दिनकर की कविताओं से सजा मंच:118वीं जयंती समारोह में नाटक के साथ राष्ट्रीय संगोष्ठी, 12 दिवसीय समारोह का समापन
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 118वीं जयंती पर दिनकर स्मृति विकास समिति की ओर से आयोजित 12 दिवसीय समारोह का आज समापन हो गया। समारोह के अंतिम दिन दिनकर पुस्तकालय सिमरिया के दिनकर स्मृति सभागार में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए। दिनकर की कविताओं पर आधारित नाटक का मंचन अंतरराष्ट्रीय रंग निर्देशक प्रवण मुखर्जी के निर्देशन में सनबीम स्कूल वाराणसी के कलाकारों ने किया। इसके बाद ‘दिनकर और हमारा समय विषय’ पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, स्मारिका समर शेष है- 14, जीवन का लक्ष्य पुस्तक का विमोचन और राष्ट्रकवि दिनकर सृजनात्मक प्रतियोगिता के सफल प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। संगोष्ठी में अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. कमलानंद झा, जामिया मिलिया इस्लामिया नई दिल्ली में उर्दू विभाग के प्रो. सरवरूल हुदा, लेखक अभय कुमार ठाकुर और आरसीएस कॉलेज के प्राचार्य प्रो. कमलेश कुमार ने विचार रखे। युद्ध के समय में दिनकर की चिंतन को समझने की जरूरत है अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. कमलानंद झा ने कहा कि दिनकर के राष्ट्रवाद के केंद्र में मनुष्य, दलित, मजदूर और किसान हैं। आज पूरी दुनियां युद्ध में जल रही है और तीसरा विश्वयुद्ध के कगार पर है। युद्ध के समय में दिनकर की चिंतन को समझने की जरूरत है। वे युद्ध के घोर विरोधी थे। दिनकर युद्ध के नहीं, युद्ध के पश्चाताप के कवि हैं, दिनकर युद्ध के नहीं युद्ध के बाद सवालात के कवि हैं। दिनकर की रचनाओं से पूरा गांव भरा पड़ा है। उर्वशी उनकी अद्भुत रचना है। दिनकर के हुंकार में आम जनता का हाहाकार सुनाई देती है। दिनकर का राष्ट्रवाद आज का राष्ट्रवाद नहीं है। दिनकर के राष्ट्रवाद का केंद्र मनुष्य हैं। दिनकर उत्तर के कवि नहीं, दिनकर सवालों के कवि हैं। दिनकर की रचनाओं से लगातार संवाद करने की जरूरत है जामिया मिलिया इस्लामिया नई दिल्ली उर्दू विभाग के प्रो. सरवरूल हुदा ने कहा कि दिनकर और नेहरू के समय के जैसे अब साहित्यकार-राजनीतिक की सुंदरता समाप्त हो रही है। प्रख्यात लेखक अभय कुमार ठाकुर ने कहा कि समय-व्यक्ति का संवाद ही दिनकर की रचना है। दिनकर की चिंतन की भूमिका की समझने की जरूरत है। हमें दिनकर की रचनाओं से लगातार संवाद करने की जरूरत है। आज दिनकर की रचना पर गंभीरतापूर्वक बात करने की जरूरत है। बिहार सरकार की ओर से बेगूसराय में दिनकर यूनिवर्सिटी बनाने की घोषणा का स्वागत है, लेकिन विश्वविद्यालय में चिंतन दिनकर आधारित हो, दिनकर पीठ की स्थापना होनी चाहिए। आरसीएस कॉलेज मंझौल के प्राचार्य प्रो. कमलेश कुमार ने कहा कि बच्चों को दिनकर की कविता पढ़ने के लिए प्रेरित करें। दिनकर हिंदी साहित्य की अनुपम उपलब्धि हैं। उनकी रचनाओं में देश को पूरे विश्व में आगे ले जाने की चेतना है। आज राजनीति की दिशा भटक गई है राष्ट्रीय संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए बीएचयू के प्रो. रामाज्ञा शशिधर ने कहा कि आज राजनीति की दिशा भटक गई है, ऐसे में केवल दिनकर की कविता ही सहारा है। उन्होंने कहा कि हिंदी प्रदेश में लेखकों को जो सम्मान मिलना चाहिए सिमरिया उससे कहीं अधिक पूरा कर रहा है। मंच संचालन प्रवीण प्रियदर्शी एवं राजेश कुमार ने संयुक्त रूप से किया। अतिथियों ने समर शेष है- 14 स्मारिका और चंद्रप्रभा देवी की ओर से लिखित कविता संग्रह जीवन का लक्ष्य पुस्तक का विमोचन किया गया। अतिथियों का स्वागत चादर और मोमेंटो से किया गया। राष्ट्रीय साहित्यिक संगोष्ठी से पूर्व अंतरराष्ट्रीय रंग निर्देशक प्रणव