Sirsa Makar Sankranti Maghi Fair Bhuman Shah Dera Sangha from Far-Flung Arrive  | सिरसा मल्लेवाला में मांघी मेला, दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचे: बाबा भूमणशाह का 278वां समागम, दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचे, लोगों ने मनाया लोहड़ी-मकर संक्राति पर्व – rania News

Sirsa Makar Sankranti Maghi Fair Bhuman Shah Dera Sangha from Far-Flung Arrive  | सिरसा मल्लेवाला में मांघी मेला, दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचे: बाबा भूमणशाह का 278वां समागम, दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचे, लोगों ने मनाया लोहड़ी-मकर संक्राति पर्व – rania News


सिरसा के मल्लेवाला में सांघी मेले पर सजाया बाबा भूमण शाह डेरा

सिरसा में आज बुधवार को परम संत बाबा भूमण शाह महाराज का 278वां मांघी मेला मनाया जा रहा है। इस मेले में दूर-दूर से श्रद्धालु बाबा भूमण शाह की समाधि पर माथा टेकने और आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। इसे लेकर बाबा भूमण शाह मल्लेवाला डेरा और संगर साधा स्थित बाब

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मेले का शुभारंभ हवन पूजा के साथ किया गया। इस दौरान डेरे के अंदर अखंड पाठ, खेल कार्यक्रम और मेडिकल कैंप भी आयोजित होंगे।

जानकारी के अनुसार, डेरा बाबा भूमण शाह मल्लेवाला (सिरसा, हरियाणा) एक प्रसिद्ध उदासी संत परंपरा का आध्यात्मिक केंद्र है। इसकी स्थापना 18वीं सदी में महान संत बाबा भूमण शाह ने की थी, जिन्होंने प्रेम, शांति और समानता का संदेश दिया।

जानिएं भूमण शाह के बारे में जानकारी

बाबा भूमण शाह ने कुतुब-कोट गांव (जो अब डेरा है) में कीर्तन और मुफ्त लंगर की परंपरा शुरू की थी। इस परंपरा को गुरु गोबिंद सिंह ने आशीर्वाद दिया था। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद, उनके अनुयायियों ने इस डेरे को भारत में स्थापित किया, जो आज भी आध्यात्मिक सेवा और सामुदायिक कल्याण के लिए जाना जाता है।

बाबा भूमण शाह का जन्म 1687 में बीहोलपुर, पाकिस्तान में हुआ था। वह एक उदासी संत थे जिन्होंने अपना जीवन ईश्वर के स्मरण और सेवा में समर्पित किया। उन्होंने प्रेम, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, सार्वभौमिक भाईचारे और धार्मिक सहिष्णुता का प्रचार किया। उनके अनुयायियों में हिंदू, सिख और मुस्लिम सभी शामिल थे।

बाबा भूमण शाह ने कुतुब-कोट (वर्तमान डेरा) में कीर्तन और निःशुल्क लंगर की प्रथा स्थायी रूप से स्थापित की थी, जिसे गुरु गोबिंद सिंह ने आशीर्वाद दिया था। उनका निधन 1762 ई. में हुआ, जिसके बाद उनके शिष्य महंत निर्मल चंद ने डेरे का कार्यभार संभाला।

भूमण शाह डेरे में पहुंची संगत

बाबा हरिनाम दास

विभाजन के बाद सिरसा में स्थापना

देश के विभाजन के बाद बाबा भूमण शाह का मूल गाव पाकिस्तान में चला गया और उनके हिंदू अनुयायियों को भारत आना पड़ा।

सिरसा में नया डेरा: उत्तरी भारत में, विशेषकर सिरसा (हरियाणा) में उनके अनुयायियों ने डेरा बाबा भूमण शाह (मल्लेवाला) को स्थापित किया, जहां उनके आदर्शों और परंपराओं को आज भी जीवित रखा जाता है।

डेरे का वर्तमान स्वरूप:- डेरा बाबा भूमण शाह आज भी शांति, एकता और आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा देने का कार्य करता है। यह विभिन्न समुदायों के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है और आध्यात्मिक सेवा के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय है।

सिरसा में लोहड़ी पर्व मनाते हुए महिलाएं व पुरुष

सिरसा में मनाया गया लोहड़ी व मकर संक्राति पर्व

इधर, लोहड़ी और मकर संक्राति पर सिरसा में अपने घरों या बाहर प्रोग्राम किए गए। सभी ने एक-दूसर के साथ मिलकर त्योहार मनाया। रात को लोहड़ी पर्व मनाया और सुबह मकर संक्राति पर आग जलाकर अलाव किया। वहीं गोबिंद कांडा ने तारा बाबा कुटिया में अपने लोगों के साथ लोहड़ी पर्व मनाया।

तारा बाबा कुटिया में लोहड़ी पर्व मनाते हुए गोबिंद कांडा

सिरसा में मंडी में लोहड़ी पर्व मनाते हुए महिलाएं



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