एनिमेशन का स्वर्णिम साल, फिल्मों की कमाई 1800 करोड़ तक:सिल्वर स्क्रीन पर गढ़े गए किरदारों का राज, इनकी कहानियां हर उम्र को जोड़ रहीं, भाषा-सरहदें भी छोटी पड़ीं

एनिमेशन का स्वर्णिम साल, फिल्मों की कमाई 1800 करोड़ तक:सिल्वर स्क्रीन पर गढ़े गए किरदारों का राज, इनकी कहानियां हर उम्र को जोड़ रहीं, भाषा-सरहदें भी छोटी पड़ीं




एनिमेशन फिल्मों के लिए 2026 बेहद खास माना जा रहा है। इस साल कई बड़ी फिल्में रिलीज हो रही हैं जिनमें जानवरों, खिलौनों और वीडियो गेम के किरदारों की कहानियां होंगी। इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि यह साल एनिमेशन के इतिहास का सबसे सफल साल साबित हो सकता है। इसकी शुरुआत 6 मार्च को आई एनिमेटेड फिल्म हॉपर्स ने कर दी है। कहानी अमेरिकी शहर बीवर्टन में रहने वाले बीवरों (ऊदबिलाव प्रजाति के जानवर) पर आधारित है। शहर का मेयर जंगल हटाकर फ्रीवे बनाना चाहता है। इससे नाराज किशोरी पर्यावरण कार्यकर्ता मेबल प्रयोग के जरिए अपनी चेतना को रोबोटिक बीवर में डाल देती है। वह बीवरों से दोस्ती कर उन्हें अपने जंगल को बचाने के लिए प्रेरित करती है। असल कहानी एनिमेशन फिल्मों के बूम की है। इस गर्मी में ‘डेस्पिकेबल मी’ और ‘पॉ पेट्रोल’ जैसी मशहूर फ्रेंचाइजी की नई फिल्में आ रही हैं। वहीं ‘द सुपर मारियो गैलेक्सी’ और ‘टॉय स्टोरी 5’ अरबों डॉलर कमा सकती हैं। फरवरी में रिलीज हुई ‘गोट’ फिल्म, जिसमें खुर वाले जानवर खेलों में उतरते हैं, अब तक लगभग 1200 करोड़ कमा चुकी है। यह साल की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई वाली एनिमेशन फिल्म बन गई है। दिलचस्प बात यह है कि एनिमेशन फिल्में अब सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि हर उम्र के दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं। 1995 में अमेरिका और कनाडा के फिल्म बाजार में इनका हिस्सा केवल 2.8% था, जो 2024 तक 23.9% हो गया। उसी साल ‘इनसाइड आउट 2’ ने 15,616 करोड़ रुपए कमाकर रिकॉर्ड बनाया। पर 2025 की शुरुआत में चीनी फैंटेसी फिल्म ‘ने झा 2’ ने इसे पीछे छोड़ते हुए 18,372 करोड़ से ज्यादा कमा लिए। नवंबर में आई ‘जूटोपिया 2’ भी 17,450 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। जीवन के सामान्य अनुभव मन को स्पर्श कर जाते हैं: एक्सपर्ट मीडिया विश्लेषण कंपनी एम्पेयर की ओलिविया डीन कहती हैं, ‘कहानियों की सार्वभौमिकता एनिमेशन फिल्मों की सफलता का सबसे बड़ा कारण है। इनमें जीवन के सामान्य अनुभव दिखाया जाता है। यह भाषा व संस्कृति की सीमाओं से परे समझा जा सकता है। किरदारों के भाव व सरल कथानक दर्शकों को कहानी से जोड़ लेते हैं। इसके अलावा, बड़े स्टूडियो प्रमुख फिल्मों को छुट्टियों या त्योहारों पर लाते हैं। माता-पिता के लिए भी सिनेमा बच्चों को व्यस्त रखने का सबसे आसान तरीका है।’ भारत में भी बढ़ रही रुचि भारतीय एनिमेशन उद्योग सिर्फ आउटसोर्सिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मौलिक कहानियों का पावरहाउस बन चुका है। 2025 के अंत में रिलीज हुई फिल्म ‘महावतार नरसिम्हा’ ने देश में ₹100 करोड़ का आंकड़ा पार कर नया इतिहास रच दिया। भगवान विष्णु के नरसिम्हा अवतार और भक्त प्रहलाद की यह कहानी दिखाती है कि पौराणिक कथाओं व आधुनिक 3 डी एनिमेशन का संगम दर्शकों को लुभा सकता है। इधर होम्बले फिल्म्स ने महावतार सिनेमैटिक यूनिवर्स के तहत छह और फिल्मों की घोषणा की है। छोटा भीम का बड़े पर्दे पर विस्तार व रामायण के नए एनिमेटेड रुपांतरण ने भी उत्साह पैदा कर दिया है।



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