किताबों को लेकर सरकारी आदेश का विरोध:प्राइवेट स्कूल वाले बोले- सरकार कर रही जबरदस्ती, आदेश वापस लेने की मांग

किताबों को लेकर सरकारी आदेश का विरोध:प्राइवेट स्कूल वाले बोले- सरकार कर रही जबरदस्ती, आदेश वापस लेने की मांग




छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली किताबों को लेकर विवाद शुरू हो गया है। राज्य के मुख्य सचिव ने 24 अप्रैल 2026 को आदेश जारी कर CBSE स्कूलों में NCERT और राज्य बोर्ड से जुड़े निजी स्कूलों में SCERT की किताबें अनिवार्य करने के निर्देश दिए हैं। इस पर निजी स्कूल प्रबंधन ने आपत्ति जताई है। निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि, इस तरह जबरदस्ती एक ही तरह की किताबें लागू करना सही नहीं है। उनका कहना है कि स्कूलों को अपनी जरूरत और बच्चों के स्तर के हिसाब से किताबें चुनने का अधिकार होना चाहिए। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ बताया स्कूल प्रबंधन ने कहा कि, यह फैसला हाईकोर्ट के पहले दिए गए आदेशों के खिलाफ है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने 2025 में ऐसे कई आदेश रद्द कर दिए थे, जिनमें सरकारी किताबों को अनिवार्य किया गया था। समय पर नहीं मिली किताबें, पढ़ाई पर असर निजी स्कूलों का कहना है कि, इस सत्र में सरकारी किताबें काफी देर से मिलीं। कई जगह जुलाई के आखिर तक किताबें पहुंचीं, जिससे डेढ़ महीने तक बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई। ऐसे में स्कूलों को बाजार में मिलने वाली किताबों से पढ़ाना पड़ा। कई जरूरी किताबें अब तक नहीं मिलीं स्कूल संचालकों ने बताया कि कुछ विषयों की किताबें अभी तक उपलब्ध नहीं हैं। जैसे कक्षा 5 और 8 की कुछ किताबें समय पर नहीं मिल पाईं, जिससे परेशानी बढ़ी। पुराना सिलेबस भी चिंता की वजह निजी स्कूलों का कहना है कि कुछ कक्षाओं की सरकारी किताबों का सिलेबस कई सालों से नहीं बदला है। ऐसे में बच्चों को नई और बेहतर जानकारी देना मुश्किल हो जाता है। कई विषयों की किताबें सरकार नहीं देती स्कूलों के अनुसार, EVS, GK, वैल्यू एजुकेशन, कंप्यूटर, इंग्लिश ग्रामर और हिंदी व्याकरण जैसी किताबें सरकार नहीं देती। साथ ही नर्सरी और KG की कक्षाओं के लिए भी कोई सरकारी किताब उपलब्ध नहीं है। आदेश वापस लेने की मांग निजी स्कूल प्रबंधन ने मुख्य सचिव से मांग की है कि 24 अप्रैल 2026 का आदेश वापस लिया जाए। साथ ही पूरे प्रदेश के निजी स्कूलों के लिए किताबों को लेकर साफ और आसान नियम बनाए जाएं, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

India Fontline News

Subscribe Our NewsLetter!