सस्टेनेबल फ्यूचर इनोवेशंस इन ग्रीन बिल्डिंग प्रैक्टिसेस पर सेमिनार:सीएम ने कहा – विकास के साथ प्रकृति को भी संभालना है, इसीलिए ग्रीन बिल्डिंग जरूरी
मप्र में अब ग्रीन बिल्डिंग का कॉन्सेप्ट केवल बड़े कॉरपोरेट दफ्तरों या आलीशान बंगलों तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य सरकार अब ऐसी निर्माण तकनीकों पर जोर दे रही है, जिससे आम नागरिक भी कम बजट में पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा दक्ष घर बना सके। कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में शनिवार को आयोजित ‘सस्टेनेबल फ्यूचर इनोवेशंस इन ग्रीन बिल्डिंग प्रैक्टिसेस’ विषय पर दो दिवसीय अखिल भारतीय सेमिनार में यह विजन सामने आया। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वर्तमान समय की बड़ी चुनौती यह है कि हम कंक्रीट के बढ़ते जंगलों और सिमटते प्राकृतिक संसाधनों के बीच खड़े हैं। ऐसे में हमें विकास के साथ प्रकृति को भी संभालना है, इसीलिए ग्रीन बिल्डिंग जरूरी हैं। आईआईटी इंदौर व पीडब्ल्यूडी के बीच निर्माण तकनीक पर एमओयू का आदान-प्रदान हुई । पीडब्ल्यूडी और गृहा (GRIHA) संस्था के बीच भी एक समझौता हुआ। हर वर्ग के लिए बने किफायती प्लान
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने विशेषज्ञों से आह्वान किया कि आर्किटेक्चर समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखकर प्लान तैयार करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश में टिकाऊ निर्माण के लिए प्राचीन भारतीय तकनीकों को अपनाया जा रहा है और अब राज्य के सभी सरकारी भवन ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर ही बनाए जा रहे हैं। आईबीसी के संस्थापक अध्यक्ष ओपी गोयल ने कहा कि इंजीनियरिंग सेक्टर में नए सॉफ्टवेयर और थ्रीडी प्रिंटिंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। वास्तु शास्त्री संदीप चौबे आदि ने भी विचार रखे। आज सीएम करेंगे इंदौर-पीथमपुर आर्थिक कॉरिडोर का भूमिपूजन इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले चरण का भूमिपूजन करेंगे। यह 20.28 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर न केवल सड़कों का जाल होगा, बल्कि आईटी- और फिनटेक कंपनियों के लिए एक नया इंडस्ट्री हब तैयार होगा। इस महत्वाकांक्षी औद्योगिक परियोजना को 1316 हेक्टेयर क्षेत्र में कुल 2360 करोड़ से विकसित किया जा रहा है। यह कॉरिडोर इंदौर एयरपोर्ट के पास सुपर कॉरिडोर को सीधे पीथमपुर निवेश क्षेत्र से जोड़ेगा। 75 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क के साथ विकसित होने वाला यह मार्ग एनएच-47, एनएच-52 को जोड़कर माल परिवहन की गति बढ़ाएगा व शहर के यातायात का दबाव कम करेगा।
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