एआई डिटेक्शन टूल ‘पैंग्राम’ के यूजर 44 गुना बढ़े:स्टैनफर्ड के दो दोस्तों ने गूगल-टेस्ला छोड़ी, बनाया अनोखा टूल

एआई डिटेक्शन टूल ‘पैंग्राम’ के यूजर 44 गुना बढ़े:स्टैनफर्ड के दो दोस्तों ने गूगल-टेस्ला छोड़ी, बनाया अनोखा टूल




इंटरनेट पर लगभग 50% ब्लॉग और न्यूज एआई जनरेटेड हैं, रिसर्च एजेंसी ग्रेफाइट के अनुसार इस कंटेंट को पहचानना बड़ी चुनौती है। चैटजीपीटी जैसे चैटबॉट लॉन्च होने के बाद इस तरह का कंटेंट बेतहाशा बढ़ा है। ओपनएआई जैसे दिग्गजों के टेक डिटेक्शन टूल फ्लॉप होने के बाद स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ चुके दो दोस्त मैक्स स्पैरो और ब्रैडली एमी ने ‘पैंग्राम’ की नींव रखी। दावा है कि एआई जनरेटेड कंटेट पकड़ने में टूल पैंग्राम की सटीकता 99.99% है। सालभर में इसके एक्टिव यूजर 44 गुना और कमाई 35 गुना बढ़ गई है। कैसे हुआ ये चमत्कार, जानिए… मैक्स और ब्रैडली की जुगलबंदी स्टैनफर्ड से ही मजबूत रही है। यूनिवर्सिटी की एआई लैब में दिन-रात रिसर्च करते थे और थक जाते तो पोकर खेलने लगते थे। पढ़ाई के बाद मैक्स ने गूगल और ब्रैडली ने टेस्ला जॉइन कर ली। उन्होंने एआई शोधकर्ता आंद्रेज करपथी के साथ काम किया। चैटजीपीटी के आते ही इंटरनेट का स्वरूप बदल गया। फर्जी आर्टिकल्स, एआई से लिखे ब्लॉग्स व बॉट्स की बाढ़ आने लगी। उस समय टेक जगत में धारणा बन रही थी कि एआई जनरेटेड कंटेंट को पकड़ना लगभग असंभव है। यहां तक कि ओपनएआई ने भी अपना डिटेक्टर टूल असफल होने के बाद बंद कर दिया था। बस यही ‘टर्निंग पॉइंट’ था। जहां पूरी दुनिया ने हथियार डाल दिए थे, वहीं इन दोनों दोस्तों को मौका दिखाई दिया। उन्हें भरोसा था कि अगर सही डेटा और मजबूत मॉडल पर काम किया जाए, तो सटीक डिटेक्शन टूल बनाया जा सकता है… तभी पैंग्राम ने आकार लिया। दोनों ने एआई टेक्स्ट से अपना मॉडल ऐसा तराशा कि यह टूल सटीकता के साथ असली और नकली कंटेंट का फर्क बता देता है। मैक्स खुद को ‘इंटरनेट का स्लोप जनिटर’ (कचरा उठाने वाला) कहते हैं। 75 करोड़ की फंडिंग ‘पैंग्राम’ का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। सालभर में एक्टिव यूजर 2,700 से बढ़कर 1.2 लाख हो गए हैं। कोरा से लेकर सबस्टैक जैसे प्लेटफॉर्म्स ने ‘पैंग्राम’ से हाथ मिलाया है। सिलिकॉन वैली की दिग्गज वैंचर कैपिटल फर्म मेल्नो वेंचर्स से इसे 75 करोड़ रु. की फंडिंग मिली है। जल्द ही वे एआई इमेज व वीडियो को पकड़ने वाले टूल्स भी लॉन्च कर रहे हैं। दोनों कहते हैं- ‘चुनौती बड़ी है… इंसान व एआई मिलकर लिखते हैं, तो टूल कभी-कभी चकमा खा जाता है। पर हमारी कोशिश है डिजिटल दुनिया में सच को बचाए रखना… ताकि जब कुछ पढ़ें, तो आपको पता हो कि उसके पीछे इंसानी दिल धड़क रहा है, कोई बेजान कोड नहीं।’



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