श्रमिक कानून के विरोध में ट्रेड यूनियनों का काला दिवस:हनुमानगढ़ में प्रदर्शन, राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर कानून रोकने की मांग
हनुमानगढ़ में भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) से जुड़े संगठनों ने नई श्रम संहिताओं के विरोध में ‘काला दिवस’ मनाया। इस दौरान मजदूरों ने काली पट्टी बांधकर और काले झंडे दिखाकर केंद्र सरकार के फैसलों के खिलाफ प्रदर्शन किया। संगठनों ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भेजा, जिसमें 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले श्रम कानूनों पर रोक लगाने की मांग की गई। उनका तर्क है कि इन कानूनों को ट्रेड यूनियनों से बिना किसी चर्चा के लागू किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विरुद्ध है। माकपा नेता रघुवीर वर्मा ने कहा कि देशभर में मजदूर वर्ग इन नीतियों का विरोध कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नई श्रम संहिताएं मजदूरों के हितों के खिलाफ हैं और इनसे उनके अधिकार कमजोर होंगे। वर्मा ने बताया कि इन कानूनों से काम के घंटे बढ़ सकते हैं और श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा प्रभावित होगी। इसके अलावा ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलने से स्थायी नौकरियों में कमी आ सकती है और यूनियनों के अधिकार भी सीमित होने की आशंका है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि मजदूरों ने लंबे संघर्ष के बाद जो अधिकार हासिल किए थे, वे अब कमजोर हो रहे हैं। न्यूनतम वेतन, कार्यस्थल सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी इन कानूनों का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ट्रेड यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इन कानूनों को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। संगठनों ने स्पष्ट किया कि मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा और उनके अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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