सीडी कांड…7 साल बाद फिर बढ़ी भूपेश बघेल की मुश्किलें:सेशन कोर्ट ने CBI की रिव्यू याचिका मंजूर की, पूर्व सीएम सहित सभी आरोपियों पर चलेगा केस
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सीडी कांड में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। मार्च 2025 में सीबीआई की विशेष अदालत से आरोपों से बरी होने के करीब एक साल बाद अब उनके खिलाफ दोबारा मुकदमा चलेगा। सीबीआई द्वारा दाखिल की गई रिव्यू पिटिशन को सेशन कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने भूपेश बघेल को पेश होने के निर्देश दिए हैं। 2025 में केस हुआ था खारिज दरअसल, मार्च 2025 में सीबीआई की विशेष अदालत ने यह कहते हुए भूपेश बघेल को आरोपों से मुक्त कर दिया था कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। इस फैसले के खिलाफ सीबीआई ने सेशन कोर्ट में रिव्यू याचिका दाखिल की थी। अब सेशन कोर्ट ने सीबीआई की दलीलों को स्वीकार करते हुए विशेष अदालत के आदेश को पलट दिया है और मामले में दोबारा सुनवाई के आदेश दिए हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब सीडी कांड में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को फिर से कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मामले में प्रथम दृष्टया सुनवाई योग्य तथ्य मौजूद हैं, इसलिए ट्रायल आगे बढ़ाया जाएगा। मुरारका-विनोद वर्मा का आवेदन खारिज वहीं, इस केस के अन्य आरोपी कारोबारी कैलाश मुरारका और पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा ने भी भूपेश बघेल को मिली राहत के आधार पर खुद को आरोपों से मुक्त करने के लिए आवेदन लगाया था। हालांकि, सेशन कोर्ट ने उनके आवेदन को खारिज कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और उन्हें ट्रायल का सामना करना होगा। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के अलावा कारोबारी कैलाश मुरारका, पूर्व सीएम के सलाहकार विनोद वर्मा, विजय भाटिया और विजय पांड्या आरोपी हैं। मामले के एक अन्य आरोपी रिंकू खनूजा ने केस सामने आने के बाद आत्महत्या कर ली थी। गौरतलब है कि सीडी कांड छत्तीसगढ़ की राजनीति के सबसे बड़े विवादों में से एक रहा है। अब सेशन कोर्ट के इस फैसले से यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में आ गया है। छत्तीसगढ़ की राजनीति का टर्निंग पॉइंट बना था कांड सितंबर 2018 में सीडी कांड में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और विनोद वर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया, क्योंकि तीन महीने बाद ही विधानसभा चुनाव थे। भूपेश बघेल ने जमानत लेने से मना कर दिया था। यहीं से राजनीति में मोड़ आ गया। 15 साल से लगातार जीतती आ रही भाजपा के खिलाफ कांग्रेसी तख्ती लेकर निकल पड़े। हर तख्ती पर लिखा था- मैं भी भूपेश। गांव-गांव, शहर-शहर में बड़े आंदोलन हुए। कुछ दिन बाद भूपेश जेल से छूटे। उसके बाद विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 68 सीट जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया। ऐसा कहा गया कि भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में सफलता पाई। सीडी कांड में भूपेश के खिलाफ की गई कार्रवाई को तत्कालीन राजनीति में टर्निंग पॉइंट माना गया। क्या है छत्तीसगढ़ का सेक्स CD कांड ? दरअसल, अक्टूबर 2017 में छत्तीसगढ़ में कथित सेक्स सीडी सामने आई थी, जिसे राजेश मूणत का बताया जा रहा था। शिकायत के बाद पुलिस को दिल्ली में CD बनाने का इनपुट मिला। वहां से तार पत्रकार और कांग्रेस के मीडिया सलाहकार रहे विनोद वर्मा से जुड़े। इसके बाद रायपुर के IG रहे प्रदीप गुप्ता ने कहा था कि वर्मा CD बनवा रहे थे। वर्मा भूपेश बघेल के रिश्तेदार भी हैं। इन्हीं दावे के साथ पुलिस ने विनोद वर्मा को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद सितंबर 2018 में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल को भी गिरफ्तार किया गया था। भाजपा नेता प्रकाश बजाज ने की थी शिकायत भाजपा नेता प्रकाश बजाज की शिकायत पर 26 अक्टूबर 2017 को पंडरी थाने में पहला केस दर्ज किया गया। बजाज की दर्ज कराई FIR में ब्लैकमेलिंग का जिक्र है। किसी ने लैंड लाइन से उन्हें फोन पर कहा था कि मेरे पास तुम्हारे आकाओं के अश्लील वीडियो हैं, पैसे दो वर्ना CD बनाकर बांट दूंगा। पुलिस ने नंबर को ट्रेस किया दिल्ली की एक दुकान का इनपुट मिला, यहां CD रिकॉर्डिंग का काम होता था। यहां से वर्मा और फिर दूसरे आरोपियों का लिंक मिलने की बात CBI और पुलिस करती है। जिन पर केस दर्ज है।
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