संजय पार्क की संचालन समिति भंग,बढ़ाई गई सुरक्षा:हिरणों की मौत के बाद वनविभाग ने बताया रेस्क्यू सेंटर,वन्यजीवों को अवैध तरीके से रखने पर सवाल
अंबिकापुर के संजय पार्क में 15 हिरणों की मौत के बाद यहां की देखरेख करने वाली शंकरघाट वन सुरक्षा समिति को भंग कर दिया गया है। संजय पार्क में अब फेंसिंग और शीट लगाई जा रही हैं। सुरक्षा बढ़ाने के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए जाएंगे। संजय पार्क में वन्यजीवों को अवैध तरीके से रखे जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने इसे रेस्क्यू सेंटर के रूप में चलाने का प्रस्ताव विभाग को भेजा है। शुक्रवार (20 मार्च) रात संजय पार्क में घुसे आवारा कुत्तों ने हिरणों के बाड़े में दौड़ा-दौड़ाकर हिरणों को नोंच कर काट डाला। कुत्तों के काटने से 14 हिरणों की मौत शनिवार सुबह तक हो गई एवं एक हिरण की मौत रविवार को हुई। वनविभाग ने शनिवार को पोस्टमार्टम करा 14 हिरणों के शवों को गुपचुप तरीके से जलवा दिया। रविवार को एक हिरण की मौत के बाद मामले का खुलासा हो गया। शुक्रवार (20 मार्च) रात संजय पार्क में घुसे आवारा कुत्तों ने हिरणों के बाड़े में घुसकर दौड़ा-दौड़ाकर हिरणों को नोंच कर काट डाला। कुत्तों के काटने से 14 हिरणों की मौत शनिवार सुबह तक हो गई और एक हिरण की मौत रविवार को हुई। वन विभाग ने शनिवार को 14 हिरणों का पोस्टमार्टम कराया और गुपचुप तरीके से उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया। रविवार को एक हिरण की मौत के बाद यह मामला सामने आया। घटना से जुड़ी ये तस्वीरें देखिए… संचालन समिति को वन विभाग ने किया भंग संजय पार्क में 15 हिरणों की मौत के मामले में डिप्टी रेंजर सहित चार कर्मचारियों को सीसीएफ दिलराज प्रभाकर ने सस्पेंड कर दिया है। वहीं रेंजर अक्षपलक ऋषि को नोटिस जारी किया गया है। डीएफओ अभिषेक जोगावत ने एक महिला वनरक्षक फुलमनी को सस्पेंड किया है। वर्ष 1980 में विकसित संजय पार्क का संचालन करने वाली शंकरघाट वन सुरक्षा समिति को भी भंग कर दिया गया है। वन सुरक्षा समिति करीब दो दशक से संजय पार्क की देखरेख और संचालन कर रही थी। सरगुजा डीएफओ अभिषेक जोगावत ने इसकी पुष्टि की है। डीएफओ ने बताया कि संचालन समिति का नए सिरे से गठन किया जाएगा। हर माह दो लाख की कमाई, समिति के भरोसे सुरक्षा संजय पार्क में रोज बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। यहां झूले, गार्डन सहित ट्वाय ट्रेन भी चलती है। पार्क में हिरणों के अलावा दो नीलगाय और बड़ी संख्या में मोर के साथ अन्य प्रजाति के पक्षी हैं, जिन्हें नजदीक से देखने के लिए लोग पहुंचते हैं। संचालन समिति इस पर टिकट भी लगाती है। संजय पार्क से प्रतिमाह करीब दो लाख रुपए की आमदनी होती है। इससे संजय पार्क की व्यवस्था में लगे कर्मियों को भुगतान भी किया जाता है। वनविभाग के अनुसार दिन में यहां चार वनकर्मियों की ड्यूटी होती थी, जबकि रात में शंकरघाट वन सुरक्षा समिति के सदस्य चौकीदारी करते थे। यहां चौकीदारी करने वाले कर्मी को भी घटना के बाद हटा दिया गया है। मुख्य गेट के अलावा अन्य कहीं सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं। रेस्क्यू सेंटर बताने का प्रयास, विशेषज्ञ बोले-अवैध वन विभाग के अधिकारी अब तक संजय पार्क को रेस्क्यू सेंटर बताते रहे हैं, जहां घायल वन्य जीवों का इलाज किया जाना बताया गया है, लेकिन यहां हमेशा बड़ी संख्या में वन्यजीव रखे जाते रहे हैं। करीब पांच वर्ष पूर्व संजय पार्क से करीब 60 हिरणों को रमकोला में नेशनल पार्क परिसर में छोड़ा गया था। सेंट्रल जू अथारिटी से संजय पार्क को मान्यता नहीं है। न रेस्क्यू सेंटर की, न मिनी जू की। संजय पार्क को मिनी जू बनाने की पहल भी की गई थी। संजय पार्क मात्र 5 हेक्टेयर क्षेत्रफल में संचालित है और लेकिन व्यवस्थाएं नहीं हैं, इसलिए मिनी जू नहीं बनाया जा सकता। इसके बाद इसे रेस्क्यू सेंटर बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था। रायपुर के वन्यजीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने कहा है कि वन विभाग संजय पार्क को जू नहीं, रेस्क्यू सेंटर बताने की कोशिश कर रहा है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत रेस्क्यू सेंटर के लिए भी सेंट्रल जू अर्थारिटी की मान्यता अनिवार्य होती है, जो नहीं है। सिंघवी ने कहा कि यदि जानवर ठीक होने के बाद छोड़े जाते हैं तो यहां हिरणों की संख्या 31 तक कैसे पहुंच गई। दो नील गायों को भी अवैध तरीके से रखा गया है। संजय पार्क का अवैध संचालन जू की तरह किया जा रहा है, जिसकी जानकारी अधिकारियों को भी है। वन्य जीवों को तत्काल नेशनल पार्क में छोड़ा जाना चाहिए।
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