मुखर्जी के निर्देशन में सनबीम स्कूल वाराणसी के कलाकारों की ओर से राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविताओं पर आधारित नाटक का मंचन किया गया। जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पैतृक गांव सिमरिया के लिए रवाना हुए सभी अतिथियों ने जीरोमाइल स्थित राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पैतृक गांव सिमरिया के लिए रवाना हुए। ग्रामीणों ने भारी बारिश के बीच अतिथियों को सिमरिया पहुंचने पर भव्य स्वागत किया। यहां अतिथियों ने सिमरिया पंचायत भवन के समीप दिनकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दिनकर के पैतृक घर पहुंचे जहां दिनकर की तैल चित्र, उनकी बिछावन, छड़ी और जिस दलान पर बैठ दिनकर कविताओं का सृजन करते थे, उस दलान का भी दीदार किया। मौके पर दिनकर के पौत्र ऋतिविक उदयन एवं अरविंद कुमार सिंह, पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह, कला संस्कृति अधिकारी श्याम कुमार सहनी, कृष्ण कुमार शर्मा, कमल वत्स, ललन लालित्य, पुष्कर सिंह, शंभु सिंह, रामनाथ सिंह, संजीव फिरोज, एस. मनोज, राजकिशोर सिंह, विश्वम्भर सिंह, कन्हाई पंडित, विनोद बिहारी, अमरदीप सुमन, कृष्ण मुरारी, जितेंद्र, दीनबंधु, प्रदीप कुमार, कुंदन कुमार, विद्यासागर ब्रह्मचारी, एके मनीष, निशाकर एवं कुलदीप यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
अभ्यर्थियों को अतिथियों ने सम्मानित किया राष्ट्रकवि दिनकर सृजनात्मक प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को अतिथियों ने सम्मानित किया गया। प्रवीण प्रियदर्शी और संजीव फिरोज ने बताया कि मध्य स्तर में उत्क्रमित मध्य विद्यालय प्रेमनगर के कुंज बिहारी ने प्रथम, मध्य विद्यालय खरमौली के जिशान ने दूसरा और उत्क्रमित मध्य विद्यालय प्रेमनगर के लोकेश ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। माध्यमिक स्तर में वैष्णवी कोचिंग रुपनगर के आशीर्वाद ने प्रथम, उच्चतर विद्यालय खरमौली के दिव्यांशु ने दूसरा और उच्चतर विद्यालय पर्रा के अभिषेक ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
पूर्व सीएम विजय सिन्हा भी पैतृक आवास पहुंचे दूसरी तरफ राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर को नमन करने बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा गुरुवार की शाम उनके पैतृक गांव बेगूसराय के सिमरिया पहुंचे। यहां उन्होंने राष्ट्रकवि की प्रतिमा एवं चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद दिनकर जी के पैतृक घर में रखे स्मृति चिह्नों का अवलोकन किया। इस मौके पर दिनकर जी के पौत्र, स्थानीय विधायक रजनीश कुमार और विकास समिति के सदस्यों ने उनका स्वागत किया। इस मौके पर पत्रकारों से विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर की रचनाएं और विचार केवल बिहारियों को ही नहीं, बल्कि पूरे देशवासियों को प्रेरित करते हैं। दिनकर जी की कालजयी कृति रश्मिरथी की प्रसिद्ध पंक्तियों का पाठ करते हुए उन्होंने कहा कि सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है, सुरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते, विघ्नों को गले लगाते हैं, कांटों में राह बनाते हैं। उन्होंने कहा कि ये पंक्तियां संकट के समय में हर व्यक्ति को अदम्य साहस और संबल प्रदान करती है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में बेगूसराय में दिनकर विश्वविद्यालय के स्थापना को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। कैबिनेट बैठक में ही यह निर्णय लिया था कि इस ऐतिहासिक स्वीकृति के तुरंत बाद वे सिमरिया जाकर राष्ट्रकवि के चरणों में श्रद्धा-सुमन अर्पित करेंगे।
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