The streets and colonies of the city will smell of endangered medicinal plants. | शहर की सड़कों, कॉलोनियों में महकेंगे विलुप्त होते औषधीय पौधे – Indore News
शहर का होलकर साइंस कॉलेज अब केवल डिग्री बांटने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मध्य प्रदेश के जंगलों से विलुप्त हो रही ‘हर्बल विरासत’ को बचाने का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। कॉलेज प्रबंधन और वन विभाग की पहल पर परिसर में एक विशेष नर्सरी आकार ले रही है। यहा
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दुर्लभ पौधों को बचाने इस मुहिम के तहत डीएफओ प्रदीप मिश्रा ने कॉलेज को शुरुआती 5 हजार पौधे उपलब्ध कराए हैं। पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक पीके दुबे के मार्गदर्शन और प्रो. डॉ. संजय व्यास की देखरेख में छात्र इन पौधों को ‘जीवनदान’ दे रहे हैं।
नर्सरी में तैयार होने वाले पौधों में बेल, सफेद मूसली, बीजा, गुग्गल, कैथा, गिरनार, दहीमन आदि शामिल हैं।
हॉर्टिकल्चर के छात्र बनेंगे ‘प्लांट डॉक्टर’ इस प्रोजेक्ट को हॉर्टिकल्चर विभाग के छात्रों के कौशल से जोड़ा गया है। छात्र यहां न केवल पौधे लगाएंगे, बल्कि उनकी ब्रीडिंग, ग्राफ्टिंग और सर्वाइवल रेट बढ़ाने की तकनीकी बारीकियां भी सीखेंगे। यह नर्सरी भविष्य में एक ‘बीज बैंक’ के रूप में काम करेगी।
50-50 फॉर्मूला और ‘क्योर सिटी’ का विजन नर्सरी में तैयार 50 प्रतिशत पौधे वापस वन विभाग को दिए जाएंगे ताकि उन्हें जंगलों में रोपा जा सके। शेष पौधे इंदौर की सोसायटियों, बगीचों और सड़क किनारे लगेंगे। कॉलेज में ही एक बीज बैंक भी बनाया जा रहा है।
डीएवीवी ने भी बढ़ाए कदम डीएवीवी ने भी कदम बढ़ाए हैं। कुलपति प्रो. राकेश सिंघई ने इन दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण पर एक विशेष कोर्स भी शुरू करने की घोषणा की है। नर्सरी तैयार की जा रही है।
ये ‘संजीवनी’ बचाएगी शहर की सेहत
- बीजा- इसकी लकड़ी का इस्तेमाल डायबिटीज (मधुमेह) के इलाज में होता है। गुग्गल – इसका गोंद गठिया, मोटापा और कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक है।
- गुड़मार- इसे मधुमेह का दुश्मन भी कहा जाता है। इसकी पत्तियां चबाने से मिठास का अहसास खत्म होता है।
- कलियारी- जोड़ों के दर्द और प्रसव पीड़ा कम करने वाली बेल।
- सलाई- इससे मिलने वाली गोंद वात रोग, गठिया और कैंसर की दवाओं में उपयोगी है।
- सफेद मूसली- शारीरिक ताकत और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जाती है।
पर्यावरण सुधार के साथ इलाज में भी फायदेमंद प्विलुप्त हो रहे औषधीय पौधों को बचाने के लिए हमारा उद्देश्य इंदौर शहर को क्लीन सिटी के साथ-साथ क्योर सिटी बनाना है। – डॉ. संजय व्यास, प्रोफेसर, होलकर साइंस कॉलेज

