SCBA Supreme Court female workers proof of periods | पीरियड्स में महिलाओं की गरिमा पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका: केंद्र से गाइडलाइंस बनाने की मांग; हरियाणा की यूनिवर्सिटी में महिला स्टाफ से सबूत मांगे थे

SCBA Supreme Court female workers proof of periods | पीरियड्स में महिलाओं की गरिमा पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका: केंद्र से गाइडलाइंस बनाने की मांग; हरियाणा की यूनिवर्सिटी में महिला स्टाफ से सबूत मांगे थे


नई दिल्ली4 घंटे पहले

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सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड प्रज्ञा बघेल के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर कहा है कि देश के कई हिस्सों में महिलाओं के पीरियड्स के समय उनकी गरिमा, शारीरिक स्वायत्तता और प्राइवेसी का उल्लंघन हो रहा है।

याचिका में हरियाणा की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (MDU) में 4 महिला कर्मचारियों से पीरियड्स का सबूत मांगने वाली समेत यूपी, महाराष्ट्र और गुजरात की घटना का जिक्र किया गया है।

SCBA ने सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि हरियाणा की घटना की जांच कराई जाए। साथ ही सरकार पूरे देश के लिए गाइडलाइन बनाई जाएं।

इनमें यह तय किया जाए कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं के अधिकारों की रक्षा कैसे की जाए, कामकाजी महिलाओं को क्या सुविधाएं मिलें, शिकायतें कहां करें और इन मामलों की निगरानी कौन करे। ताकि महिलाओं को पीरियड्स में भी इज्जत और सुरक्षा मिल सके।

दरअसल हरियाणा के रोहतक में महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (MDU) में 4 महिला कर्मचारियों से पीरियड्स का सबूत मांगा गया था। इतना ही नहीं, उनके कपड़े उतरवाकर सैनिटरी पैड की फोटो भी खिंचवाकर देखी गई। हंगामा होने के बाद आरोपी सुपरवाइजर को सस्पेंड कर दिया गया है।

महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी का मामला तब सामने आया, जब महिलाओं ने घटना के फोटो-वीडियो हरियाणा महिला आयोग को भेजे।

स्कूल-कॉलेज, ऑफिसों में महिलाओं से बुरा व्यवहार

याचिका में कहा गया है कि स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी दफ्तरों में कई बार छात्राओं-महिलाओं के साथ उनके पीरियड्स के समय बुरा व्यवहार किया जाता है। इससे उनके सम्मान और निजता के हक, जो संविधान ने दिया है, उसका हनन होता है।

ऐसे मामले संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करते हैं, जो हर व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन और प्राइवेसी का अधिकार देता है। इसमें यह भी बताया गया है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को भी साफ-सुथरा और सुरक्षित माहौल नहीं दिया जाता।

यूपी, गुजरात और महाराष्ट्र की घटनाओं का जिक्र

याचिका में 2017 का एक मामला दिया गया है, जो उत्तर प्रदेश का है। वहां करीब 70 लड़कियों को उनके पीरियड्स की जांच के बहाने कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया गया था।

इसके अलावा गुजरात (2020) और महाराष्ट्र (2025) की घटनाओं का भी जिक्र है। इन मामलों में छात्राओं को अपमानजनक तरीके से अपने कपड़े उतारने को कहा गया और पीरियड्स के सबूत दिखाकर उनकी जांच की गई।

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