बैतूल ट्रिपल मर्डर: आईजी-कमिश्नर गांव पहुंचे:आरोपी को ग्वालियर की विशेष जेल भेजने की तैयारी; कमिश्नर बोले-जांच की जानकारी ली गई

बैतूल ट्रिपल मर्डर: आईजी-कमिश्नर गांव पहुंचे:आरोपी को ग्वालियर की विशेष जेल भेजने की तैयारी; कमिश्नर बोले-जांच की जानकारी ली गई




बैतूल के चर्चित ट्रिपल मर्डर केस के आरोपी दीपक धुर्वे को ग्वालियर विशेष जेल में भेजने की तैयारी चल रही है, जहां मानसिक रोगी कैदियों का उपचार और निगरानी की सुविधा है। मंगलवार को नर्मदापुरम रेंज के पुलिस महानिरीक्षक मिथिलेश कुमार शुक्ला और कमिश्नर के. जी. तिवारी कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी और पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन के साथ सावंगा चौकी खेड़ी घटनास्थल पहुंचे और मामले की गहन पड़ताल की। अधिकारियों ने घर के अंदर का निरीक्षण किया और फोरेंसिक साइंस अधिकारियों से जांच से जुड़े तथ्यों की जानकारी ली। उन्होंने आसपास के ग्रामीणों से बातचीत कर परिवार की सामाजिक स्थिति और व्यवहार के बारे में जाना। ग्रामीणों ने बताया कि धुर्वे परिवार गांव में अलग-थलग रहता था और ज्यादा मेलजोल नहीं रखता था। अधिकारियों ने ग्राम कोटवार और पुलिस अमले से भी चर्चा की। उन्होंने आरोपी दीपक धुर्वे की मानसिक स्थिति को लेकर विस्तार से जानकारी ली और यह समझने का प्रयास किया कि भविष्य में इस तरह के मानसिक रोगी व्यक्तियों की पहचान व उपचार के लिए ग्राम स्तर पर क्या कदम उठाए जा सकते हैं। अधिकारियों ने कहा कि यह घटना न केवल अपराध बल्कि सामाजिक चेतावनी भी है कि मानसिक रोगों को अनदेखा करना कितना खतरनाक हो सकता है। आरोपी को विशेष जेल भेजने की तैयारी टीआई देवकरण डहरिया ने बताया कि दीपक धुर्वे का जेल वारंट तैयार कर लिया गया है। जेल प्रशासन से चर्चा के बाद उसे ग्वालियर स्थित विशेष जेल में भेजने का निर्णय लिया गया है, जहां मानसिक रोगियों के इलाज और निगरानी की समुचित व्यवस्था है। इसके लिए पुलिसकर्मियों का दल गठित किया गया है, जो मंगलवार रात रवाना किया जाएगा। पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने बताया कि आरोपी को फिलहाल जिला अस्पताल में रखा गया है। प्राथमिक जांच और चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे जेल भेजा जाएगा। जेल प्रशासन तय करेगा कि आरोपी को मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में उपचार के लिए भी भेजा जाए या नहीं। निरीक्षण के दौरान आईजी मिथिलेश शुक्ला और कमिश्नर केजी तिवारी ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों के लिए स्थानीय स्तर पर पहचान और सहायता का तंत्र विकसित होना चाहिए। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि गांव स्तर पर ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग और इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।



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