लाल आतंक की दास्तां:बस्तर में मतदान दल को टारगेट कर पहला बम धमाका 1991 में, तब एक साथ 7 जानें गई थीं
बस्तर समेत पूरे देश को नक्सल मुक्त बनाने केंद्र और राज्य सरकार की डेडलाइन में अब 3 दिन ही बाकी हैं। लगातार 35 साल बम धमाकों और गोलीबारी से लाल हो चुकी बस्तर की धरती पर अब बदलाव की तस्वीर साफ नजर आ रही है। इतिहास में झांके, तो बस्तर में पहला बम धमाका 20 मई 1991 को नारायणपुर- कोंडागांव रोड पर हुआ। मतदान दल को निशाना बनाकर किए गए इस आईईडी ब्लास्ट में 7 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। नक्सलियों ने बस्तर की उस घटना से पूरे छत्तीसगढ़ में अपनी मजबूत धमक दर्ज करवा दी थी। इसी के साथ बस्तर में बारूदी सुरंगों का जाल बिछाना शुरू हुआ। नक्सलवाद का आखिरी अध्याय बीते एक साल में निर्णायक लड़ाई: आईजी
आईजी पी. सुंदरराज बताते हैं कि नक्सलियों का आतंकी ढांचा पिछले एक दशक में काफी कमजोर हुआ। वहीं, पिछले एक साल में सबसे ज्यादा कार्रवाई की गई, जो निर्णायक रहीं। 2025 में 100 मुठभेड़ हुए, जिनमें 256 नक्सली मारे गए। 1573 ने सरेंडर किया, जबकि 898 नक्सली गिरफ्तार किए गए हैं।
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