गड्ढा खोदने आए तो जिंदा गाड़ देंगे:मारपीट के बाद गैस कंपनी के कर्मचारी का चेहरा सूजा, खुल नहीं रहा जबड़ा; पुलिस की FIR पर सवाल, आरोपी अज्ञात कैसे?
इंदौर के शीतल नगर में खुले गड्ढे को बंद करने पहुंची अवंतिका गैस लिमिटेड की टीम के साथ मारपीट के मामले में अब कर्मचारियों की चोट और धमकी के आरोप सामने आए हैं। कंपनी का दावा है कि 14 अगस्त की रात पार्षद बालमुकुंद सोनी और उनके साथियों ने कर्मचारियों के साथ मारपीट की। घटना में कर्मचारी मनोज का चेहरा पूरी तरह सूज गया है और उसका जबड़ा तक नहीं खुल पा रहा, जबकि दूसरे कर्मचारी खंटूस भी घटना के बाद से डरा हुआ है। कंपनी के सुपरवाइजर अर्जुन गुर्जर का कहना है कि 14 अगस्त की रात टीम को शीतल नगर में खुले गड्ढे को बंद करने के लिए भेजा गया था। टीम मौके पर पहुंची और कर्मचारियों ने गड्ढा बंद करने का काम शुरू किया। इसी दौरान पार्षद बालमुकुंद सोनी और उनके तीन साथी वहां पहुंचे और काम करने को लेकर विवाद शुरू हो गया। इस दौरान पहले कर्मचारी मनोज और खंटूस को गाली दी गई। इसके बाद कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। साथ ही धमकी दी कि अब अगर गड्ढा खोदने आए तो वहीं गाड़ देंगे। अर्जुन का कहना है कि घटना के दौरान 100 नंबर पर पुलिस को फोन किया, लेकिन मौके पर पुलिस नहीं पहुंची। बाद में मारपीट करने वाले लोग वहां से चले गए। जाते समय भी कर्मचारियों को धमकी दी गई कि यदि उनकी गाड़ी दोबारा क्षेत्र में दिखाई दी तो उसमें आग लगा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि धमकी देने वाले लोगों में से कुछ को वे पहचानते नहीं हैं। पुलिस में शिकायत दी, लेकिन नाम दर्ज नहीं
अर्जुन ने बताया कि घटना के बाद पुलिस में शिकायत की गई है। सुबह पूछने पर उन्होंने बताया कि शिकायत में आरोपियों के नाम दर्ज नहीं किए गए हैं और रिपोर्ट अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज हुई है। घटना के दौरान मौजूद कर्मचारियों से भी पुलिस ने जानकारी ली है। मारपीट के बाद डरे-सहमे कर्मचारी, बिना सुरक्षा के कैसे काम करे
कंपनी के मुताबिक घटना में वाहन प्रभारी, कर्मचारी मनोज और खंटूस के चेहरे काफी सूज गए हैं। मनोज का तो जबड़ा ही नहीं खुल रहा है। सभी कर्मचारी डरे-सहमे हैं कि बिना सुरक्षा के कैसे काम करें। घटना के बाद कर्मचारियों में इतना डर है कि वे क्षेत्र में काम करने जाने को लेकर भी आशंकित हैं। कर्मचारियों का आरोप- धमकी दी गई
कंपनी के अनुसार कर्मचारियों को सिर्फ मारपीट ही नहीं, बल्कि दोबारा काम करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई। कंपनी का यह भी आरोप है कि कर्मचारियों को यह धमकी दी गई कि अवंतिका गैस की गाड़ी दोबारा एरिया में आई तो गाड़ी में आग लगा देंगे। कंपनी के पास अनुमति, फिर भी काम रोकने का आरोप
अवंतिका गैस का कहना है कि संबंधित पाइपलाइन कार्य के लिए उसके पास नगर निगम की अनुमति है। कंपनी के मुताबिक बारिश के मौसम में गैस पाइपलाइन के कुछ हिस्सों में लीकेज की आशंका को देखते हुए जरूरी काम किया जा रहा है। कंपनी का कहना है कि नई तकनीक के जरिए प्रभावित हिस्से में वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जा रही है, ताकि गैस सप्लाई बाधित न हो और किसी तरह की दुर्घटना का खतरा भी न रहे। काम रुका तो भविष्य में बढ़ सकती है परेशानी
