नोएडा सेक्टर-150 बेसमेंट बना मौत का तालाब:5 साल तक भरे पानी में डूबा सिस्टम, सेटेलाइट इमेज ने खोली लापरवाही की परतें

नोएडा सेक्टर-150 बेसमेंट बना मौत का तालाब:5 साल तक भरे पानी में डूबा सिस्टम, सेटेलाइट इमेज ने खोली लापरवाही की परतें




सेक्टर-150 के एससी-02/ए3 प्लॉट पर इंजीनियर युवराज की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सालों से चली आ रही प्रशासनिक और निर्माण स्तर की लापरवाही का नतीजा थी। एसआईटी की रिपोर्ट में सामने आई सेटेलाइट इमेज ने इस पूरे मामले की टाइमलाइन को बेनकाब कर दिया है। इमेज साफ दिखाती हैं कि जिस बेसमेंट में पानी भरने से युवराज की जान गई, वह गड्ढा 2022 से ही एक जानलेवा जाल बन चुका था। 2017 में खोदा गया गड्ढा, सुरक्षा इंतजाम शून्य
2017 में प्लॉट पर बेसमेंट निर्माण के लिए गड्ढा खोदा गया। हैरानी की बात यह है कि खुदाई के बाद न तो सरिया लगाया गया और न ही किसी तरह की संरचनात्मक सुरक्षा की गई। नियमों के मुताबिक इतनी गहरी खुदाई के बाद साइट को सुरक्षित करना जरूरी था, लेकिन मौके पर ऐसा कुछ भी नहीं किया गया।
2022-23 में भरने लगा पानी, किसी ने नहीं सुनी चेतावनी
2022 और 2023 की सेटेलाइट इमेज में साफ दिखता है कि गड्ढे में पानी भरना शुरू हो चुका था। शुरुआत में इसे मामूली माना गया, लेकिन समय के साथ पानी का स्तर लगातार बढ़ता गया। इसके बावजूद न तो बिल्डर ने पानी निकाला और न ही प्राधिकरण ने सख्त कार्रवाई की।
दो बड़ी वजह: टूटी ड्रेनेज और यमुना की बाढ़
जांच में पानी भरने की दो मुख्य वजहें सामने आई हैं। पहली, साइट के पास की ड्रेनेज लाइन का टूटा होना, जिससे पानी लगातार गड्ढे में जाता रहा। दूसरी, 2023 में यमुना नदी में आई भीषण बाढ़, जिसके चलते हिंडन नदी में बैक फ्लो हुआ। इस बैक फ्लो का पानी भी इसी बेसमेंट में भर गया। इसके बाद हालात ऐसे बने कि गड्ढा धीरे-धीरे तालाब की शक्ल में तब्दील हो गया।

नोटिस दिए गए, लेकिन कार्रवाई सिर्फ कागजों में
प्राधिकरण ने इस प्लॉट को लेकर कई बार नोटिस जारी किए। बिल्डर को पानी निकालने, साइट सुरक्षित करने और निर्माण नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए। लेकिन ये नोटिस सिर्फ फाइलों तक सीमित रह गए। जमीनी स्तर पर न तो पानी निकाला गया और न ही कोई ठोस कार्रवाई हुई।
दो दिन पहले तक पूछताछ, 20 नए सवाल-जवाब
एसआईटी ने दो दिन पहले तक प्राधिकरण से करीब 20 और सवालों के जवाब मांगे गए। ये सवाल प्लॉट पर गड्ढा खोदने की अनुमति, वर्क ऑर्डर, साइट सुपरविजन और पानी भरने की जानकारी से जुड़े थे। जांच में निचले पायदान के कर्मचारियों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक की जिम्मेदारी तय की जा रही है। खासतौर पर रिपोर्टिंग चेन और यह जानने पर जोर है कि किस स्तर पर लापरवाही हुई। सोमवार तक एक्शन की उम्मीद, जिम्मेदारों पर गिरेगी गाज
एसआईटी को सभी जरूरी दस्तावेज और जवाब सौंप दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक सोमवार तक इस मामले में बड़ी कार्रवाई हो सकती है। माना जा रहा है कि युवराज की मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और बिल्डर पर कड़ी कार्रवाई तय है।



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