Villagers create ruckus at Chausa coal dump yard | चौसा कोयला डंप यार्ड पर ग्रामीणों का हंगामा: धूल से परेशानी, काम रोका; समाधान तक जारी रहेगा विरोध – Buxar News
बक्सर जिले के चौसा में कोयला डंप यार्ड के पास रहने वाले ग्रामीणों का सब्र रविवार को टूट गया। सैकड़ों ग्रामीण अचानक रेल यार्ड पर पहुंचे और वहां चल रहे कोयला लोडिंग-अनलोडिंग के कार्य को पूरी तरह बंद करा दिया।
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ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले साढ़े तीन महीने से खुले में कोयला डंप और लोडिंग की जा रही है, लेकिन उड़ते हुए कोयला डस्ट पर रोक के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया। इस कारण आसपास की बस्तियां, घर, खेत-खलिहान और बगीचे लगातार काले राख जैसी धूल की चपेट में हैं।
बच्चों-बुजुर्गों की सेहत लगातार प्रभावित
ग्रामीणों के अनुसार, यह समस्या केवल धूल की नहीं, बल्कि जीवन और स्वास्थ्य के लिए खतरे की है। घरों में खाना बनाना, कपड़े सुखाना और धूप लेना तक असंभव हो गया है। सांस लेने में दिक्कत बढ़ रही है और बच्चों-बुजुर्गों की सेहत लगातार प्रभावित हो रही है।
अखौरीपुर गोला निवासी और डॉक्टर विनोद सिंह ने बताया कि जहां कोयला डंप होता है, वहां से उनका घर और अस्पताल महज 50 फीट की दूरी पर है। उन्होंने कहा कि वे 80 प्रतिशत प्रदूषण के बीच जी रहे हैं। नगर पंचायत का क्षेत्र होने के बावजूद न स्प्रिंकलिंग की सही व्यवस्था है, न कोई रोकथाम। अधिकारी केवल आश्वासन देते रहे, इसलिए ग्रामीण काम बंद कराने को मजबूर हुए हैं।
शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं
नारायणपुर निवासी राकेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि लगातार शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि दरवाजे पर बैठे रहें तो कपड़े काले हो जाते हैं, खाना बनाएं तो राख जैसे कण मिलते हैं। रिश्तेदार भी अब आने से कतराने लगे हैं। घर की दीवार से छू जाएं तो नए कपड़े तक काले हो जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं किया जाता, तब तक काम दोबारा शुरू नहीं होने दिया जाएगा।
अधिकारियों ने दिया आश्वासन
ग्रामीणों के विरोध की सूचना पर थर्मल पावर प्लांट के सुरक्षा कर्मी और अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रगति इंडियंस रोड लाइन के इंचार्ज रवि कांत मिश्रा ने बताया “पहले छोटे टैंकर से स्प्रिंकलिंग कराई जा रही थी, मगर उसका असर नहीं दिखा। अब बड़े टैंकर मंगाए गए हैं, जिससे नियमित पानी का छिड़काव कर डस्ट समस्या कम करने का प्रयास किया जाएगा।”
अधिकारी ग्रामीणों को समझाकर स्थिति नियंत्रण में लाने का प्रयास कर रहे हैं। थर्मल पावर परियोजना का संदर्भ चौसा में एसजेवीएन द्वारा 1,320 मेगावॉट का सुपरक्रिटिकल तकनीक वाला बक्सर थर्मल पावर प्लांट विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना से बिहार की बिजली जरूरतों को पूरा करने की योजना है।
ट्रकों के जरिए पहुंचाया जाता था प्लांट
फिलहाल कोयला हजारीबाग से ट्रेनों द्वारा रेल यार्ड तक लाया जाता है और वहीं से ट्रकों के जरिए प्लांट पहुंचाया जाता है। लेकिन इसी प्रक्रिया से उठ रहे कोयला डस्ट से खिलाफतपुर, नारायणपुर, अखौरीपुर गोला, कनक नारायणपुर और बनारपुर गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
ग्रामीणों की साफ चेतावनी“हमारी सांस सुरक्षित नहीं… तो काम भी नहीं होगा!” ग्रामीणों का संघर्ष केवल सुविधा का नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है। अब प्रशासन और कंपनी पर यह जिम्मेदारी है कि जल्द और प्रभावी कदम उठाकर लोगों के जीवन पर मंडरा रहे प्रदूषण के खतरे को खत्म करे। बांकी, ग्रामीणों का आंदोलन अब रुकने वाला नहीं दिख रहा।