कंपनी के अनुसार यदि लीकेज की आशंका वाले हिस्सों पर समय रहते काम नहीं हुआ तो भविष्य में गैस सप्लाई में बाधा, लीकेज या सुरक्षा संबंधी समस्या खड़ी हो सकती है। कंपनी का कहना है कि उसका काम उपभोक्ताओं की सुविधा और सुरक्षा से जुड़ा है। 8 दिन पहले भी रुकवाया गया था काम
कंपनी के अनुसार 14 अगस्त की रात टीम को सिर्फ खुले गड्ढे को बंद करने के लिए भेजा गया था। कंपनी का कहना है कि अगले दिन स्वतंत्रता दिवस के कारण क्षेत्र में भीड़ और यातायात बढ़ने की संभावना थी। पार्षद सोनी बोले सारे आरोप निराधार
पार्षद बालमुकुंद सोनी ने मारपीट के आरोपों से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि करीब 15 दिन पहले रेडिसन होटल के पास अवंतिका गैस कंपनी खुदाई कर रही थी। उन्होंने कर्मचारियों को वहां से नर्मदा पाइपलाइन गुजरने की जानकारी देकर खुदाई से मना किया था। अगले दिन वहां पहुंचे तो खुदाई के कारण नर्मदा पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। इससे करीब 700 परिवारों को दो दिन पानी नहीं मिला। सोनी का कहना है कि उन्होंने इन परिवारों के लिए टैंकरों से पानी उपलब्ध कराया। उनका दावा है कि 14 अगस्त की रात क्षेत्र में कंपनी के लोगों के पहुंचने की सूचना मिलने पर उन्होंने पुलिस को सूचना दी और कर्मचारियों को समझाया कि वहां खुदाई न करें। बाद में वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से चर्चा के बाद उन्हें काम रोकने की सलाह दी गई। पार्षद का कहना है कि उन्होंने या उनके साथियों ने किसी कर्मचारी के साथ मारपीट नहीं की। पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
मामले में अब पुलिस की भूमिका भी चर्चा में है। कंपनी का दावा है कि उसने घटना के बाद पुलिस को लिखित आवेदन दिया था, जिसमें मारपीट और धमकी के संबंध में नाम भी बताए गए थे। कंपनी का आरोप है कि पुलिस ने यह आवेदन लेने के बजाय अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया। ऐसे में सवाल यह है कि घटना के दौरान मौजूद बताए गए लोगों के नाम दिए गए थे, तो FIR में आरोपियों को अज्ञात क्यों रखा गया? पुलिस से जुड़े ये सवाल अहम विवाद अब सिर्फ गड्ढे का नहीं, गैस सुरक्षा का भी
घटनाक्रम में विवाद अब सिर्फ एक गड्ढे को बंद करने या पाइपलाइन की खुदाई तक सीमित नहीं दिखाई देता। कंपनी का कहना है कि वह बारिश के दौरान लीकेज की आशंका वाले हिस्सों पर सुरक्षा और वैकल्पिक व्यवस्था का काम कर रही है। ऐसे में यदि अनुमति प्राप्त काम लगातार रुकता है तो इसका असर भविष्य में गैस आपूर्ति और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। दूसरी ओर पार्षद का तर्क है कि जिस स्थान पर काम किया जा रहा है, वहां पहले नर्मदा पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से सैकड़ों परिवारों को परेशानी उठानी पड़ी थी। अब इस विवाद में पुलिस की निष्पक्ष जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि मारपीट किसने की, कर्मचारियों को धमकी दी गई या नहीं, पाइपलाइन का काम वैध अनुमति से हो रहा था या नहीं और काम रोकने की वास्तविक वजह क्या थी, इन सभी सवालों का जवाब जांच से ही सामने आएगा। घटना की टाइमलाइन
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