‘लापता’ की श्रेणी में रखा गया है।
  • उत्तर 24 परगना के नोआपाड़ा, बैरकपुर, दमदम उत्तर, खड़दह, राजारहाट, गोपालपुर और विधाननगर तथा दक्षिण 24 परगना के जादवपुर और कसबा विधानसभा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं। आयोग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में सुनवाई के लिए और भी मतदाताओं को बुलाया जा सकता है।

पहचान का एक बड़ा मानदंड उम्र का अंतर

संदिग्ध मतदाताओं की पहचान का एक बड़ा मानदंड उम्र का अंतर है। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक कई मामलों में मतदाता और उनके माता-पिता के बीच उम्र का अंतर 15 साल या उससे भी कम पाया गया है। अकेले दक्षिण 24 परगना में ऐसे 1 लाख 39 हजार 702 मतदाता चिन्हित किए गए हैं।

आयोग का मानना है कि कुछ मामलों में तकनीकी या डाटा एंट्री की गलतियां हो सकती हैं, लेकिन बड़ी संख्या में गड़बड़ी और फर्जीवाड़े की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अब सुनवाई पर सबकी नजर है।

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