चंडीगढ़ निगम घपले में ईडी की एंट्री:116 करोड़ के मामले को हरियाणा के 590 करोड़ केस में जोड़ा, 200 करोड़ के लेन-देन की जांच

चंडीगढ़ निगम घपले में ईडी की एंट्री:116 करोड़ के मामले को हरियाणा के 590 करोड़ केस में जोड़ा, 200 करोड़ के लेन-देन की जांच




चंडीगढ़ नगर निगम में स्मार्ट सिटी फंड से जुड़े लगभग 116.84 करोड़ रुपए के घोटाले में अब Enforcement Directorate (ईडी) भी जांच करेगी। ईडी ने इस मामले को हरियाणा के 590 करोड़ रुपए के घोटाले से जोड़ते हुए अपनी ईसीआईआर (ECIR) में मर्ज कर लिया है। अब दोनों मामलों की जांच एक साथ की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, इस केस में रिभव ऋषि, उसके साथियों और विक्रम वधावा समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। ईडी ने इस मामले में कार्रवाई तेज करते हुए छापेमारी भी शुरू कर दी है। ईडी की कई जगहों पर रेड हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और अन्य सरकारी खातों से जुड़े करीब 597 करोड़ रुपए के IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED की चंडीगढ़ जोनल ऑफिस टीम ने 12 मार्च को चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला, गुरुग्राम और बेंगलुरु में 19 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच में सामने आया है कि सरकारी धन को बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में रखने की बजाय आरोपियों ने बिना अनुमति के इन पैसों को अलग-अलग खातों और फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया। 200 करोड़ के लेन-देन की जांच सूत्रों के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि सेक्टर-35 के सावन ज्वैलर्स से जुड़े मामले में 200 करोड़ रुपए से ज्यादा की खरीद-फरोख्त हुई है, जिसका पूरा रिकॉर्ड नहीं मिल पाया है। इस लेन-देन की भी जांच की जा रही है। इस मामले में पुलिस एक महिला राधिका की तलाश कर रही है। आशंका है कि सरकारी पैसों से खरीदे गए सोने के सिक्के उसके पास हो सकते हैं। साथ ही उसके नाम पर शेल कंपनी होने की जानकारी भी सामने आई है। अफसरों से भी होगी पूछताछ इस केस में हरियाणा पुलिस का विजिलेंस विभाग जल्द चंडीगढ़ के कुछ अधिकारियों से भी पूछताछ कर सकता है। जांच में सामने आया है कि सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी बैंक के मैनेजर रिभव ऋषि के कुछ अधिकारियों से करीबी संबंध थे। पूछताछ में रिभव ऋषि ने यह भी बताया कि उसने किन-किन अधिकारियों को फायदे के बदले गिफ्ट दिए। हालांकि उसने यह दावा किया है कि नकली एफडी के बारे में संबंधित अधिकारियों को जानकारी नहीं थी। सोना खरीद के नाम पर घुमाया गया पैसा जांच में पता चला कि आरोपियों ने पहले स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स नाम की शेल कंपनी बनाई और सरकारी धन को उसमें ट्रांसफर किया। इसके बाद इस पैसे को ज्वैलर्स के बैंक खातों के जरिए घुमाया गया और फर्जी बिल बनाकर सोना खरीदने का दिखावा किया गया। ED के मुताबिक यह घोटाला पिछले करीब एक साल से चल रहा था और इसमें बैंक के पूर्व कर्मचारियों की मदद ली गई। रिभव ऋषि ने जून 2025 में बैंक से इस्तीफा दे दिया था। होटल कारोबारी और बिल्डर की भी जांच जांच में यह भी सामने आया कि मोहाली के होटल कारोबारी और रियल एस्टेट डेवलपर विक्रम वाधवा के खातों में भी इस घोटाले का पैसा पहुंचा। बाद में यह रकम प्रिज्मा रेजिडेंसी LLP, किनस्पायर रियल्टी LLP और मार्टेल बिल्डवेल LLP जैसी कंपनियों में ट्रांसफर की गई। छापेमारी के दौरान विक्रम वाधवा नहीं मिला और वह फिलहाल फरार बताया जा रहा है। 90 से ज्यादा बैंक खाते फ्रीज ईडी की टीम ने छापेमारी के दौरान 90 से ज्यादा बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। साथ ही डिजिटल और दस्तावेजी सबूत भी जब्त किए गए हैं। ईडी के अनुसार इस मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और खुलासे हो सकते हैं।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

India Fontline News

Subscribe Our NewsLetter!