टैक्स वसूलने में पिछड़े, तर्क- दूसरी ड्यूटी व हड़ताल से फुर्सत नहीं मिली
भास्कर न्यूज| महासमुंद टैक्स वसूलने में महासमुंद नगर पालिका बुरी तरह पिछड़ गई है। लक्ष्य के मुकाबले आधी भी वसूली नहीं हो पाई है। कई बकायादार नोटिस के बाद भी राशि जमा नहीं कर रहे हैं। इनमें ऐसे 420 अफसर-कर्मचारी भी बकायादार हैं, जिनका बकाया 10 साल से पंेडिंग है।
सीएमओ अशोक सलामे का कहना है, बकाया बढ़ने का बड़ा कारण पूर्व के कर्मचारियों की लापरवाही है। 8 साल पहले जिन लोगों ने नल कनेक्शन काटने के आवेदन दिए थे, उनके कनेक्शन तो काट दिए गए लेकिन सरकारी रिकॉर्ड से नाम नहीं हटा। नतीजा यह हुआ कि बकाया जुड़ता गया। अधिकारी ये भी कहते हैं कि, मतदाता सूची के काम व हड़ताल के कारण भी टैक्स वसूली बाधित हुई। अब तीन साल तक बकाया जमा नहीं करने वालों को चिह्नांकित कर नोटिस भेज रहे हैं। नगर पालिका को वित्तीय वर्ष 25-26 और पिछले साल की संपत्तिकर, समेकित कर, जलकर, यूजर चार्जेस समेत अन्य कर मिलाकर कुल 9 करोड़ 12 लाख 99 हजार रुपए वसूलना था। लेकिन अभी तक सिर्फ 2 करोड़ 55 लाख 66 हजार रुपए (करीब 28 फीसदी) वसूली ही हो पाई है। अभी 6 करोड़ 57 लाख 33 हजार रुपए की वसूली बाकी है। 31 मार्च को अंतिम तिथि है। अब सिर्फ 10 दिन ही शेष रह गए हैं। 420 अफसर-कर्मचारी भी बकायादार, 48 लाख रुपए बकाया: हैरानी की बात यह है कि आम जनता को नसीहत देने वाले सरकारी विभाग में खुद बड़े बकायादार हैं। शहर के 420 सरकारी कर्मचारी-अधिकारी ने टैक्स नहीं पटाया है। इनमें, एसडीएम, तहसीलदार और कृषि विभाग के अफसर शामिल हैं।10 साल से उन्होंने नल जल का टैक्स जमा नहीं किया है। विवरण टैक्स वसूली संपत्ति कर 124.01 करोड़ 39.89 लाख समेकित कर 114.46 करोड़ 26.94 लाख जलकर 4.41 करोड़ 73.40 लाख दुकानों का किराया 21.86 लाख 9.64 लाख गुडरुपारा पहुंच मार्ग की उखड़ी सड़क 1 साल बाद भी नहीं सुधरी। सीएमओ का कहना है, कर्मचारियों की ड्यूटी मतदाता सूची कार्य में लगी थी। कई बार कर्मी हड़ताल पर चले गए थे। इसके चलते भी काम प्रभावित हुआ। कर्मचारी की कमी रहती थी। लंबे समय से टैक्स जमा नहीं करने वालों के नाम डिमांड बनाकर भेजा जा रहा है। दशा ये है कि अब टैक्स की राशि वसूलने के लिए अब अवकाश के दिन भी दफ्तर खोल रहे हैं। पिछले साल का 4 करोड़ रुपए बकाया वसूलने नोटिस दिया था लेकिन बकायादारों ने राशि जमा नहीं की। इसका असर विकास कार्यों पर पड़ रहा है। फंड नहीं होने पर कई काम अधूरे हैं। सड़कों की मरम्मत व अन्य कई काम शुरू नहीं हो पाए हैं।
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