कोंडागांव वनमंडल में तेंदूपत्ता संग्रहण शुरू:245 फड़ों पर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से होगा कार्य
कोंडागांव वनमंडल में तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य जोर-शोर से शुरू हो गया है। वन विभाग इसे ‘हरा सोना’ बताते हुए इसके संरक्षण और संग्रहण के लिए विशेष अभियान चला रहा है। वनमंडलाधिकारी चूड़ामणि सिंह ने बताया कि जिले की 13 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से लगभग 245 फड़ों पर 20 से 25 अप्रैल तक तेंदूपत्ता संग्रहण किया जाएगा। इसकी दर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा निर्धारित की गई है। इस कार्य से लगभग 30 हजार ग्रामीण परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। विभाग विभिन्न योजनाओं के जरिए संग्राहक परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर भी काम कर रहा है। वर्ष 2025 से चरण पादुका वितरण योजना भी लागू की गई है, जिससे संग्राहकों को राहत मिल रही है। संग्रहण बढ़ाकर अधिक आय करने का लक्ष्य वन विभाग के अनुसार, तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए 245 केंद्रों पर पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती की गई है, जिसमें वन विभाग और अन्य विभागों के कर्मी शामिल हैं। पिछले साल जिले में 12,813 मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण हुआ था, जिसके लिए संग्राहकों को करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया था। इस वर्ष संग्रहण को बढ़ाकर अधिक आय सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। संग्राहकों के हित में बीमा और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं। सामान्य मृत्यु पर 2 लाख रुपये, दुर्घटना मृत्यु पर 4 लाख रुपये और आंशिक या स्थायी विकलांगता की स्थिति में भी आर्थिक सहायता का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, संघ द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत 12 हजार रुपये तक की सहायता दी जाती है। संग्राहक परिवारों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं भी लागू हैं। इनमें मेधावी छात्रों को पुरस्कार, शिक्षा प्रोत्साहन और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए आर्थिक सहायता शामिल है। तेंदूपत्ता संग्रहण ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ वन विभाग का कहना है कि तेंदूपत्ता संग्रहण केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। विभाग ने संग्राहकों से अपील की है कि वे निर्धारित मानकों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण तेंदूपत्ता का संग्रहण करें, जिससे उन्हें अधिक लाभ मिल सके और वन संपदा का संरक्षण भी सुनिश्चित हो।
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