Hospital Costs Out-of-Pocket | Health Insurance India 2026
नई दिल्ली3 घंटे पहले
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प्रतीकात्मक फोटो।
देश में हाल के वर्षों में हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज तेजी से बढ़ा है। सरकार का दावा है कि यह बीमा सुरक्षा देश की करीब आधी आबादी तक पहुंच चुकी है। लेकिन इलाज का बोझ आम परिवारों की जेब पर अब भी भारी पड़ रहा है। एनएसएस हेल्थ सर्वे 2025 के मुताबिक, देश में एक अस्पताल में भर्ती होने पर अब भी औसतन 34,064 रुपए जेब से खर्च करने पड़ते हैं।
सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक हाल के वर्षों में बीमारी रिपोर्ट करने वाले दोगुने हो गए हैं। 2017-18 में 15 दिनों के भीतर 7.5% लोग बीमार पड़ते थे। 2025 में यह संख्या 13.1% हो गई। यह बढ़ोतरी सिर्फ ज्यादा बीमारियों का नहीं, बल्कि बढ़ती जागरूकता, बढ़ती पहुंच और डायबिटीज-हाइपरटेंशन जैसी गैर-संक्रामक बीमारियां बढ़ने का भी संकेत है।
प्रतीकात्मक फोटो।
निजी अस्पतालों में औसत खर्च 8 गुना तक ज्यादा सरकारी अस्पतालों में जेब से औसत खर्च ₹~6,631 है। आधे मामलों में ₹~1,100 या उससे भी कम है। निजी अस्पतालों में यही औसत ₹~50,508 है। करीब आठ गुना का अंतर है। प्रसव के मामले में भी सरकारी अस्पताल में औसत खर्च ~₹2,299, जबकि सभी अस्पतालों में ~14,775 है।
निजी अस्पतालों में प्रति इलाज औसत खर्च ₹50,508
| अस्पताल | औसत | मीडियन |
| सरकारी | ₹6,631 | ₹1,100 |
| चैरिटी, ट्रस्ट, NGO | ₹39,530 | ₹10,000 |
| प्राइवेट | ₹50,508 | ₹24,000 |
| सभी | ₹34,064 | ₹11,285 |
नोट: मीडियन मतलब आधे मामलों में औसत खर्च, स्रोत: एनएसएस हेल्थ सर्वे 2025
47% से ग्रामीण, 44% शहरी को हेल्थ कवर स्वास्थ्य बीमा के मोर्चे पर काफी कामयाबी मिली है। ग्रामीण कवरेज 2017-18 के 14.1% से बढ़कर 2025 में 47.4% और शहरी कवरेज 19.1% से बढ़कर 44.3% पहुंच गया। ग्रामीण इलाकों में 45.5% और शहरी क्षेत्रों में 31.8% लोग सरकारी बीमा से कवर हैं। इसके बावजूद बीमा होने का मतलब पूरी आर्थिक सुरक्षा नहीं है, क्योंकि दवाएं, जांच और फॉलो-अप खर्च अक्सर जेब से ही भरने पड़ते हैं।

