SP के नाम से फोन कर रुपए मांगने वाला गिरफ्तार:ऑनलाइन FIR डाउनलोड कर न्याय दिलाने का झांसा देता, भीलवाड़ा पुलिस ने UP बॉर्डर से पकड़ा

SP के नाम से फोन कर रुपए मांगने वाला गिरफ्तार:ऑनलाइन FIR डाउनलोड कर न्याय दिलाने का झांसा देता, भीलवाड़ा पुलिस ने UP बॉर्डर से पकड़ा




ऑनलाइन एफआईआर डाउनलोड कर फरियादियों और आरोपियों से ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। भीलवाड़ा पुलिस ने उत्तरप्रदेश बॉर्डर से मध्यप्रदेश के एक युवक को गिरफ्तार किया, जो खुद को एसपी भीलवाड़ा बताकर लोगों से रुपए मांगता था। फोन कर न्याय दिलाने ओर कार्रवाई रोकने का झांसा देता आरोपी ऑनलाइन एफआईआर की कॉपी डाउनलोड कर उसमें दर्ज मोबाइल नंबरों पर कॉल करता और कार्रवाई रोकने या न्याय दिलाने का झांसा देकर हजारों रुपए ऐंठने की कोशिश करता था। एफआईआर में सहयोग का भरोसा दिला पैसे मांगे मामला भीलवाड़ा के रायला थाना क्षेत्र के रामकरणजी का खेड़ा से जुड़ा है। यहां जगदीश प्रसाद चौधरी को कॉल कर आरोपी ने मांडल थाने में दर्ज एफआईआर में सहयोग का भरोसा दिलाया और पैसे मांगे। 15 फरवरी को रायला थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई, जिसके बाद पुलिस ने तकनीकी ट्रैकिंग से आरोपी को धर दबोचा। सायबर टीम ने डिजिटल ट्रेकिंग से पकड़ा एसपी धर्मेन्द्र सिंह के निर्देशन में साइबर टीम ने तकनीकी विश्लेषण, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रैकिंग के आधार पर आरोपी की लोकेशन मध्यप्रदेश- उत्तरप्रदेश बॉर्डर के पास महेबा चक्र-2, लिधौरा, जिला टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) में चिन्हित की। सायबर अपराधियों का हॉट स्पॉट निकली लोकेशन ये इलाका साइबर अपराधियों का हॉटस्पॉट माना जाता है। आरोपी खेतों और जंगलों में छिपकर वारदात करता था। टीम ने स्थानीय पुलिस चौकी जेवर व थाना चनेरा के सहयोग से दो दिन तक जंगल क्षेत्र में कैंप कर सर्च ऑपरेशन चलाते हुए आरोपी को डिटेन किया।आरोपी एमपी के जिला टीकमगढ़ में चनेरा थानांतर्गत महेबा चक्र-2, लिधौरा निवासी सतेंद्रसिंह उर्फ देशपत यादव को गिरफ्तार किया। ये रहे टीम में शामिल सायबर ठग को पकड़ने वाली टीम में विशेष भूमिका जिला साइबर टीम के इंचार्ज एएसआई आशीष कुमार, कांस्टेबल छोटू रैबारी और समरथ आचार्य के साथ ही रायला थाना प्रभारी मूलचंद वर्मा, एएसआई मुकेश कुमार और कांस्टेबल श्यामसुंदर की रही। एसपी के नाम से फोन कर धमकाता परिवादी जगदीशप्रसाद चौधरी को फर्जी कॉल होने का संदेह हुआ तो उसने कॉल करने वाले आरोपी को कहा कि एसपी साहब ही बोल रहे हैं न सर आप ।क्या नाम है सर आपका। इस पर कॉल करने वाले आरोपी ने कहा कि अपने काम से काम रखिए। नाम से कोई मतलब नहीं है। पीड़ित को शक हुआ तो टालमटोल परिवादी ने कहा कि एसपी ऑफिस कब आऊं तो ठग ने कहा कि मेरे पास समय नहीं है। चार-पांच दिन थोड़ा बिजी हूं। कॉल करुं तब आना। उसने दुबारा नाम पूछा कि ट्रू कॉलर पर आपका नाम नहीं, फ्रॉड लिखा हुआ आ रहा है। इस पर ठग ने कहा कि आपको कोई शक हो रहा है क्या? मैं कोई पर्सनल नंबर से थोड़े ही फोन करता आपको। पुलिस के नाम से रुपए मांगे तो 1930 पर कॉल करें एसपी धर्मेन्द्र सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी रोज नए तरीके अपना रहे हैं। पुलिस के नाम से आने वाले किसी भी कॉल या संदेश पर भरोसा न करें। न्याय या कार्रवाई के नाम पर किसी को भी राशि न दें, चाहे वह कोई भी बड़ा पद बताए। संदिग्ध कॉल या मैसेज मिलने पर बिना डरे तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस थाने में सूचना दें।



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