कथा में लगा दी मास्टरजी की ड्यूटी:आपे से बाहर हो गए कृषि मंत्री; SHO साहब ने बहाई भक्ति की धारा

कथा में लगा दी मास्टरजी की ड्यूटी:आपे से बाहर हो गए कृषि मंत्री; SHO साहब ने बहाई भक्ति की धारा




नमस्कार सवाई माधोपुर में मेडिकल कॉलेज का घटिया निर्माण देखकर कृषि मंत्रीजी को गुस्सा आ गया। शोक सभा में जाते सचिन पायलट ने बानसूर में नारेबाजी करते समर्थकों को टोक दिया। बूंदी में सरकारी स्कूल के टीचर्स की ड्यूटी रामकथा में लगी तो पीसीसी चीफ ने मुद्दा विधानसभा में उठा दिया और सामोद थाना इंचार्ज ने होटल की ओपनिंग में खूब सुर साधे। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. मेडिकल कॉलेज के हाल देख मंत्रीजी का पारा हाई कृषि मंत्री जी खुद डॉक्टर रहे हैं। बीकानेर से मेडिकल की पढ़ाई की थी। कभी-कभी किस्सा सुनाते हैं कि इमरजेंसी के वक्त इंदिरा जी ने जेल में डाल दिया था। कई बार तो जनसुनवाई में शिकायत लेकर आए फरियादी की कलई पकड़कर नब्ज देखने लगते हैं। किरोड़ी बाबा के ये ही जलवे हैं। मन मोम सा नर्म है। लेकिन अपने विधानसभा क्षेत्र सवाई माधोपुर में जब उन्होंने मेडिकल कॉलेज की नई इमारत में घटिया निर्माण कार्य देखा तो पारा हाई हो गया। मंत्री महोदय आपे में नहीं रहे। जिस तरह से ईंटें हाथ से उखड़ रही थीं, गुस्सा वाजिब भी था। जिम्मेदार इंजीनियर को मौके पर बुलाया गया। मंत्रीजी ने साहब को निर्माण की हकीकत दिखाई और जोर से चिल्लाए- शर्म नहीं आती तुमको? बेचारे साहब घिघियाकर एक फीट दूर हो गए। 2. सचिन पायलट ने दी समर्थकों को नसीहत नेता को क्या चाहिए? समर्थक। नेताजी जहां जाएं वहां भीड़ जुटे, स्वागत हो, मालाएं पहनाई जाएं, साफे कसे जाएं, पटाखे चलाए जाएं। नेताजी को और क्या चाहिए। लेकिन हर काम का मौका होता है, दस्तूर होता है। कांग्रेस नेता सचिन पायलट खैरथल तिजारा जा रहे थे। सीनियर नेता हेम सिंह का निधन हुआ था। मन में गहरा शोक था। हेम सिंह करीबी नेता थे। बानसूर से पूर्व मंत्री शकुंतला रावत को भी साथ ही जाना था। वे समर्थकों के साथ सड़क किनारे अलाव जलाकर पायलट का काफिला आने का इंतजार कर रही थीं। पायलट बानसूर पहुंचे तो समर्थक उत्साहित हो गए। फूल भेंट होने लगे। आतिशबाजी की जाने लगी। स्वागत में नारे लगाने लगे। कुछ देर तो पायलट सुनते रहे। फिर कार से निकले। बोले- आज मौका ठीक है क्या बताओ मुझे। आप लोग जो कर रहे हो वो अच्छी बात है क्या? किसी की मौत हुई है। बैठक में जा रहे हैं। आप लोग राम-राम करो ये अलग बात है। लेकिन पटाखे चला रहे हो, फूल लगा रहे हो? समर्थक झेंप गए। पायलट साहब ने कहा- अभी तो आप राम-राम ही कर लो, इसमें कोई दिक्कत नहीं हैं, मैं आप लोगों से मिलने दोबारा आ जाऊंगा। इस पर एक समझदार कार्यकर्ता बोला- हां..हां साहब आप फ्री होकर दोबारा आ जाना। पायलट ने तुरंत चुटकी ली- लगता है आप लोग जल्दी ही फ्री करवाओगे। 3. मास्टरीजी की रामकथा में ड्यूटी मामला बूंदी के नैनवां का है। एग्जाम सिर पर हों तो हों। SIR के काम से गुजरकर शिक्षक पक्के हो गए हैं। ऐसे में उनकी ड्यूटी अब कहीं भी लगाई जा सकती है। यही बात ध्यान में रखते हुए शिक्षा अधिकारी ने 5 शिक्षकों की ड्यूटी कस्बे में चलने वाली रामकथा में लगा दी। जैसे ही लेटर जारी हुआ, इस पर हाय-तौबा मच गई। बात सोशल मीडिया पर निकलती है तो दूर तलक अपने आप चली जाती है। शिक्षा विभाग की हंसी उड़ने लगी। सवाल दागे जाने लगे। हालांकि कुछ ही देर बाद शिक्षा अधिकारी को गलती का आभास हुआ और आदेश वापस ले लिया गया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने विधानसभा में मुद्दा लपक लिया। सीधे शिक्षा मंत्री पर निशाना साधा। खूब तंज कसे। सदन में बोले- वाह शिक्षा मंत्रीजी आप महान हैं। बागेश्वर बाबा कोटा आए तो आप बाबाजी बन गए, शिक्षा विभाग राम भरोसे चल रहा है। अध्यापकों को 9 दिन की ड्यूटी यज्ञ और रामकथा में लगा दी। उन्होंने कहा- पहले कुत्तों को भगाने में ड्यूटी लगाई थी, वो काम फिर भी ठीक था कि कुत्ते किसी को काट न लें लेकिन रामकथा में ड्यूटी? इसके बाद एक-दो मुद्दों को छूते हुए उन्होंने अपनी बात पूरी की। वैसे डोटासरा और दिलावर का एक-दूसरे पर तंज कसने का नाता बहुत पुराना है। 4. चलते-चलते… बूंदी में तो मास्टरों की कथा वाली ड्यूटी कैंसिल हो गई। लेकिन जयपुर ग्रामीण के सामोद थाने के SHO गोपीचंद मुस्तैद हैं। उन्हें भजन गाने का शौक है। ये अलग बात है कि पुलिस बहुत ज्यादा व्यस्त रहती है। पुलिस को कहां समय मिलता है। कितने ही केस पेंडिंग होते हैं। हर रोज कहीं न कहीं कोई न कोई अपराध होता है। थानों में फाइलों के अंबार लगे होते हैं। पुलिसवाले की ड्यूटी बहुत मुश्किल होती है। इसके बावजूद एसएचओ साहब अपने शौक को पूरा करने का समय निकाल ही लेते हैं। अगर वर्दी में हों और भजन गाने की हूक जाग पड़े तो वर्दी में माइक थामकर स्टेज संभाल लेते हैं। 5 भजन से नीचे तो माइक छोड़ते ही नहीं। उनके कद्रदान की संख्या भी कम नहीं है। सामोद वीर हनुमान धाम पर उन्होंने सवामणि का कार्यक्रम रखा। इस कार्यक्रम में उन्होंने ऐसा जोरदार भजन गया कि एक होटल की ओपनिंग में भजन गाने की डिमांड आ गई। एसएचओ साहब ने यहां भी डंका बजा दिया। इनपुट सहयोग- नरेंद्र भारद्वाज (सवाई माधोपुर), सुरेश सैनी (बानसूर), मुकेश नागर (बूंदी), मनोज सैनी (चौमूं)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…



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