बुरहानपुर दुष्कर्म केस में आरोपी बरी:कोर्ट ने सहमति के संबंध माने; सगाई के बाद की थी शिकायत

बुरहानपुर दुष्कर्म केस में आरोपी बरी:कोर्ट ने सहमति के संबंध माने; सगाई के बाद की थी शिकायत




बुरहानपुर सत्र न्यायालय ने दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी सोनू (बदला हुआ नाम) को सोमवार को बरी कर दिया है। न्यायालय ने पाया कि पीड़िता और आरोपी पति-पत्नी की तरह साथ रह रहे थे, और जबरन दुष्कर्म के आरोप साबित नहीं हो सके। मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि युवक और युवती सात साल से एक-दूसरे को जानते थे। आरोपी का पीड़िता के घर आना-जाना लगा रहता था और वह उसके परिवार का खर्च भी उठाता था। युवती ने यह शिकायत तब दर्ज कराई जब आरोपी की सगाई कहीं और तय हो गई थी। आरोप था कि सगाई होने पर युवती ने युवक के निजी अंग काटने की धमकी भी दी थी, जिसके बाद उसने दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया। जबरन नजदीक आने का आरोप लगाया था
पीड़िता ने 29 मार्च 2025 को महिला थाने में जिले के एक गांव के रहने वाले युवक के खिलाफ दुष्कर्म का आरोप लगाया था। उसका कहना था कि विवाह का लालच देकर आरोपी ने उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया। कॉलेज में दोस्ती के बाद दोनों में प्रेम संबंध बने और छह माह में कई बार नजदीक आए। युवती के अनुसार, 29 मार्च को आरोपी उसके घर आया और जबरदस्ती संबंध बनाए। उसने शादी का लालच दिया और जान से मारने की धमकी भी दी। पीड़िता ने यह बात अपने परिजनों को बताई, जिसके बाद 2 अप्रैल 2025 को महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पीड़िता ने बताया था कि आरोपी ने शादी करने से मना कर दिया था। रिपोर्ट दर्ज कराने पर उसके परिजनों और आरोपी ने उसे पैसे लेकर मामला वापस लेने को कहा था। पुलिस ने आरोपी का डीएनए टेस्ट भी कराया था। कथनों में यह बात भी सामने आई थी कि दोनों पति-पत्नी की तरह साथ रहते थे। परिवार का खर्च उठाता युवक
आरोपी परिवार का खर्च उठाता था। परिवार की विवाह पत्रिका में आरोपी का भी नाम था और वह उसे दामाद मानते थे। जबकि उसकी सगाई दूसरी जगह हो गई हुई तो पीड़िता उसे ब्लैकमेल करने लगी। एक बार उसका प्रायवेट पार्ट काटने की धमकी दी गई। वहीं बयान में पीड़िता ने खुद इंदौर में रहने के दौरान 8 दिन की अवधि में अभियुक्त से संबंध बनाना स्वीकारा। दोनों के बीच सहमति से संबंध बने। सगाई का पता चलने पर आरोप लगने पर आरोपी ने बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजेक्शन के साथ एसपी को शिकायत की। साथ ही कोर्ट में परिवाद लगाया। उसने कहा कि परिवार दामाद की तरह व्यवहार करता था, लेकिन उसने कभी शादी का वादा नहीं किया। कोर्ट ने माना कि बिना सहमति संबंध बनाने की बात विश्वसनीय नहीं है। यह भी प्रमाणित नहीं हुआ कि शादी का लालच देकर संबंध बनाए हों। 29 मार्च को दुष्कर्म की बात भी प्रमाणित नहीं इसलिए कोर्ट ने आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।



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