हथिनी माधुरी 13 महीने बाद वनतारा से लौटी:कोल्हापुर में हुआ भव्य स्वागत, हजारों लोगों ने फूलों की बारिश की




महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के शिरोल तालुका स्थित नंदनी मठ में शनिवार को उस वक्त माहौल भावुक हो गया, जब 13 महीने बाद माधुरी हाथी अपने घर वापस लौटी। माधुरी के लौटने की खुशी में हजारों की संख्या में स्थानीय लोग जुटे और फूलों की बारिश कर उसका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान पूरा इलाका खुशी और उत्साह से भर गया। माधुरी पिछले 13 महीनों से गुजरात के वनतारा में थी। कोर्ट की प्रक्रिया और हाई पावर कमेटी के आदेश के बाद उसे वापस नंदनी मठ लाने का रास्ता साफ हुआ। इसके बाद वनतारा की टीम माधुरी को लेकर कोल्हापुर पहुंची। टीम के साथ वनतारा के CEO विवान कार्णिक भी मौजूद रहे। माधुरी के स्वागत की 3 तस्वीरें… रास्ते भर माधुरी पर बरसाए गए फूल माधुरी की वापसी के दौरान लोगों ने जगह-जगह उसका स्वागत किया। यात्रा के दौरान उस पर बड़े पैमाने पर फूल बरसाए गए। नंदनी मठ परिसर में भी माधुरी के स्वागत के लिए खास रंगोली बनाई गई थी। वहीं, नंदनी इलाके में अनंत अंबानी को धन्यवाद देने वाले होर्डिंग भी लगाए गए थे। जैसे ही माधुरी नंदनी पहुंची, वहां मौजूद हजारों लोगों ने फूलों की बारिश कर उसका स्वागत किया. लोगों के चेहरों पर अपनी प्यारी माधुरी के घर लौटने की खुशी साफ दिखाई दे रही थी. कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़े और उसके स्वागत में गुलाब के फूल भी बिखेरे. पहले समझिए मामला क्या है दरअसल, 16 जुलाई को बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि माधुरी को वनतारा में शिफ्ट किया जाए। यह आदेश PETA इंडिया की ओर से हथिनी की सेहत, गठिया और मानसिक तनाव को लेकर जताई गई चिंताओं के बाद दिया गया था। इससे पहले दिसंबर 2024 में, बॉम्बे हाईकोर्ट ने हथिनी के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए उसे गुजरात के वनतारा पशु अभयारण्य में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। फिर 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस आदेश को बरकरार रखा था। यह मामला 2023 से चल रहा है। माधुरी को वनतारा शिफ्ट किए जाने पर कोल्हापुर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ। लोगों ने उसको वापस लाने के लिए हस्ताक्षर किए। धार्मिक परंपराओं और भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया। 7 अगस्त को वनतारा का बयान- शिफ्टिंग कोर्ट के आदेश पर हथिनी विवाद पर वन्यजीव संस्था वनतारा ने 7 अगस्त को बयान जारी किया। इसमें कहा कि हथिनी ‘माधुरी’ को वनतारा शिफ्ट करने का फैसला उसका नहीं था, बल्कि यह माननीय सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेशों के तहत हुआ।
जैन मठ में 32 साल से रह रही थी कोल्हापुर के नांदणी गांव के जैन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्थान मठ में माधुरी नाम की हथिनी को 1992 में लाया गया था। इस जैन मठ में 700 सालों से ये परंपरा है कि यहां हाथी पाला जाता है। यह धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। यहां माधुरी हथिनी को तब लाया गया था, जब वह सिर्फ 4 साल की थी। वह यहां 32 सालों से रह रही थी।



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