Supreme Court Issues Notice to Anil Ambani; CBI-ED Submit Sealed Report

Supreme Court Issues Notice to Anil Ambani; CBI-ED Submit Sealed Report


नई दिल्ली4 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी पर चल रहे बैंक फ्रॉड मामले में शुक्रवार को नए नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस कोर्ट में दायर की गई पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन (PIL) पर सुनवाई के बाद जारी किए गए हैं।

PIL में अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप और उसकी कंपनियों पर 1.5 लाख करोड़ रुपए बैंकिंग और कॉर्पोरेट फ्रॉड की कोर्ट मॉनिटर्ड जांच की मांग की गई है। इस पर कोर्ट ने CBI और ED से अंबानी के खिलाफ चल रही जांच पर 10 दिन में सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।

सुनवाई की 5 बड़ी बातें

  • अंबानी समूह को आखिरी चेतावनी: मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने नोट किया कि नोटिस पहले भी दिए गए थे, लेकिन अब बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि नोटिस अनिल अंबानी तक पहुंचें।
  • जांच एजेंसियों को डेडलाइन: कोर्ट ने CBI और ED को अगले 10 दिनों के भीतर अपनी जांच की ‘स्टेटस रिपोर्ट’ दाखिल करने का आदेश दिया है। यह रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दी जाएगी।
  • प्रशांत भूषण के गंभीर आरोप: याचिकाकर्ता (पूर्व आईएएस ई.ए.एस. सरमा) की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने इसे “भारत के इतिहास का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट फ्रॉड” बताया। उन्होंने दावा किया कि यह धोखाधड़ी 2007-08 से चल रही थी, लेकिन FIR केवल 2025 में दर्ज की गई।
  • बैंक अधिकारियों की मिलीभगत: भूषण ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां उन बैंक अधिकारियों की जांच नहीं कर रही हैं, जिन्होंने कथित तौर पर फंड्स को डायवर्ट करने में अनिल अंबानी ग्रुप की मदद की।
  • फंड्स की हेराफेरी: याचिका में आरोप है कि सार्वजनिक धन का व्यवस्थित रूप से दुरुपयोग किया गया और फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में हेराफेरी की गई।

बैंक फ्रॉड मामले में 10,117 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी जब्त हुई है। इसमें अनिल अंबानी का पाली हिल वाला घर भी शामिल है।

जनहित याचिका में फ्रॉड के आरोप

PIL में कहा गया कि CBI की 21 अगस्त की FIR और ED की कार्यवाही सिर्फ फ्रॉड के छोटे हिस्से को कवर करती है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने CBI और ED की तरफ से पेश होकर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का समय मांगा।

पिछली सुनवाई में बेंच ने पार्टियों से तीन हफ्ते में जवाब मांगा था। PIL को तीन हफ्ते बाद सुनवाई के लिए पोस्ट किया गया।

फंड डायवर्जन मामले में 10,117 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी जब्त

इससे पहले ED ने नवंबर में समूह के खिलाफ अब तक 10,117 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। ED के अनुसार, ताजा कार्रवाई में मुंबई के बॉलार्ड एस्टेट स्थित रिलायंस सेंटर, फिक्स डिपॉजिट (FD), बैंक बैलेंस और अनलिस्टेड निवेश सहित 18 संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की गई हैं।

इसके साथ ही रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की 7, रिलायंस पावर की 2 और रिलायंस वैल्यू सर्विसेज की 9 संपत्तियां भी फ्रीज की गई हैं। ED ने समूह की अन्य कंपनियों के FD और निवेश भी अटैच किए हैं, जिनमें रिलायंस वेंचर एसेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और फाई मैनेजमेंट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

जांच में फंड्स के गलत इस्तेमाल का खुलासा

ED ने अपनी जांच में पाया है कि रिलायंस होम फाइनेंस (RHFL) और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस (RCFL) में बड़े पैमाने पर फंड्स का गलत इस्तेमाल हुआ। 2017 से 2019 के बीच यस बैंक ने RHFL में 2,965 करोड़ और RCFL में 2,045 करोड़ का इन्वेस्टमेंट किया था।

लेकिन दिसंबर 2019 तक ये अमाउंट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) बन गए। RHFL का 1,353 करोड़ और RCFL का 1,984 करोड़ अभी तक बकाया है। कुल मिलाकर यस बैंक को 2,700 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ।

ED के मुताबिक ये फंड्स रिलायंस ग्रुप की दूसरी कंपनियों में डायवर्ट किए गए। लोन अप्रूवल प्रोसेस में भी कई गड़बड़ियां मिलीं। जैसे, कुछ लोन उसी दिन अप्लाई, अप्रूव और डिस्बर्स हो गए। फील्ड चेक और मीटिंग्स स्किप हो गईं। डॉक्यूमेंट्स ब्लैंक या डेटलेस मिले।

ED ने इसे ‘इंटेंशनल कंट्रोल फेल्योर’ बताया है। जांच PMLA की धारा 5(1) के तहत चल रही है और 31 अक्टूबर 2025 को अटैचमेंट ऑर्डर जारी हुए।

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