मंडी में सेरी मंच होली महोत्सव पर संकट:20 साल पुरानी परंपरा पर प्रशासन की बेड़ियां; आयोजक बोले- असंभव है आयोजन

मंडी में सेरी मंच होली महोत्सव पर संकट:20 साल पुरानी परंपरा पर प्रशासन की बेड़ियां; आयोजक बोले- असंभव है आयोजन




हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर के ऐतिहासिक सेरी मंच पर हर साल आयोजित होने वाला होली महोत्सव इस बार संकट में है। प्रशासन द्वारा जारी सख्त शर्तों के कारण 20 वर्ष पुरानी यह परंपरा बाधित होने की आशंका जताई जा रही है। आयोजकों का कहना है कि अनुमति पत्र तो मिल गया है, लेकिन उसमें शामिल नियम इतने कठोर हैं कि आयोजन कर पाना लगभग असंभव हो गया है। आयोजक मंडल में प्रसिद्ध सराफा व्यापारी राजा सिंह मल्होत्रा, प्रेस क्लब मंडी की उपप्रधान मोनिका ठाकुर, शिक्षाविद धर्मेंद्र राणा, युवा व्यापारी कर्तव्य वैद्य और दीप कपूर शामिल हैं। इन सभी ने प्रशासन की शर्तों पर आपत्ति जताई है। आयोजकों के अनुसार, अनुमति पत्र में आयोजन स्थल पर एक समय में अधिकतम 3,500 लोगों की उपस्थिति की सीमा तय की गई है। यह एक खुला आयोजन है, जिसमें हर साल हजारों लोग स्वतः शामिल होते हैं। ऐसे में प्रवेश को नियंत्रित करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी पर विवाद आयोजकों की सबसे बड़ी आपत्ति उस शर्त पर है, जिसमें कहा गया है कि आयोजन स्थल के बाहर शहर में किसी भी कानून-व्यवस्था संबंधी घटना की जिम्मेदारी आयोजकों की होगी। युवा व्यापारी दीप कपूर ने कहा कि सेरी मंच की व्यवस्था संभालना संभव है, लेकिन पूरे शहर की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी आयोजकों पर डालना अनुचित है। देर से मिली अनुमति बनी चुनौती प्रेस क्लब मंडी की उपप्रधान मोनिका ठाकुर ने बताया कि अनुमति पत्र शुक्रवार को प्राप्त हुआ, जबकि होली सोमवार को है। इतने कम समय में सभी औपचारिकताओं को पूरा करना बेहद कठिन है। उनका कहना है कि यदि दिशा-निर्देश पहले जारी किए जाते, तो आवश्यक प्रबंध समय पर किए जा सकते थे। युवाओं के प्रयासों को झटका कर्तव्य वैद्य ने कहा कि आयोजक टीम का उद्देश्य इस महोत्सव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाना था, ताकि मंडी की होली को नई पहचान मिले और पर्यटन को बढ़ावा मिले। शिक्षाविद धर्मेंद्र राणा ने कहा कि प्रशासन की सख्त शर्तों ने युवाओं के उत्साह और प्रयासों को झटका दिया है। शहर में निराशा का माहौल वर्तमान स्थिति को देखते हुए, सेरी मंच की 20 साल पुरानी होली परंपरा इस बार बाधित होने की संभावना है। इससे शहरवासियों में निराशा और चिंता का माहौल है, क्योंकि मंडी की होली न केवल सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, बल्कि यह स्थानीय व्यापार और पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण आयोजन माना जाता है।



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