करैरा की मुंगावली पंचायत में आदिवासी बदहाली उजागर:झोपड़ियों में रहने को मजबूर परिवार, आवास-पेंशन में लापरवाही व रिश्वत के आरोप

करैरा की मुंगावली पंचायत में आदिवासी बदहाली उजागर:झोपड़ियों में रहने को मजबूर परिवार, आवास-पेंशन में लापरवाही व रिश्वत के आरोप




शिवपुरी जिले की करैरा जनपद अंतर्गत मुंगावली पंचायत में आदिवासी परिवारों की बदहाल स्थिति सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठा रही है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा जनमन और आवास जैसी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आदिवासियों को आवास और मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने के दावों के बावजूद, पंचायत स्तर पर लापरवाही और कथित रिश्वतखोरी इन परिवारों के विकास में बाधा बन रही है। मुंगावली गांव में लगभग 50 आदिवासी परिवार आज भी झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। इन परिवारों के पास न तो पक्के मकान हैं और न ही शौचालय। महिलाएं नहाने के लिए साड़ियों से बने अस्थायी इंतजामों का सहारा लेती हैं, जबकि शौच के लिए उन्हें गांव से बाहर जाना पड़ता है। गांव की आदिवासी बस्ती में केवल दो हैंडपंप हैं, जिनके आसपास गंदा पानी जमा रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें मजबूरी में प्रदूषित पानी का उपयोग करना पड़ रहा है, जिससे बीमारियों का खतरा बना हुआ है। दो साल चक्कर काटे, पीएम आवास नहीं मिला
आदिवासी महिला पूनम ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ पाने के लिए पंचायत और अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन अब तक उनका नाम सूची में शामिल नहीं किया गया है। वर्षों से झोपड़ी में रह रहीं पूनम को आज भी पक्के मकान का इंतजार है। इसी तरह, बुजुर्ग साबो आदिवासी को न तो आवास योजना का लाभ मिला है और न ही वृद्धा पेंशन। उन्होंने कई बार पंचायत सचिव से संपर्क किया, लेकिन हर बार उन्हें टाल दिया गया। बुजुर्ग नारायण जू आदिवासी ने आरोप लगाया कि एक वर्ष पहले उनकी वृद्धा पेंशन चालू कराने के नाम पर पंचायत सचिव ने 500 रुपये लिए थे, लेकिन आज तक पेंशन शुरू नहीं हुई। आवास योजना के लिए भी उनसे पैसों की मांग की गई थी, जिसे वे नहीं दे सके, जिसके कारण उन्हें योजना से वंचित कर दिया गया। सचिव बोले- कुछ परिवार ही शेष
मामले में पंचायत सचिव गोवर्धन रजक का कहना है कि गांव में कई आदिवासी परिवारों को कुटीर उपलब्ध कराई जा चुकी है, जबकि कुछ परिवार अभी शेष हैं, जिन्हें जल्द ही आवास और वृद्धा पेंशन का लाभ मिलेगा। रिश्वत के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने बताया कि नारायण जू आदिवासी का नाम पेंशन योजना में तकनीकी अंतराल के कारण नहीं जुड़ पाया था। वहीं, आवास योजना के संदर्भ में उन्होंने कहा कि उस समय लाभार्थी के परिवार में शादी होने के कारण नाम नहीं जोड़ा जा सका, लेकिन आगामी सूची में नाम शामिल कर दिया जाएगा।



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