Supreme Court Questions Centre on Sonam Wangchuk Video Translation
नई दिल्ली18 मिनट पहले
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सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई से जुड़े मामले में सुनवाई हुई। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि उसने वांगचुक के खिलाफ जो वीडियो ट्रांसक्रिप्ट (बयान का लिखित रूप) जमा किए हैं, उनकी सही और सटीक अनुवाद क्यों नहीं दिए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि आज के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में अनुवाद कम से कम 98 प्रतिशत तक सटीक होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई कर रहा है।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी बी वराले की बेंच ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज से कहा कि उन्हें वांगचुक के भाषण का असली और सही ट्रांसक्रिप्ट चाहिए।
कुछ शब्द को वांगचुक से जोड़ा है, जो उन्होंने कभी कहे ही नहीं
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि सरकार ने जिन कुछ शब्दों को वांगचुक से जोड़ा है, वे उन्होंने कभी कहे ही नहीं। डिटेंशन ऑर्डर (नजरबंदी आदेश) में लिखा है कि वांगचुक ने हड़ताल जारी रखी और युवाओं को भड़काया तथा नेपाल का संदर्भ दिया। उन्होंने पूछा कि यह पंक्ति कहां से आई?
उन्होंने कहा कि यह एक अनोखा डिटेंशन आदेश है, जिसमें ऐसी बातों का हवाला दिया गया है जो मौजूद ही नहीं हैं।
नटराज ने कोर्ट को बताया कि ट्रांसक्रिप्ट तैयार करने के लिए एक अलग विभाग होता है और हम इस मामले में विशेषज्ञ नहीं हैं। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी।
वांगचुक की 24 बार मेडिकल जांच की गई
इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि-
- नजरबंदी के बाद से वांगचुक की 24 बार मेडिकल जांच की गई है और वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्हें हल्की पाचन संबंधी समस्या थी, जिसका इलाज चल रहा है।
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जिन आधारों पर वांगचुक को नजरबंद किया गया है, वे अभी भी बने हुए हैं, इसलिए उन्हें स्वास्थ्य के आधार पर रिहा नहीं किया जा सकता।
NSA के तहत केंद्र और राज्य सरकारें किसी व्यक्ति को देश की सुरक्षा के खिलाफ गतिविधियों को रोकने के लिए नजरबंद कर सकती हैं। इस कानून के तहत अधिकतम नजरबंदी अवधि 12 महीने है, हालांकि इसे पहले भी खत्म किया जा सकता है।
हिंसा के लिए वांगचुक को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते
गीतांजलि अंगमो ने कहा कि पिछले साल 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा के लिए किसी भी तरह से वांगचुक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने बताया कि वांगचुक ने खुद सोशल मीडिया पर हिंसा की निंदा की थी और कहा था कि इससे लद्दाख की पांच साल की शांतिपूर्ण “तपस्या” को नुकसान होगा। अंगमो ने कहा कि वह दिन उनके जीवन का सबसे दुखद दिन था।
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